माननीय @DCDeoghar एवं @HemantSorenJMM महोदय, कृपया इस वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराकर सत्य सामने लाने की कृपा करें। यदि वीडियो सत्य पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
@kaankit , @chitraaum@anjanaomkashyap आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि कृपया झारखंड की शिक्षा व्यवस्था पर भी एक विस्तृत और निष्पक्ष वीडियो बनाइए।
यहाँ परीक्षा और परिणाम में देरी, शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं की समस्याएँ, छात्रों को होने वाली परेशानियाँ जैसे कई गंभीर मुद्दे है
"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भर्ती प्रक्रिया में वर्षों की देरी के कारण कुछ लोगों को नौकरी सेवानिवृत्ति के समय या उसके बाद मिल रही है। सवाल यह है कि जब योग्य युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो भर्तियाँ समय पर क्यों नहीं पूरी की गईं? सरकार को इस देरी की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।"
@HemantSorenJMM सरकार कहती है “शिक्षा हमारी प्राथमिकता है”…
शायद इसलिए शिक्षक को 9 महीने तक वेतन नहीं दिया गया, ताकि वो इलाज भी न करा सके।
ये सिर्फ लापरवाही नहीं, संवेदनहीन शासन का चेहरा है।
@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand
हम ब्राह्मण हैं ~ परशुराम के वंशज।
हम यादव हैं ~ श्रीकृष्ण के वंशज।
हम क्षत्रिय हैं ~ महाराणा प्रताप के वंशज।
हम मौर्य हैं ~ चंद्रगुप्त के वंशज।
लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि तुम किसके वंशज हो।
असली सवाल यह है कि आज तुम्हारा भविष्य कौन लूट रहा है?
एक अनपढ़ , जाहिल और निकम्मा नेता आता है।
जाति के नाम पर तुम्हें बांटता है।
धर्म के नाम पर तुम्हें भड़काता है।
इतिहास के नाम पर तुम्हें उलझाता है।
और तुम्हारे टैक्स के पैसों से अपनी ऐशगाह बनाता है।
तुम अस्पताल में लाइन लगाते हो ,
वो VIP इलाज करवाता है।
तुम्हारे बच्चे बेरोजगार घूमते हैं ,
उसके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।
तुम गड्ढों वाली सड़क पर चलते हो ,
वो लाल बत्ती और काफिले में निकलता है।
तुम महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और भ्रष्टाचार झेलते हो,
वो तुम्हें जाति की औकात याद दिलाकर सत्ता का मजा लेता है।
जिस नेता को तुम्हारे स्कूल, अस्पताल, रोजगार, सुरक्षा और सम्मान से फर्क नहीं पड़ता,
उसके लिए तुम सिर्फ वोट हो ... नागरिक नहीं।
इसलिए वंश , जाति और झूठी शान की कहानियों से बाहर निकलो।
अपने हक , अपने भविष्य और अपने बच्चों के लिए सोचो।
जो नेता जनता को बांटकर राज करता है,
जनता को चाहिए कि उसे सत्ता से उखाड़ फेंके।
माननीय @HemantSorenJMM जी “झारखण्ड सरकार भी इस पहल से सीख लेना चाहिए और प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए ऐसे ही सख्त व पारदर्शी नियम लागू करे, ताकि छात्रों और अभिभावकों को राहत मिल सके।”
@JmmJharkhand@JMMKalpanaSoren
निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की पहल!
प्रदेश के निजी स्कूलों में मनमानी रोकने, फीस को नियंत्रित करने और छात्रों व अभिभावकों के हितों की रक्षा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य, मनमानी बढ़ोतरी व अनावश्यक शुल्क पर रोक होगा।
साथ ही किताबें-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता, छात्रों को फीस बकाया पर भी परीक्षा/परिणाम से वंचित नहीं किया जाएगा।
आदेश उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई तय है।
इससे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सुलभ बनेगी।
बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं,
लगेगा, लगने लगा है, मगर लगेगा नहीं।
नहीं लगेगा उसे देखकर, मगर खुश है,
मैं खुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं।
मैं उसके बाद चल नहीं पाया किसी के साथ,
उसने भी सिर्फ काम चलाया किसी के साथ।
💔 Continue... 👇
बिछड़कर मर जाना तो एक 'प्रेममय' कल्पना है...
वास्तविकता तो यह है कि हम मरते नहीं...
हम बस धीरे ~ धीरे थोड़े ~ थोड़े कम होते जाते हैं... एक फीके रंग की तरह !! 🖤🩶
@RaviKumarRaut15 जी ननदन पहाड़ का तालाब बदहाल स्थिति में है—गंदगी, बदबू और मच्छरों का खतरा बढ़ रहा है।
नगर निगम से अनुरोध है कि तत्काल सफाई अभियान चलाया जाए।
गर्मी में स्थानीय लोग स्नान भी करते है ध्यान में रखकर इसपर ध्यान जरूर दे।
@DCDeoghar
मैंने बहुत दुनिया तो नहीं देखी, पर इतना ज़रूर एहसास होने लगा है कि स्वर्ग और नरक जैसा कुछ नहीं होता। हम जो बुरे कर्म करते हैं, उनका फल हमें यहीं भोगना होता है। मैंने अपने कई क़रीबियों को देखा है, जिन्होंने अपने जीवन में काफ़ी गलतियाँ कीं और कुछ ही दिनों बाद वे सारी चीज़ें उन पर ही आ गईं। उनकी गलतियों को देखकर मैं गुस्से से भर जाती थी। मुझे हमेशा लगता था कि बुरा करने वालों को ही भगवान अच्छा जीवन देता है, पर यह सब खोखला है।
बुरे कर्म करने वाले इसी जीवन में अपने कष्ट भोगते हैं। हो सकता है दूर से उनका जीवन हमें बहुत सुखमय लगे, परंतु वास्तविकता में वे सब निरीह होकर अपने द्वारा किए गए कुकर्मों के फल भोगते हैं।
और अंत में, सब मर जाते हैं। शायद तब मृत्यु भी जीवन से अच्छी लगती है, और उसी को हम मुक्ति कहते हैं।