पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा कहे जाने वाले खेजड़ी और ओरण भूमि आज विकास की अंधी दौड़ के कारण संकट में हैं। इन दिनों जैसलमेर में ओरण संरक्षण को लेकर तनोट माता मंदिर से जयपुर तक पदयात्रा चल रही है, वहीं बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण के लिए महापड़ाव जारी है।
ये आंदोलन हमारी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत को बचाने की जनहुंकार हैं। विकास निस्संदेह आवश्यक है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर किया गया विकास न तो स्थायी होता है और न ही भविष्य सुरक्षित करता है। इसके लिए 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट' ही एकमात्र समाधान है।
ओरण और खेजड़ी ने सदियों से इस मरु भूमि को जीवन दिया है। कई अकालों के कठिन समय में इन्होंने मवेशियों के लिए चारे और पानी की व्यवस्था की। दुर्भाग्यवश, आज विकास के नाम पर नीति-निर्माताओं द्वारा इन मूलभूत मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। सोलर प्रोजेक्ट्स के बहाने खेजड़ियां काटी जा रही हैं और ओरण भूमि को कंपनियों को आवंटित किया जा रहा है, जिसके दुष्परिणाम भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
जबकि समाधान बहुत सरल है, बस ज़रूरत है इच्छाशक्ति और नेक नियत की। सरकार चाहे तो विकास परियोजनाओं के साथ खेजड़ी सहित मरुस्थलीय पौधों के संरक्षण को अनिवार्य नियम बना सकती है। साथ ही ओरण को कानूनी दर्जा देने की जो प्रक्रिया चल रही है, उसमें व्यापक स्तर पर तेज़ी लाई जा सकती है, ताकि आम लोगों को बेवजह परेशान न होना पड़े।
हमें यह समझना होगा कि प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन ही स्थायी समाधान है। सरकार को निरंकुशता के बजाय संवाद, समाधान और संवेदनशीलता का रास्ता अपनाना चाहिए, ताकि ये जन आंदोलन संकल्प से सिद्धि तक पहुंच सकें।
ओरण पदयात्रा और खेजड़ी बचाओ आंदोलन में संघर्षरत सभी पर्यावरण प्रेमियों को मेरा पूर्ण समर्थन है, जो राजस्थान के पर्यावरण, संस्कृति और भविष्य को बचाने के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं।
#ओरण_बचाओ_पदयात्रा
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
धर्म, जाति, जेंडर और बैकग्राउंड के आधार पर होने वाला भेदभाव एजुकेशनल इंस्टीट्यूट/यूनिवर्सिटी/कॉलेज के साथ ही किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।
UGC द्वारा लागू किए गए 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' स्टूडेंट्स को आपस में बांटने, एक - दूसरे का विरोधी बनाने प्रयास नज़र आता है।
कोई छात्र, चाहे किसी भी कैटेगरी/वर्ग/जाति/समुदाय से हो; भेदभाव किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए। निर्बाध शिक्षा सबका अधिकार है।
यूनिवर्सिटी कैंपस में हर एक स्टूडेंट की सेफ्टी, सिक्योरिटी सुनिश्चित होनी चाहिए।
UGC की नई गाइडलाइंस केंद्र सरकार की उस मंशा को उजागर करती है, जो स्टूडेंट्स को टारगेट करने, उन्हें भटकाने के साथ ही शिक्षा विरोधी है, और हमारे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को ख़त्म करना चाहती है।
शेखावाटी के संस्थापक, शेखावत कुल के जनक, नारी अस्मिता के रक्षक, कुशल योद्धा और सेनानायक, न्यायप्रिय,साम्प्रदायिक सौहार्द के अग्रज पुरौधा ,साम्राज्य विस्तारक प्रातःस्मरणीय #महाराव_शेखाजी की जयंती पर सादर नमन 🙏🙏
#ShekhaJi#महाराव शेखा
पढ़े लिखे नवयुवकों में जातिवाद ज्यादा हावी है अफसोस है कि हम कहते थे की शिक्षा के फैलने के बाद यह सब चीज खत्म हो जाएंगे लेकिन लग रहा है कि शिक्षा जैसे जैसे बढ़ रही है हम संकीर्णता के साए में ज्यादा जा रहे हैं मैं युवाओं से विशेष रूप से कहना चाहूंगा इससे आप अंदर से भी विकृत और बाहर से भी विकृत बनकर हम पूरी समाज को विकृत बना देंगे.....
रविन्द्र सिंह की जीत ने साबित कर दिया है कि मेहनत और दृढ़ निश्चय के आगे कोई लक्ष्य बड़ा नहीं है।
जन्मदिवस एवं जीत की हार्दिक शुभकामनाएं रवसा @RavindraBhati__@mahan_saria @AnkeshBhati_JNU @ShekhawatSharad
राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 को एक ऐसे युवा के लिए भी याद रखा जायेगा जिसने बिना किसी पार्टी के टिकट , बिना किसी गॉड फादर के चुनावी रण में जान झोंक दी। जहाँ सभी बड़ी पार्टियां धर्म और जातिवाद के आधार पर चुनाव लड़ रही थी वहां उसने मूलभूत सुविधाओं के अभाव को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा।
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की गारंटियों के इतर जनता की गारंटी पर बहुत ही प्रभावशाली तरीके से चुनाव लड़ा और शिव की जनता ने इस युवा के सिर जीत का सेहरा बांधा। इस चुनाव में जहाँ बड़े-2 दिग्गजों के किले ध्वस्त हो गये वहीं पश्चिम से उम्मीदों के रवि का उदय वाक़ई क़ाबिले तारीफ है।