#BPSC_PT_IN_ONE_SHIFT
Doing peaceful protest is fundamental right of every citizen than why police started lathi charge on students when they are doing nothing wrong? Is this what we deserve for asking our demand peacefully?
@yadavtejashwi@NitishKumar@iChiragPaswan
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#bihar#biharpolitics
NEET परीक्षा को लेकर सरकार की सख्त तैयारी और निगरानी व्यवस्था से उम्मीद है कि इस बार परीक्षा पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ संपन्न होगी।
#neetexam2026#neet#nta#neetreexam
बिहार सरकार का “एक्शन मोड” स्वागत योग्य है, लेकिन असली चुनौती अब रोजगार, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और पलायन रोकने जैसे मूल मुद्दों पर ठोस परिणाम देने की है।
बिहार की रफ्तार तभी दिखेगी, जब प्रशासनिक सक्रियता के साथ आम जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव आएगा।
#bihar#politics#bjp
Gaonsamaj
The Future of Bihar starts here. ✨
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साहब, पहले धर्म में बाँटा,
अब जातियों के नाम क़ानून लाए हैं।
कहीं तो रुकिए—
ये कारवाँ आखिर कहाँ तक ले जाएँगे?
राजनीति करते-करते
आप नीति भूल गए,
अपने फ़ायदे की होड़ में
देश को भूल गए।
देश की अस्मिता,
उसकी आत्मा तक को
आपने दाँव पर लगा दिया।
याद रखिए—
कुर्सी तो रहेगी,
पर आपके लिखे काले क़ानून
उसी कुर्सी की पाया तोड़ देंगे।
न बचेगी आपकी सरकार,
न आपकी पार्टी—
इतिहास सिर्फ़
आपके फैसलों को याद रखेगा।
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#UGCRegulations #UGC_RollBack #UGC #UGC_काला_कानून_वापस_लो #UGCBlackLaw #UGCBlackLaw #UGCRollBack #UGCAct_BlackAct #UGCRules
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह पर्व नई ऊर्जा, अनुशासन और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।
आइए, हम समृद्ध समाज, सशक्त किसान और उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लें।
आपके जीवन में सुख, शांति और निरंतर उन्नति बनी रहे।
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#makarsankranti #makarsankranti2026 #bihar #politicoinsights
एक बात तो माननी पड़ेगी कि लालू जी अपने समय से आगे की राजनीति को अच्छी तरह समझते थे।
मैं उस दौर की बात कर रहा हूँ जब घूस और घोटालों का पैसा ज़्यादातर नकद में चलता था और लोग घरों में बोरियों भर पैसे रखते थे। उस समय पैसा लेन देन देन का आम जरिया नगदी ही होता था।
लेकिन लालू जी ने पैसे को ज़मीन-जायदाद और फर्जी कंपनियों के ज़रिए संभालने और मैनेज करने का तरीका अपनाया। इससे यह साफ दिखता है कि उनकी सोच काफ़ी दूर तक जाती थी। जब ज़्यादातर लोग सीधे नकद रखते थे, तब वे चीज़ों को अलग तरीके से मैनेज कर रहे थे।
इसी तरह राजनीति और सत्ता के इस्तेमाल करने के लिए जरूरत के अनुसार चाहे अपनी अनपढ़ पत्नी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना हो, नौवीं फेल बेटे को बिहार के उपमुख्यमंत्री बनाना हो या अपने बेटी को बिहार में मेडिकल के परीक्षा में राज्य का टॉपर बनाना हो और तो और अपने पार्टी और बिहार के राजनीत को परिवार लिमिटेड कंपनी बना देना।
यही कारण है कि लालू जी आज भी भारतीय राजनीति के सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।
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#biharpolitics #biharsarkar #jangalraj
बिहार के समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित माननीय सांसद देश की सबसे युवा सांसदों में से एक हैं। परंतु समस्तीपुर के लिए उनके लगभग दो वर्षों के कार्यकाल में न तो कोई उल्लेखनीय राशि खर्च होती दिखाई देती है और न ही कोई ठोस विकास कार्य ज़मीन पर नजर आता है।
यदि इसके मूल कारण को समझा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि चुनाव के समय उन्होंने स्वयं को “समस्तीपुर की बेटी” बताकर जनता से वोट माँगे थे, लेकिन आज भी समस्तीपुर में उनका कोई स्थायी निवास नहीं है। वे केवल Y+ सुरक्षा के साथ राजनीतिक पर्यटन के उद्देश्य से समस्तीपुर आती हैं, कुछ समय रुककर भ्रमण करती हैं, तस्वीरें खिंचवाती हैं और उसी दिन पटना लौट जाती हैं।
यह विषय व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन नीतिगत आधार पर देखा जाए तो उनका कार्य निष्पादन शून्य प्रतीत होता है, जो स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आगे भी आशंका यही है कि वे केवल शब्दों में “युवा और डायनामिक सांसद” बनी रहेंगी या फिर उनके कार्यों में यह दिखाई देगा, यह देखना शेष है।
