@parmanandyadavv Bhai 2002 ka pata nahi hai kya kis Karan se pota laga tha ❓
बस मंत्री बनाया मंत्री बनाया रटता रहता है कोई फ्री में मंत्री नहीं बनाया था उसके बदले में सरकार बनवाई थी जिसमें राजा भैया धनंजय सिंह महावीर सिंह राणा आदि नाम शामिल है
@NewIndAssurance Mr sanamdeep singh ,Mr Rahul Dongre ,mr neeraj These are the officers of Jabalpur MP, we sought support from them but as soon as they received my call, they switched off their mobile and did not respond, especially the behaviour of Mr. Rahul was very bad.@NewIndAssurance pl guide
@Raghuraj_Bhadri जी की राजनीतिक क्षमता उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी से छिपी नहीं है। वे अपने बल पर राजनीतिक नैरेटिव बनाने और बिगाड़ने की ताक़त रखते हैं, इसी कारण वे विरोधियों के निशाने पर रहते हैं।
अधिक से अधिक एक दशक पुरानी पारिवारिक दूरी को अचानक मीडिया ट्रायल का विषय बनाना, जबकि मामला न्यायालय में लंबित है, अपने आप में षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। हैरानी की बात है कि जहाँ पिता का नाम तक नहीं लिया गया, वहाँ योगी आदित्यनाथ को घसीटना क्या यह साबित नहीं करता कि इसमें योगी के राजनीतिक दुश्मनों की भूमिका है?
स्पष्ट है कि यह पूरा खेल राजा भैया, रघुराज प्रताप सिंह जी और @myogiadityanath जी दोनों की लोकप्रियता व राजनीतिक शक्ति को कमजोर करने के लिए रचा गया है। लेकिन सत्य को दबाया नहीं जा सकता। भविष्य इस बात का गवाह बनेगा कि योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही राजा भैया का राजनीतिक भविष्य और भी उज्ज्वल होकर उत्तर प्रदेश में नई मज़बूती और सम्मान दिलाएगा।
@RaghaviBhadri थोड़ा मर्यादा रखिए जितना बता रहीं हैं आप वैसा भी नहीं है ये सोशल मीडिया से कुछ होगा नहीं बल्कि सैकड़ों वर्ष पुरानी साख मिट्टी में मिल जायेगी
जिस दिन दाऊ नहीं रहेंगे न उस दिन कोई कौड़ी के भाव भी नहीं पूछेगा ये विरोधी लोग केवल यही चाह रहे हैं जो आप कर रहीं है
मातारानी सद्बुद्धि दे
अब ढोंगी बताएंगे कि राजा को क्या करना चाहिए? जिस कु-ढाड़स एवं मूढ़ता भरे शब्द का प्रयोग रीवा संसद कर रहे शायद इतना दुस्साहस रीवा से बाहर एवं सदन में ये करते तो शायद जनपद से बाहर पहचान बना लेते नहीं तो परिपक्व तो हो जाते !
