स्वामी रामदेव जी ने सच्चाई सबके समक्ष लाकर रख दी कि भाई, एक कैंपेन चल रहा है कि ब्राह्मणों भारत छोड़ो, और ये आज से नहीं, काफी लंबे समय से चल रहा है। ये दीवारों पर लिखा जा रहा था, genocidal calls दे रहे थे।
अंत में उन्होंने जो बोला, वो मुझे लगता है कि अधिक चिंता का विषय है।
जब ऐसे लोगों को भी बोला जा रहा है कि अभी रुक जाइए, दिसंबर तक रुक जाइए, it simply means the shit has hit the fan.
GC को डराने के लिए हौआ बनाया जा रहा है कि राहुल आ जाएगा, अखिलेश आ जाएगा; चिंता तो तुम्हें और तुम्हारी पार्टी को करनी चाहिए। वो आते ही बैन करेंगे, संघ पर प्रतिबंध लगाएंगे। तो तुम डरो ना, हम काहे डरें?
वो लोग OBC एक्ट ले आएंगे; ले आएं।
सवर्ण कौन-सी एट्रोसिटी कर रहा है किसी के साथ?
पहले ब्राह्मण को जानो, गिनवाई ऋषि दधीज से लेके आज तक, पगला जी बा पंडित लोगन का योगदान इधर - @ravikishann
लो जी चुनाव से पहले इनको ब्राह्मण याद आ गये, जब ब्राह्मण सड़क पर होता है तब इनकी जवान नहीं खुलती अब वोटो के लिए कुछ भी..
#ReservationReform#ugc_rollback
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
साहिल वकोड़े के हाथ में परीक्षा हॉल में फ़ोन।
परीक्षा हॉल में साहिल वाकोडे का पहला CCTV फुटेज। साहिल फ़ोन एग्ज़ामिनर को सौंपते दिखे।
कोई भी दबाव जीवन से बड़ा नहीं, आत्महत्या बेहद दुखद।
लेकिन मौत के बाद जातीय एंगल देना, बेहद शर्मनाक
ये IIT बॉम्बे का CCTV फुटेज है जिसमें साहिल एग्जाम देता दिख रहा है। बाद में प्रोफेसर दुल्ला उसके पास जाते दिखते हैं और फिर कुछ बात होने के बाद वो उन्हें अपने पैरों के बीच रखा मोबाइल फ़ोन सौंपता दिखता है।
फिर वो बाहर भेज दिया जाता है।
@rashtrapatibhvn महामहिम विकसित भारत का सपना कैसे पूरा होगा देश को जातीयता की भट्टी में झोंककर। क्या scst act व ugc से क्रांति आएगी कि प्रतिभाओं के पलायन से सपना पूरा होगा।
जाति और गोत्र पर उनका लिखा पढ़ लीजिएगा। राष्ट्रवाद पर भी। और हाँ, ‘उतरा कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली तू क्या कहती है’ भी अच्छी है।
आप एक गोबर नेता बन चुके हैं जिसे न राष्ट्र से मतलब है, न धर्म से, न समाज से। कॉपी-पेस्ट बकलोली होती रहनी चाहिए बस!
🎯चुनाव आयोग के अंदर किसकी मनमर्जी चल रही है?
🎯दो चुनाव आयुक्तों ने नियम पालन न होने की शिकायत क्यों की?
🎯नए वोटर जोड़ने की प्रक्रिया में कैसे अड़चन पैदा की गई?
🎯फ़ॉर्म 6 के मामले में सरकार की शक्तियों को ठेंगा क्यों दिखाया गया?
🎯आयोग के जिन अधिकारियों को वोटर जोड़ने और हटाने का हक़ है, उनके हाथ क्यों बांध दिए गए?
🎯देशभर के वोटरों के डेटा को दिल्ली से कंट्रोल करने का चलन क्यों शुरू किया गया?
🎯क्यों 10 महीनों में कम से कम 14 बार और एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज करनी पड़ी?
🎯आपत्तियों के बाद फैसले कैसे ले लिए गए?
🎯और ऐसी नौबत क्यों आई कि चुनाव आयुक्तों के कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकायत करनी पड़ी?
जानिए इन सभी सवालों के जवाब. हमारी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में. वीडियो देखने के लिए आएं इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के यूट्यूब चैनल पर.
चुनाव आयोग में भयंकर वाला लफड़ा चल रहा है.
चुनाव आयोग में 3 सदस्य हैं, लेकिन 2 सदस्य - सुखबीर संधू और विवेक जोशी की चल नहीं रही.
इसे लेकर दोनों आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है. खास फैसलों पर न इनसे पूछा जाता है, न बताया जाता है.
इन्हें ढक्कन बना दिया है