अंततः उनकी पार्टी और स्वयं उन्हें यही सलाह है कि जिस क्षेत्र और जिन लोगों के लिए वे चुनकर आई हैं, वहाँ समय देना अधिक आवश्यक है। राजनीति में कुर्सी स्थायी नहीं होती हैं।
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@Sham4Samastipur@iChiragPaswan
उत्तराखंड के एक नेता ने बिहार की बहन-बेटियों को लेकर जो बेहद गलत और आपत्तिजनक बात कही है, उसकी हम कड़ी निंदा करते हैं। ऐसी सोच न सिर्फ़ शर्मनाक है, बल्कि हमारे समाज और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ़ भी है।
यह मुद्दा किसी एक राज्य की बेटियों का नहीं है, बल्कि पूरे समाज की महिलाओं के सम्मान का सवाल है। महिलाओं को लेकर इस तरह की घटिया और संकीर्ण सोच का न तो राजनीति में कोई स्थान है और न ही सभ्य समाज में।
अगर बात बिहार की बेटियों की हो, तो शायद उस नेता को यह समझना चाहिए कि बिहार की बेटियाँ आज सिर्फ़ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर रही हैं। पढ़ाई, नौकरी, खेल या किसी भी क्षेत्र में वे आगे बढ़कर मिसाल कायम कर रही हैं।
महिलाओं के सम्मान पर किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता। देश की हर बेटी और हर बहन बराबर सम्मान की हकदार है।
ऐसी सोच के खिलाफ़ हम सबको मिलकर आवाज़ उठानी होगी, ताकि राजनीति में भाषा और सोच दोनों में मर्यादा बनी रहे।
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#bihariwomen #womenpride #WomenSafety
✨ आप सभी को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ। ✨
नव वर्ष 2026 आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीदें और नए अवसर लेकर आए।
यह वर्ष सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि से परिपूर्ण हो।
आइए, मिलकर सकारात्मक सोच और बेहतर भविष्य के निर्माण का संकल्प लें।
🌸 नववर्ष 2026 मंगलमय हो। 🌸
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#newyear #newyear2026 #happynewyear2026
“जीवन अनमोल है, पर उसकी परीक्षा धैर्य से होती है।
जो समय को समझ लेता है, वही जीवन का सार समझ पाता है।”
जीवन वास्तव में अनमोल है, किंतु आज के समय में मनुष्य की सबसे बड़ी चुनौती अधैर्य बन चुकी है। इंसान को सब कुछ चाहिए, वह भी तुरंत। प्रतीक्षा, संयम और धैर्य जैसे गुण मानो जीवन से विलुप्त होते जा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से का संघर्ष पहले से निर्धारित होता है और उसे स्वयं तय करना और निभाना पड़ता है। जीवन की यह यात्रा कठिन हो सकती है, पर इससे बचा नहीं जा सकता।
संघर्ष का यह दौर केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं रहता। जब आप अपने हिस्से का संघर्ष ईमानदारी से पूरा करते हैं, तो उसके लाभार्थी अनेक लोग बनते हैं—आपका परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियाँ। इन सभी कर्मों में समय को एक शिक्षक के रूप में समझना आवश्यक है, क्योंकि समय ही जीवन का वास्तविक मार्गदर्शक है।
यदि जीवन में आपको एक भी ऐसा व्यक्ति मिल जाए, जो बिना किसी स्वार्थ, लोभ या लालच के केवल आपके बारे में सोचे, तो स्वयं को सौभाग्यशाली मानना चाहिए। ऐसे संबंध दुर्लभ होते हैं और यही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं।
तर्क और व्यावहारिकता के स्तर पर देखें तो एक गुणवत्तापूर्ण जीवन के लिए आर्थिक स्थिरता आवश्यक है। पैसा जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करता है, सम्मान दिलाता है और अवसरों के द्वार खोलता है। लेकिन केवल धन ही पर्याप्त नहीं है। जीवन को संपूर्ण बनाने के लिए सुख और संतोष भी उतने ही आवश्यक हैं। यह सुख केवल भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि कर्म, रिश्तों और मानवीय मूल्यों से प्राप्त होता है।
आज का समय कुछ विपरीत अवश्य है, जहाँ भौतिकता को ही सफलता का पैमाना मान लिया गया है। फिर भी हमें यह समझना होगा कि मेहनत करें, विकास करें और धन अर्जित करें—पर उसके साथ-साथ ऐसे लोगों को भी अपने जीवन में स्थान दें, जो आपके पद, पैसे या ओहदे से नहीं, बल्कि आपसे जुड़ाव रखते हों। क्योंकि जो संबंध केवल धन के साथ आते हैं, वे धन के साथ ही चले भी जाते हैं।
अंततः यह सत्य है कि कोई भी भौतिक वस्तु स्थायी नहीं होती। स्थायी वही है जो मानवीय मूल्यों, सच्चे रिश्तों और अच्छे कर्मों से अर्जित होता है। इसलिए जीवन को संतुलन के साथ जिएँ—जहाँ प्रगति भी हो, संवेदनशीलता भी; जहाँ धन भी हो और दिल से जुड़े लोग भी। यही एक सार्थक और समृद्ध जीवन की पहचान है।
📍 दिल्ली
आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी एवं बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सरावगी जी के साथ मुलाकात हुई।
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#BJP4IND#nitinnabin#SanjaySaraogi#bjppresident#bjp
आज कांग्रेस पार्टी 140 वर्ष पूर्ण कर चुकी है।
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को उसके स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ।
राजनीति अपने स्थान पर आवश्यक थी—
लेकिन महात्मा गांधी का स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस को लेकर निष्कर्ष आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
गांधी जी मानते थे कि सत्ता की राजनीति होनी चाहिए,
पर कांग्रेस के नाम और विचारों का उपयोग सत्ता-केन्द्रित राजनीति के लिए करना उचित नहीं था,
क्योंकि कांग्रेस एक पवित्र जनआंदोलन की कोख से जन्मी संस्था थी।
आज कांग्रेस जिस नेतृत्व और नेतृत्व-संघर्ष से जूझ रही है,
उसका एक कारण यह भी है कि
आप हमेशा आंदोलन की छाया में रहे,
पर समय के साथ खुद को संस्थागत रूप से विकसित नहीं कर पाए।
नेताओं की नीति सही या गलत हो सकती है,
लेकिन किसी पार्टी को जीवित रखने के लिए
उसकी विचारधारा, संगठन और नेतृत्व—तीनों का समयानुकूल सक्षम होना अनिवार्य है।
विरासत का उपयोग एक सीमा तक ही संभव है।
नया भारत अब केवल स्मृतियों पर नहीं,
बल्कि स्पष्ट विजन , सक्षम नेतृत्व और ज़मीनी अमल में लाना पर विश्वास करता है।
शायद कांग्रेस ने इसे समझने में देर की,
लेकिन अब भी समय है—
क्योंकि एक बदलते और विविध भारत को
केवल इतिहास नहीं,
भविष्य गढ़ने की राजनीतिक क्षमता चाहिए।
और जैसा कि गांधी जी ने कहा था—
“भारत की प्राण-शक्ति गाँवों में बसती है।”
शासन भले दिल्ली से चलता हो,
लेकिन राजनीति की सोच, संवेदना और स्मरण शक्ति का जुड़ाव
गाँव से होगा, तभी वह राष्ट्रीय बनेगी।
#CongressFoundationDay #Congress140 #congress #CongressPartyFormationDay #MahatmaGandhi
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में राजधानी लखनऊ से लेकर रायसीना हिल तक एक अलग ही हलचल देखने को मिल रही है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के भीतर कहीं ब्राह्मण विधायकों की बैठकों की चर्चा है, तो कहीं प्रदेश में SIR (Special Internal Restructuring) को लेकर उठता शोर और पार्टी की आंतरिक राजनीति खुलकर सामने आ रही है।
वहीं समाजवादी पार्टी अब तक अपने राजनीतिक एजेंडे को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने में संघर्ष करती दिखाई दे रही है, साथ ही बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राजनीतिक दुर्गति से सबक लेने का प्रयास भी उसके रणनीतिक चिंतन का हिस्सा बनता नज़र आ रहा है।
दूसरी ओर, बहुजन समाज पार्टी एक बार फिर अपने री-लॉन्चिंग मोड में सक्रिय होती दिखाई दे रही है और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में जुटी है, ताकि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में अपनी प्रासंगिकता को पुनः स्थापित किया जा सके।
इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह स्पष्ट है कि इस बार लखनऊ की सियासत सामान्य नहीं रहने वाली। वर्ष 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव केवल लखनऊ में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक सीमित नहीं है, बल्कि यही चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सत्ता की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश मात्र एक राज्य नहीं, बल्कि देश की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुका है—जहाँ लिया गया हर निर्णय आने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों की नींव रखेगा।
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#UPPolitics #up #uttarpradesh #uttarpradeshpolitics #rajneeti
डिजिटल क्रांति को समाज के लिए वरदान माना जाता है, लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में यह कई तरह के दुष्प्रभाव भी पैदा कर रही है। कई मीडिया संस्थान और स्वतंत्र पत्रकार निष्पक्षता की बजाय अपने स्वार्थ और व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देने लगे हैं।
लगी हैं। सामान्य दिनों में 50 से 100 रुपये में खबरों का सौदा हो जाता है, जबकि चुनावी समय में इसकी दरें और अधिक बढ़ जाती हैं। परिणामस्वरूप, जनता के समक्ष कई बार भ्रामक और नकारात्मक खबरें प्रस्तुत की जाती हैं, जिससे समाज का एक वर्ग पत्रकारिता से दूर होता जा रहा है।