@zomatocare@zomato (2) amt of Rs. 7600 (divided by 100) was offered for not writing review which I didnt accept nd posted my review for the restaurant.
Surprisingly that review has been removed.
@deepigoyal hav u started trading customer reviews with restaurants? Kitna mila?
@zomatocare@zomato have developed a new business model... this model actually trades customer complaints against Food corners/Dhabas/Restaurants. Got served with a superlative Ghatiya dish by a restaurant... when tried raising complaint... they offered an amount in wallet (1)
एक लोककथा।
1947 से पहले यूपी में नवाबी परिवार के एक ज़मींदार साहब मुस्लिम लीग में थे। हालाँकि उनको पता था कि संयुक्त प्रांत पाकिस्तान में नहीं जाएगा। पर वे मज़हब को राष्ट्र से बड़ा मानते थे।
आज़ादी करीब आई तो उन्होंने पाकिस्तान के मुल्तान में कोठी और खेत ख़रीद लिए। भारत की कुछ जायदाद बेच दी और बाक़ी सैकड़ों एकड़ ज़मीन वक़्फ़ को दान दे दिया। वे पाकिस्तान चले गए।
लेकिन उनकी ज़मीन आज़ाद भारत में वक़्फ़ के पास बनी रही।
वहीं पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश के हिंदू ज़मींदार जब वहाँ से भगाए गए (पाकिस्तान के क़ानून मंत्री रहे जोगेंद्र नाथ मंडल ने विस्तार से लिखा है) तो उनके पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं था कि वे अपनी ज़मीन किसी हिंदू संस्था या मठ को दे देते।
उनकी सारी ज़मीन जबरन दुश्मन की प्रॉपर्टी मानकर ले ली गई। नवाब साहब को पाकिस्तान में हिंदू ज़मींदारों से छीनी हुई ज़मीन भी मिली।
वक़्फ़ का एक इस्तेमाल ये भी हुआ है।
बांग्लादेशी और रोहिंग्या हिमाचल प्रदेश पर कब्जा कर रहे हैं, हमें उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालना चाहिए - हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मंत्री
वह बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से हैं. क्या सेक्युलर उन्हें संघी कहेंगे?
जावेद अख्तर @Javedakhtarjadu
ने 1970 से 1982 तक लेखक सलीम के साथ मिलकर 24 बॉलीवुड फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी। इनमें से ज्यादातर फिल्में अंडरवर्ल्ड पर अपराध आधारित कहानियां थीं।
इस अवधि के दौरान, बॉम्बे में पांच खूंखार अपराधी थे - हाजी मस्तान, यूसुफ पटेल, करीम लाला वरदराजन मुदलियार और दाऊद इब्राहिम। इनमें से चार मुसलमान थे। पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि मुंबई में 80 प्रतिशत अपराधी मुसलमान थे।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी दौरान बॉम्बे में जावेद अख्तर और सलीम जावेद ने 24 फिल्मों की कहानी लिखी, उनकी स्क्रिप्ट के खलनायक कभी मुसलमान नहीं थे। यह जावेद अख्तर को लोकप्रिय फिल्मों के शक्तिशाली माध्यम से जनता की सोच को प्रभावित करने के लिए अचूक पूर्वाग्रह दिखाता है।
जावेद अख्तर द्वारा लिखी गई फिल्म दीवार से जुड़ी कहानी जानी-पहचानी है। फिल्म का नायक एक हिंदू है, एक नास्तिक है जो हिंदू धर्म से इतनी नफरत करता है कि वह मंदिर की सीढ़ियों पर भी पैर नहीं रखता है। वह भगवान के प्रसाद को छूता तक नहीं है लेकिन वही नास्तिक हिंदू नायक, एक इस्लामी धार्मिक प्रतीक है, उसकी बांह पर संख्या 786 बिल्ला है जिस पर वह गहरा विश्वास करता है। यही बिल्ला उसकी जान बचाता है जब एक गोली उसे लगती है।
1983 से 2006 तक जावेद अख्तर ने 14 और फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी लेकिन उन 14 फिल्मों में भी एक भी मुस्लिम किरदार को नेगेटिव नहीं दिखाया, यानी 1970 से 2006 तक कुल 38 फिल्मों में जावेद अख्तर के किस्सों में एक भी मुस्लिम किरदार को विलेन के तौर पर नहीं दिखाया गया। ध्यान रहे उनमें से लगभग 60% फिल्में शुद्ध अपराध की कहानियों पर आधारित थीं।
उन दिनों मुंबई में मुस्लिम गुंडों, तस्करों, हत्यारों, आतंकवादियों का अपराध कहर ढा रहा था। जिसके बारे में पूरा देश जानता है लेकिन जावेद अख्तर की लिखी हर कहानी का खलनायक हमेशा हिंदू था, यह संयोग नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में, यह संयोग नहीं बल्कि एक प्रयोग था....
