#1Feb_GodKabir_NirvanaDiwas
मगहर से सतलोक
कबीर परमात्मा मगहर से सशरीर सतलोक गए थे
जिंदा जोगी जगत गुरु, मालिक मुरशद पीर।
दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।।
परमात्मा कबीर जी के शरीर को प्राप्त करने के लिए दोनों ही दीन हिंदू और मुसलमान आपस में झगड़े की तैयारी करके मगहर आए
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मगहर से सतलोक
माघ माह शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रम संवत 1575 (सन 1518) को कबीर साहेब ने एक चादर नीचे बिछाई और एक ऊपर ओढ़ ली। कुछ फूल कबीर साहेब के नीचे वाली चादर पर दो इंच मो��ाई में बिछा दिये। थोड़ी देर में आकाशवाणी हुई कि मैं तो सतलोक जा रहा हूँ। जब
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मगहर से सतलोक
परमेश्वर ��बीर साहेब जी का सतलोक को सशरीर प्रस्थान
माघ माह शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रम संवत 1575 (सन 1518) को कबीर साहेब जब मगहर से सशरीर सतलोक गये तब का वर्णन संत गरीब दास जी ने किया है कि
तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांड़ी पदहि
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मगहर से सतलोक
परमेश्वर कबीर जी माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रम संवत 1575 (सन 1518) को सतलोक सशरीर गये। कबीर साहेब अविनाशी हैं। सशरीर प्रकट होते हैं, सशरीर चले जाते हैं - प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2, मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3
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मगहर से सतलोक
सन् 1518 वि. स. 1575, महीना माघ, शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर सतलोक गये थे
परमात्मा कबीर जी चार दाग से न्यारे हैं।
चदरि फूल बिछाये सतगुरु, देखे सकल जिहाना हो।
च्यारि दाग से रहत जुलहदी, अविगत अलख अमाना हो।।
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मगहर से सतलोक
और मुसलमानों में आपसी भाईचारे व सद्भावना की ��क मिसाल का प्रमाण है।
गरीब, बिरसिंघ बघेला करै बीनती, बिजली खाँन पठाना हो।
दो चदरि बकसीस करी है, दीना यौह प्रवांना हो।।
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मगहर से सतलोक
कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए।
उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल पाए गए जो कबीर परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार दोनों धर्मों ने आपस में लेकर मगहर में 100 फुट के अंतर से एक-एक यादगार बनाई जो आज भी विद्यमान है।
यह दोनों धर���मों हिंदुओं
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मगहर से सतलोक
कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं.1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब मगहर से सश��ीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल
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मगहर से सतलोक
कबीर परमात्मा जी द्वारा शिवजी के श्राप से सूखी नदी में जल बहाना।
मगहर में पहुंचते ही परमात्मा कबीर जी ने जब बहते पानी में स्नान करने की इच्छा जताई तो बिजली खां ने कहा कि यहां एक आमी नदी है जो शिवजी के श्राप से सूखी हुई है। परमात्मा कबीर
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मगहर से सतलोक
महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.स. 1575 (सन् 1518) को आज से 505 वर्ष पहले कबीर परमेश्वर जी मगहर से सशरीर सतलोक गये।
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मगहर से सतलोक
कबीर साहेब जी तो स्वयं परमेश्वर थे, हैं और रहेंगे। क्योकि पूर्ण परमात्मा माँ के गर्भ से जन्म नहीं लेते हैं।
संत गरीदास जी की वाणी में प्रमाण है-
गरीब अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदी छोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर है, जननी जन्या न माय।।
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मगहर से सतलोक
कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं.1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब मगहर से सशरीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल
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मगहर से सतलोक
हिंदू राजा बीर सिंह बघेल और मुस्लिम राजा बिजली खाँ पठान को कबीर परमात्मा ने सतलोक जा��े से पहले कहा जो मेरे जाने के बाद मिले आधा आधा बांट लेना। दो चद्दर और सुगंधित फूल मिले, परमात्मा का शरीर नहीं मिला था।
बीरसिंघ बघेला करै बीनती,