IIT Mumbai में सिर्फ साहिल वाकोडे की मृत्यु नहीं हुई है।
This is the murder of the reputation of Professor Suryanarayana Doolla. उनके आत्मसम्मान, प्रतिष्ठा और अकादमिक करियर की हत्या हुई है।
Case चल रहा है, फिर भी मैं Case पर टिप्पणी कर रहा हूँ। तो इससे आपको पता चलना चाहिए कि मेरी मनःस्थिति कैसी है। आपको लग रहा है कि मैं अत्यंत तनाव में हूँ, मैं कुछ नहीं करूँगा।
But मैं बैठा हुआ हूँ, live में, वही कर रहा हूँ जो प्रतिदिन करता हूँ और आपके बापों की, नए बापों की, पुराने बा���ों की, पिलाई मैं इसी तरह से करता ��हूँगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह नि���्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन त�� सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन क�� दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मा�� की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
जो ये कहता है कि मिलावटखोरों को देश में नहीं रहना चाहिए, वो हिंदू नहीं है।
पहले दिन से, जब से मिलावटखोर इस देश में आए हैं, तब से आजत��� मिलावटखोरी है और रहेगी।
- मोईन अबू-बकर
RHA की अब तक की सबसे बड़ी जीत:
१. आरक्षण पर सोशल मीडिया और मीडिया में लगातार चर्चा
२. आरक्षण पर ‘दलित नेता’ की जगह अमुक जाति बनाम अमुक जाति का वाक्युद्ध
३. आरक्षण पर लोगों के पास आँकड़े, तथ्य और तर्क
४. सरकार द्वारा एकता तोड़ने के प्रयास, जो लोगों को दिख रही है
५. आरक्षण पर उपेक्षित जा��ियों के कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा खुल कर अपनी बात रखने का आरंभ
आने वाले दिनों में यह और वृहद् और व्यापक होने वाला है। नवंबर की प्रतीक्षा कीजिए।
शिक्षक अयोग्य तो बच्चे बर्बाद,
चिकित्सक अयोग्य तो शरीर बर्बाद,
और जज अयोग्य तो तारीख पर तारीख।
इसलिए शिक्षा, चिकित्सा और न्याय व्यवस्था में केवल मेरिट के आधार पर ही सिलेक्शन होना चाहिए।
"अब तुम्हारे भाई, बाप दादा हमारे खेत में ट्रैक्टर चला रहे हैं, 100-50 के लिए! अपने लिमिट में रहकर घूम! 1990-1995 वाला समय मत समझ! ये 2026 है, अब तुझमें और मुझमें कोई फर्क नहीं है! अब चमार किसी से कम नहीं है, तुझे औकात दिखा दिया जाएगा!"
-भीम आर्मी जिलाध्यक्ष वीरेंद्र भारती
जब ये खुद कह रहे हैं कि ये किसी से कम नहीं, इनके पास बहुत पैसा है, जमीन है, अब ये हर तरह से हमसे अच्छी स्थिति में हैं, तो इनको आरक्षण क्यों दिया जा रहा है????
ये रेकॉर्डिंग हर जगह फैलाइये ताकि लोगों को समझ आये कि अब इस जाति को आरक्षण की कोई ज़रूरत नहीं, क्योंकि अब ये खुद मान रहे हैं कि ये बराबरी हासिल कर चुके हैं🙏
मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
��ूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
जंतर मंतर तो खाली करा लिया जाएगा लेकिन बिना किसी रिव्यू के अंधाधुंध दिए जा रहे आरक्षण को लेकर जो विरोध लोगों के मन में भर चुका है वो मन से ख़ाली कैसे होगा?
लेकिन पता है कि कोई पार्टी इसपर चर्चा तक को तैयार नहीं होगी। लिख के ले लीजिए।
नहीं होगा। 25% क्षमता और 75% आरक्षण के कारण देश 2097 तक भी विकसित नहीं होगा। आपकी आत्मा मरने के बाद आपको कचोटेगी कि मेरे पास सब कुछ था, जनसमर्थन था, संख्या थी, विजन था और मैंने दलीत-पीड़ीत-शोषीत-वंचीत के नाम पर सब बर्बाद किया।
आपके अंबेडकर-फु��े प्रेम ने इस देश को बर्बादी की राह पर डाल दिया है।