मुझे भी एक पल के लिए लगा था कि IPHONE के वजह से कोई थोड़ी न जान देगा!
सोशल मीडिया पर ऐसा वायरल था कि महाराष्ट्र का कुणाल IPHONE की किश्त नहीं दे पा रहा था तो पहाड़ी पर चढ़ गया
जिसके बाद पहाड़ी से गिरने के बाद बेटा, मां और बाप सबकी मौत हो जाती है।
असल में यह कारण गलत और झूठ है।
कुणाल एक बहुत अच्छा लड़का था और डॉक्टर बनना चाहता था लेकिन उसके माता पिता में अनबन थी और पिता कुछ समय से अलग रहते थे।
वो दोनों को मिलाना चाहता था इसलिए पहाड़ी पर चढ़ा था, जिसके बाद से सभी की मौत हो जाती है।
दोस्तों इस देश में जातिवाद और जातिगत आधार पद भेदभाव कभी जा नहीं सकता है।
मैने अपने गांव के जिस रोड के लिए टंकी पर चढ़ाई की थी, जिसके बाद प्रशासन की नींद खुली है, उस रोड से वहां के मुस्लिम, पासी और प्रजापति समुदाय का आना -जाना है।
लेकिन गांव के ही कुछ विशेष लोग, मुझसे नहीं, अन्य लोगों से कह रहे हैं कि
"मैं मर भी जाऊंगा, तब भी वो रोड नहीं बनेगा"
अब सोचिए उन लोगों की मानसिकता कैसी होगी जो विकास को भी जाति के भेदभाव पर तौल कर एक रोड बनवाने की कीमत जान से चुकाने की बात कर रहे हैं।
इन सबको देखकर आरक्षण हटाने की बात मैं कैसे कर सकता हूं?!
चर्चित इंफ्लूएंसर "शेषनाथ यादव" वाराणसी सिटी पर उतरे, उन्हें जोर से पेशाब लग गई।
सुलभ शौचालय में करने पेशाब करने गए तो वहां बैठे चाचा ने ₹5 मांग लिए
जबकि रेट लिस्ट पर पेशाब करने का शुल्क केवल ₹2 लिखा हुआ था।
अगर रेट लिस्ट पुराना है तो उसे अपडेट क्यों नहीं किया जा रहा है?
अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह धांधली है और यह सुलभ शौचालय वाले ऐसा ही करते हैं, मनमानी वसूली करते हैं और कोई विरोध करता है
तो अन्य लोग ही यह कहकर मन बढ़ा देते हैं कि अरे 5-10 रुपए के लिए लड़ाई नहीं करनी चाहिए।
घोसी से मधुबन जाने वाले सड़क पर ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।
स्थानीय लोग बता रहे हैं कि ड्राइवर सो गया था, लेकिन मुझे लग रहा है कि ड्राइवर पीकर गाड़ी चला रहा था।
बिहार से एक वीडियो आया है जिसमें,
यह पीला कुर्ता पहना हुआ व्यक्ति "लालू प्रसाद यादव" जी की तस्वीर को दूध से नहला रहा है।
देखिए दोस्तों बिहार में जिस प्रकार की गंदी राजव्यवस्था थी, उसका खात्मा करके सामाजिक न्याय के राज की स्थापना करने में लालू प्रसाद का अहम योगदान रहा है।
इसलिए बिहार में लालू प्रसाद यादव को लोग बहुत मानते हैं और कई लोग तो पूजा भी करते हैं।
बाकी आप इस कार्य को कैसे देखते हैं??
सफ़ेद शर्ट वाले लड़के के दादाजी हैं मोदी जी,
ऐसा इन्होंने शुभंकर मिश्रा जी के पॉडकास्ट में कहा है।
इस हिसाब से सफ़ेद शर्ट वाला लड़का मोदी जी का क्या हुआ?!