सिद्धार्थ तिवारी जी (विधायक त्यौंथर 70 ) पिछले लोकसभा में जिन्हें तुम अपना गार्जियन बता रहे
@digvijaya_28 जी तुमसे बड़े हिंदू हैं लगभग 450 साल से उनके किले में अखंड ज्योति जल रही है और 70 वर्ष की उम्र में पावन पवित्र मां नर्मदा जी की परिक्रमा कर चुके हैं
कश्मीर में हिन्दू तो पहले ही मारे काटे जा चुके हैं, जो जान बचाकर भागने में सफ़ल रहे वे अपने ही देश में आज भी शरणार्थी हैं।
अब अपने पर्यटक भाई बहनों से कहना चाहूंगा कि जब हम अपने बच्चों को गर्मी की छुट्टियों में कश्मीर घुमाने ले जाते हैं तो न सिर्फ अपने परिवार के जीवन को खतरे में डालते हैं बल्कि आतंकवादी, अलगाववादी, जेहादी ताकतों को आर्थिक रूप से मजबूत करते हैं, इतना ही नहीं हम अनजाने में अपने ही ख़िलाफ़ छिड़े ‘जेहाद’ को अपनी ही जेब से फ़ंड करते हैं।
डल झील में नावों पर सपरिवार सेल्फी लेकर हम विश्व को ये संदेश देते हैं कि कश्मीर में अमन चैन है, लेकिन आज फिर एक बार असलियत सबके सामने आ गयी।
इसमें कोई शक नहीं कि कश्मीर में लगभग सभी की मानसिकता अलगाववादी है, कोई प्रत्यक्ष तो कोई परोक्ष रूप से आतंक का समर्थन करता है, और वहां के राजनैतिक दल भी इसका अपवाद नहीं हैं, ऐसे में हम कश्मीर जाकर होटल, भोजन, ख़रीदारी करके उनके अल-जेहाद को ही बल देते हैं।
जिन पर्यटकों की उनके परिजनों के सामने बर्बर हत्या की गयी उनकी पैंट उतरवा कर आतंकवादियों ने ये तय किया कि वो मोमिन है या क़ाफ़िर।
कलावा देख के और वस्त्र उतारकर धर्म देखने के बाद गोली मारने वाले आतंकियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंकवाद का मज़हब होता है।
#Pahalgam
अब देखना यह है कि PDA वाले अखिलेश और सुमन क्या उस परिवार को न्याय दिलायेगे, या यह सिर्फ़ एक मामूली अपराध या जातिवादी अपराध कहेंगे, अब दलित हत्या नहीं है यह शायद ?
#MYogiAdityanath#UPPolice#UPDGP@Mayawati
यूपी के जलेसर में अभी अंबेडकर जी की जयंती पर यात्रा निकाल रहे थे युवक,
आदर्श इंटर कॉलेज के अध्यापक दिनेश यादव आया, और फ़ायरिंग सुरू कर दी,
फ़ायरिंग में दलित युवक की मौक़े पर हुई हत्या.
वर्तमान भारतीय राजनीति में आज अगर कोई सबसे स्तरहीन और घिनौनी राजनीति कोई कर रहा है तो वो अखिलेश यादव है
इसके PDA में दलित अल्पसंख्यक केवल प्रायोजित मोहरा हैं बस ।
#राणा_सांगा_जयंती#RanaSanga
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में राणा सांगा के विषय में जो अभद्र टिप्पणी की है, वो सत्य से परे तो है ही, हर देशभक्त, हर राष्ट्रवादी के लिए बहुत ही कष्टप्रद है।
राणा संग्राम सिंह जिन्हें हम राणा सांगा के नाम से जानते हैं, उन्होंने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए अनेक लड़ाइयाँ लड़ीं और जीतीं।
महाराणा होते हुए भी युद्ध में सबसे आगे की पंक्ति में लड़ने वाले राणा सांगा ने शरीर पर 80 से अधिक घाव खाये, उनकी एक आंख और एक हाथ भी जाते रहे, लेकिन उनकी पीठ पर एक भी घाव नहीं था।
तुष्टिकरण के चलते हमारे महानायकों को खलनायक और गद्दार कहा जा रहा है। देश का दुर्भाग्य है कि औरंगज़ेब जैसे आततायी और बर्बर शासक का महिमामंडन करने के लिए कुछ लोग अपने ही महानायकों को छोटा दिखाने की होड़ में लगे हैं।
कुंठित लोग राजनैतिक स्वार्थ वश, तुष्टिकरण के उद्देश्य से चाहे जो भी आरोप लगायें किंतु राणा सांगा देशभक्तों, राष्ट्रवादियों के लिए प्रातःस्मर्णीय रहेंगे, सम्मान और श्रद्धा के पात्र रहेंगे।
कैसी विडंबना है जिसने अपने पिता को क़ैद किया, भाइयों की हत्या करके कुत्तों को खिला दिया ऐसे औरंगज़ेब को चाहने वाले भी इस देश में हैं, जो अपने ही महानायकों के गौरवशाली इतिहास को झुठला रहे हैं।
इतिहास के सत्य पुनर्लेखन का युग आ चुका है।