पथ निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2022 में नियुक्त किए गए 208 सहायक अभियंताओं को पदस्थापन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि (3 से 6 माह) के दौरान देय वेतन का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। जबकि इसी विभाग द्वारा पूर्व में वर्ष 2007 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को उक्त अवधि का वेतन विभागीय स्तर पर स्वयं भुगतान किया गया था।
साथ ही वर्ष 2022 में नियुक्त समकक्ष सहायक अभियंताओं को जल संसाधन विभाग तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पदस्थापन की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि का वेतन भुगतान किया जा चुका है।
अतः माननीय मुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री से निवेदन है कि वे इस विषय पर विशेष ध्यान आकृष्ट करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें। @HemantSorenJMM@kumarsudivya@YogendraGomia@JharkhandCMO@DipikaPS@ShilpiNehaTirki@hafizulhasan001@roysaryu@yourBabulal@JMMKalpanaSoren@deepakbiruajmm@IrfanAnsariMLA
विगत 10 वर्षों से लंबित झारखंड अभियंत्रण नियुक्ति नियमावली को अंततः वर्ष 2026 में माननीय मुख्यमंत्री महोदय से स्वीकृति प्राप्त हुई जिससे अभियंत्रण विभाग में नियमित प्रोन्नति एवं सहायक अभियंता के पद पर लम्बित नियुक्ति जल्द हो पाएगी । झारखंड अभियंत्रण सेवा संघ के सभी अभियंता माननीय मुख्यमंत्री महोदय, माननीय मंत्री DWSD , माननीय मंत्री WRD, माननीय मंत्री RWD , माननीय मंत्री UDHD, मुख्य सचिव झारखंड सरकार, प्रधान सचिव RCD , सचिव कार्मिक विभाग, सचिव वित्त विभाग, अध्यक्ष JPSC एवं सचिव विधि विभाग का आभार प्रकट करती है
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@YogendraGomia@DipikaPS@hafizulhasan001@kumarsudivya@KunalSarangi@ShilpiNehaTirki@deepakbiruajmm
I bought this amul khoa on 31/12/25 and when I opened it it was fungus infected although it's expired date is 28/05/26.I want that concerned agencies should take strict again against amul
People trust @amul mean you will sell anything for money?
@Amul_Coop@amul@The_FollowUp
झारखंड अभियंत्रण नियुक्ति नियमावली 2016, विगत 9 वर्षों से माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा लगाए गए रोक एवं संशोधन की प्रत्याशा में लंबित पड़ी हुई। कारणवश सहायक अभियंता की नई नियुक्ति का सृजन एवं उच्चतर पदों पर प्रोन्नति में बाधाएँ बनी हुई है। @HemantSorenJMM माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि राज्य के रजत जयंती वर्ष पर राज्य के सभी अभियंताओं को निर्विवादित झारखंड अभियंत्रण नियुक्ति नियमावली देने का कष्ट करे जिस से नियुक्ति एवं प्रोन्नति के माध्यम प्रशस्त हो एवं राज्य के विकाश में उत्प्रेरक का काम करे। @JMMKalpanaSoren@_YogendraYadav@kumarsudivya@ShilpiNehaTirki@hafizulhasan001@DipikaPS@deepakbiruajmm@roysaryu@yourBabulal
🚫 शोषण नहीं, समाधान चाहिए,
✊ शिक्षक को केंद्रीय वेतनमान चाहिए।
"जो शिक्षक गांव-गांव में ज्ञान की लौ जलाए, उन्हें कब तक हाशिए पर रखा जाएगा? बिहार के शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान देकर उनकी तपस्या का सम्मान कीजिए।"
#CentralPayForBiharTeachers@NitishKumar@BiharEducation_
✊ #CentralPayforbiharteachers
हम बच्चों का भविष्य सँवार रहे हैं, लेकिन अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
माननीय @NitishKumar जी,
आपकी पहल से शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है, पर अब समय आ गया है कि शिक्षकों को सम्मानजनक वेतनमान देकर न्याय किया जाए।
@NitishCares@NitishKumar
मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुज़र रहा हूँ।
मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं गया,
झारखंड की आत्मा का स्तंभ चला गया।
मैं उन्हें सिर्फ ‘बाबा’ नहीं कहता था
वे मेरे पथप्रदर्शक थे, मेरे विचारों की जड़ें थे,
और उस जंगल जैसी छाया थे
जिसने हजारों-लाखों झारखंडियों को
धूप और अन्याय से बचाया।
मेरे बाबा की शुरुआत बहुत साधारण थी।
नेमरा गांव के उस छोटे से घर में जन्मे,
जहाँ गरीबी थी, भूख थी, पर हिम्मत थी।
बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया
जमींदारी के शोषण ने उन्हें एक ऐसी आग दी
जिसने उन्हें पूरी जिंदगी संघर्षशील बना दिया।
मैंने उन्हें देखा है
हल चलाते हुए,
लोगों के बीच बैठते हुए,
सिर्फ भाषण नहीं देते थे,
लोगों का दुःख जीते थे।
बचपन में जब मैं उनसे पूछता था:
“बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?”
तो वे मुस्कुराकर कहते:
“क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा
और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।”
वो उपाधि न किसी किताब में लिखी गई थी,
न संसद ने दी -
झारखंड की जनता के दिलों से निकली थी।
‘दिशोम’ मतलब समाज,
‘गुरु’ मतलब जो रास्ता दिखाए।
और सच कहूं तो
बाबा ने हमें सिर्फ रास्ता नहीं दिखाया,
हमें चलना सिखाया।
बचपन में मैंने उन्हें सिर्फ़ संघर्ष करते देखा, बड़े बड़ों से टक्कर लेते देखा
मैं डरता था
पर बाबा कभी नहीं डरे।
वे कहते थे:
“अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है,
तो मैं बार-बार दोषी बनूंगा।”
बाबा का संघर्ष कोई किताब नहीं समझा सकती।
वो उनके पसीने में, उनकी आवाज़ में,
और उनकी चप्पल से ढकी फटी एड़ी में था।
जब झारखंड राज्य बना,
तो उनका सपना साकार हुआ
पर उन्होंने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना।
उन्होंने कहा:
“ये राज्य मेरे लिए कुर्सी नहीं
यह मेरे लोगों की पहचान है।”
आज बाबा नहीं हैं,
पर उनकी आवाज़ मेरे भीतर गूंज रही है।
मैंने आपसे लड़ना सीखा बाबा,
झुकना नहीं।
मैंने आपसे झारखंड से प्रेम करना सीखा
बिना किसी स्वार्थ के।
अब आप हमारे बीच नहीं हो,
पर झारखंड की हर पगडंडी में आप हो।
हर मांदर की थाप में,
हर खेत की मिट्टी में,
हर गरीब की आंखों में आप झांकते हो।
आपने जो सपना देखा
अब वो मेरा वादा है।
मैं झारखंड को झुकने नहीं दूंगा,
आपके नाम को मिटने नहीं दूंगा।
आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा।
बाबा, अब आप आराम कीजिए।
आपने अपना धर्म निभा दिया।
अब हमें चलना है
आपके नक्शे-कदम पर।
झारखंड आपका कर्ज़दार रहेगा।
मैं, आपका बेटा,
आपका वचन निभाऊंगा।
वीर शिबू जिंदाबाद - ज़िन्दाबाद, जिंदाबाद
दिशोम गुरु अमर रहें।
जय झारखंड, जय जय झारखंड।