रामदुलारी नाम की यह महिला लखनऊ के PVR INOX Crown Mall में बहुत समय से काम करती है।
यह जिस पुरुष का फोटो मोबाइल में दिखा रही है , उसका नाम "दीपक" है जो कि वहां का एक सुपरवाइजर है।
रामदुलारी का आरोप है कि दीपक उससे गंदी- गंदी बात करने को कहता है, लगातार उसे प्रताड़ित करने में लगा हुआ है।
रामदुलारी जब शिकायत की बात कहती है तो उसकी एंट्री बंद करवा दी जाती है, जिसके कारण रामदुलारी बहुत परेशान हैं।
बताइए योगी जी के उत्तर प्रदेश में एक महिला सही से काम नहीं कर पा रही है??
क्या महिलाओं की सुरक्षा करेंगे??
#आरक्षणहमाराअधिकार
अखिलेश यादव जी के 2 बेटियां और एक बेटा है, लाखों करोड़ों की संपत्ति है, वो लोग सेटल है ,क्या ज़रूरत है उनको लड़ने की,वो लोग आराम से घर में बैठ ये सब देखते उनको आरक्षण मिले या ना मिले उनको कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
लेकिन फिर भी वो अपने समाज के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे है कि उनको न्याय मिल जाए अधिकार मिल जाए।
जो शोषित है उनको न्याय दिला रहे है जो वंचित है उनको हाथ पकड़ आगे बढ़ा रहे है,क्या वो खुद के लिए कर रहे है??जी नहीं वो अपने समाज के लिए कर रहे है उनको जागरूक कर रहे है उनको उनका हक़ दिला रहे है।
आपको बता दे आरक्षण कभी गरीबी हटाओ योजना नहीं था,और ना ही कभी आरक्षण को लागू करने का मकसद आर्थिक आधार रहा है।
आरक्षण को बाबा साहेब ने इस देश में लागू इसलिए लिए लागू किया था कि क्योंकि इस समाज में उस समय जातिगत भेदभाव था, छूआछूत था, उच्च नीच का भेद था, असमानता था।
और यह ऊंच नीच का भेद असमानता इस समाज में अभी तक है इस वजह से आरक्षण भी आज तक है।
जब 1882 में ज्योतिबा फुले जी ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पिछड़े और दलितों के प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाया था तो इसके पीछे का कारण ग़रीबी और आर्थिक नहीं था बल्कि समाज में फैले जातिगत भेदभाव था, छूआछूत और असामनता था, उनको लगा था कि शिक्षा सिर्फ एक वर्ग के लोगों को मिल रहा है, जबकि जरूरत सभी समाज के वर्गों को था उन्होंने खुद अपने आँखो से इस भेदभाव को देखा था।
इस देश में आरक्षण तब तक रहेगा जब तक जातिगत भेदभाव रहेगा तो आरक्षण खत्म करने के लिए सबसे पहले जाति को ख़त्म करना होगा।
मतलब हमें मिलकर एक देश एक जाति की मांग रखना होगा।
कल दिल्ली में सारे सवर्ण दुबे, पाठक,मिश्रा कह रहे थे कि आरक्षण हटाना है या आरक्षण में सुधार करना है मतलब ये तो वही बात हो गया दूध की रखवाली के लिए बिल्ली को दरबान बना दिया जाएं।
अगर आपको आरक्षण से दिक्कत है तो हमें जातिगत भेदभाव से छुआछूत ऊंच नीच से दिक्कत है।
अगर जाति खत्म हो जाए इस देश से तो आरक्षण भी खत्म हो जाएगा।
@yadavakhilesh
बारिश के बाद हमारे यहां के रोड कि स्थित देखिए ज़रा,
नई -नई बाइक भी इसपर जाने लायक नहीं है।
बद से बदत्तर स्थित हो चुकी है, फिर भी गांव के कुछ विशेष लोग चाहते हैं कि रोड कभी ना बने।
आज एक बहुत भयानक सपना देखा हूं,
सपने में देख रहा था कि आरक्षण खत्म हो रहा है।
फिर मैं उठ के रोने लगा, तब तक दादी आकर बोलती हैं कि "मत रो बाबू, सपना सच नहीं होता है"
जिसके बाद मैं हंसने लगता हूं और दुबारा चैन की नींद सो जाता हूं☺️🥰