आरक्षण का उद्देश्य समाज को समतलीकरण करने के लिए लाया गया था,जो हजारों वर्षों से किसी एक समुदाय का वर्चस्व था। क्या आप विकाश दिव्याकृति सर के बात से सहमत है?
अपना राय जरूर दे।
#ReservationNews
ये शुरुआत में दलितों पिछड़ो की बात करता था. फिर इसके चैनल को पिछड़ो और दलितों ने भर भर कर सब्सक्राइब किया.
जब इसका चैनल बड़ा हो गया तो सबको चूरन दे दिया बोल रहा है मै ब्राह्मण हूँ इसीलिए मेरे साथ भेदभाव होता है.
इसकी इतनी हिम्मत बढ़ गई है अब तो बाबा साहब अम्बेडकर का फैक्ट चेक करने लगा है.
हमें अपनी नाकामियां को छुपाने की एकमात्र विषय पाकिस्तान है, जबकि भारत और पाकिस्तान की किसी भी चीज में यदि हम तुलना करे तो पाकिस्तान दूर दूर तक नहीं है। हमें चाइना से तुलना करना चाहिए। भारत को सबसे कमजोर इन जैसे भ्रष्ट राजनेताओं के वजह से हुआ है, सिर्फ उनकी अपनी पार्टी दिखती है देश कही भी जाए।
@Sachinkr_2211 आरक्षण किसी की खैरात नहीं है, हजारों वर्षों तक शोषण का प्रतिफल है। आरक्षण हटाने से पहले भारत की सभी संसाधनों का समतामूलक वितरण करे। सबके के लिए रेस बराबर करने के लिए प्लेटफार्म भी बराबर होना चाहिए। जय भीम🙏
@BHEEM_BHAIYA आरक्षण जातिवाद का उपज है, एकदम सही बात बोल रहे है, संसाधन का समतामूलक वितरण करना चाहिए, जिसकी जितनी संख्या उसकी उतनी भागीदारी होनी चाहिए।
हमारे टैक्स के पैसों से अपने लिए एक लुटियंस दिल्ली यानि की दिल्ली का सबसे पॉश, महंगा और प्रतिष्ठित इलाका बनाए और हमलोग के लिए सड़क पर ही स्विमिंग पूल। सरकार को मौसम और मानसून दोनों का पहले से ज्ञात होता है फिर भी कोई काम प्रोएक्टिव हो कर नहीं किया जाता, जिसके कारण सामान्य नागरिक को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
#10YearsOfUPI
सरकार एक नई बिल लाई है जिसमें कोई भी मर्चेंट 2000 से ज्यादा upi से ट्रांजेक्शन करता है तो उस पर अब टैक्स देना होगा। सरकार ऐसा अवसर नहीं छोड़ रही है जहां से टैक्स न लिया जाए। सवाल उठता है ,इतने टैक्स पेय करने के बाद सामान्य नागरिक को क्या मिलता है, न अच्छी हॉस्पिटल,न अच्छी शिक्षा, न अच्छी सड़क, यानी वह सभी मूलभूत सुविधाएं जो उसे ज्यादा जरूरी है।
#10YearsOfUPI
क्या आपको पता है "हिन्दू" शब्द कहाँ से आया?
जो लोग हिन्दू धर्म और हिंदुत्व की बात करते हैं, उन्हें ये जानना चाहिए—
"हिन्दू" किसी धर्म का नाम नहीं है।
यह छठी से पाँचवी शताब्दी ईसापूर्व एक प्राचीन फ़ारसी शब्द है, जिसका इस्तेमाल सिंधु नदी के पूर्व के क्षेत्र के लिए किया जाता था।
• अरबों ने सिंधु के पूर्व के इलाके को अल-हिन्द कहा और वहाँ रहने वालों को हिन्दी।
• बाद में तुर्कों ने भी उसी क्षेत्र के लोगों को हिन्दू और उनके निवास क्षेत्र को हिंदुस्तान कहा.
• यहाँ बोली जाने वाली भाषा को हिन्दवी कहा गया।
अतः "हिन्दू" किसी धर्म का नाम नहीं, बल्कि सिंधु के पूर्व में रहने वालों का भौगोलिक नाम है।
कभी सोचा है…
ये “मेरिट” का ढोल पीटने वाले लोग OBC, SC और ST समाज के लोगों को दिन-दहाड़े गालियाँ क्यों दे देते हैं बिना किसी डर के?
क्योंकि भारत में 2018 के सरकारी आंकड़े के अनुसार हाईकोर्ट्स में लगभग 77% जज upper caste से आते हैं।
इन्हें पता है — “इनमे से कोई न कोई हमें बचा ही लेगा।”
इसी आत्मविश्वास से ये दावा कर रहे हैं कि
“SC/ST Act एक दिन भी नहीं टिकेगा”।
क्योंकि फैसला पहले से तय लगता है।
और सच्चाई ये भी है —
भारत के सभी हाईकोर्ट्स में इस वक्त 64.76 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग पड़े हैं।
जब न्यायपालिका में ही इतनी असंतुलन और इतना बोझ हो,
तो आम आदमी को इंसाफ कहाँ से मिलेगा?
Sc st एक्ट का कितना मिसयूज हुआ है वह तो जांच का विषय है। उसके लिए न्यायालय अपना कार्य कर रही है,परन्तु यह बताए उच्च शिक्षण संस्थाओं से इतने ज्यादा छात्र क्यों छोड़ रहे है। जबकि यूनिवर्सिटी,iit, IIM में पढ़ना अपने आप में गर्व का विषय है। वैसे भी इन संस्थाओं में आपको जातिवाद कहा दिखती है? वो तो आप करते है।
#StopMisuseOfSCSTAct
“दलितों को कुएँ से पानी नहीं मिलता था तो वे ज़िंदा कैसे रहे?”
वाह! जातिवाद को धोने के लिए क्या ग़ज़ब का तर्क खोजा है! दलित ज़िंदा बच गए, इसलिए छुआछूत भी झूठी मान लें?
सवाल पानी मिलने का नहीं, सार्वजनिक कुएँ-तालाब पर बराबर अधिकार का था। जाति के कारण दलितों को साझा जलस्रोतों से पानी लेने से रोका जाता था। 1927 का महाड़ सत्याग्रह इसी अधिकार के लिए हुआ। आंबेडकर को हजारों लोगों के साथ चवदार तालाब से पानी पीकर अधिकार जताना पड़ा।
और इतिहास से भी शिकायत हो तो Protection of Civil Rights Act, 1955 की धारा 4 पढ़ लीजिए - अस्पृश्यता के आधार पर कुएँ, तालाब, नदी, नल आदि के इस्तेमाल से रोकना दंडनीय बनाया गया।
दलित ज़िंदा कैसे रहे, यह नहीं; सवाल है - उन्हें बराबरी से जीने क्यों नहीं दिया गया?