गौरतलब है कि यह जावेद अख्तर पाकिस्तानी मुशायरे के सेमिनारों और सम्मेलनों के बहाने दशकों से पाकिस्तान की कई यात्राएं कर रहा है लेकिन उन्होंने पाकिस्तान में हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी या बौद्ध परिवारों पर पाकिस्तानी मुस्लिम गुंडों द्वारा की जा रही हत्या, लूट और बलात्कार के राक्षसी कहर के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला।
पाकिस्तान में गैर-मुसलमानों की ऐसी दर्दनाक स्थिति उनकी किसी कहानी या ग़ज़ल पर कभी नहीं पड़ी थी लेकिन ये वही जावेद अख्तर हैं जिन्होंने सीएए का विरोध किया था और पाकिस्तानी मुस्लिम गुंडों को भारत की नागरिकता देने की जिद कर रहे थे।
तीन-चार दशक पहले फिल्म जिहाद की कमान वामपंथियों के मुखौटे में वैचारिक रूप से चालाक ठगों और धोखेबाजों के गिरोह को सौंप दी गई थी। 7-8 साल पहले तक देश के वैचारिक धरातल पर वामपंथ का मुखौटा लगाकर वैचारिक रूप से चालाक ठगों और धोखेबाजों के गैंग ने तानाशाह की तरह देश पर राज किया। सत्ताधारी लालची कांग्रेस इस वामपंथी वैचारिक कचरे की गठरी को शो पीस की तरह अपनी पीठ और खोपड़ी पर ढोती रही।
लेकिन 7-8 साल पहले इस देश के आम आदमी को सोशल मीडिया का मंच मिला और उस मंच से आम आदमी ने सच बोला। सच्चाई की इस गर्जना के कारण, वामपंथी विचारधारा बुरी तरह से ढहने लगी, देवताओं के स्थान पर कब्जा करने वाले देवता। वामपंथी शैतानों की जो मूर्तियाँ सीधी खड़ी थीं, उन्हें जनता ने उखाड़ना शुरू कर दिया है।
यह पोस्ट एक ही आम आदमी द्वारा ठोस सबूत और तथ्यों के साथ बताई जा रही सच्चाइयों की एक श्रृंखला की कड़ी है। बॉलीवुड जिहाद का ये सिलसिला अभी भी जारी है जैसे आम आदमी की इसके खिलाफ लड़ाई...
"कांग्रेस के काले कारनामे" - P1
क्या आप जानते हैं "Sonia Gandhi" के नेतृत्व वाली UPA सरकार में ‘Goodwill Gesture’ के नाम पर
"25 पाकिस्तानी आतंकियों" को जेल से रिहा कर दिया था?
उसमे एक महत्वपूर्ण बात ये थी कि 814 Kandahar Hijack में भूमिका निभाने वाला "जैश-ए-मोहम्मद" का सदस्य शाहिद लतीफ भी शामिल था जिसने बाद में पठानकोट में हमला किया था।😳😳
साभार @Pamphlet_in@himanshi__bisht
उत्सव मंडल जो बांग्लादेश के दलित हिंदू हैं वह X यानी ट्विटर पर बांग्लादेश के हिंदुओं की समस्याओं पर लिख रहे थे
उन्होंने कई ट्वीट किया कि बांग्लादेश के हिंदुओं को बचा लीजिए
फिर जमाते इस्लामी ने बांग्लादेश की सेना और बांग्लादेश की पुलिस की उपस्थिति में उत्सव मंडल की पीट पीट कर और उनको कुचल कुचल कर मार डाला
और उनकी हत्या कर दी
और हत्या करने के बाद जमाते इस्लामी के हत्यारे खून से सने कपड़ों में सरेआम मिलिट्री के सामने बोल रहे हैं कि हमने उस हिंदू काफिर उत्सव मंडल को मार डाला
सोचिए बांग्लादेश में हिंदुओं की अब कितनी दुर्दशा हो गई है
सब कोई इस पर खामोश है अब कोई इस पर कुछ नहीं बोल रहा
#HindusAreNotSafeInBangladesh
#HindusUnderAttack #Hindus
#SaveHindusinBangladesh
#SaveBangladesiHindus
#AllEyesOnBangladeshiHindus
#HelpBangladeshiHindus
#helpbangladeshisanatani
@IDBIBankCares@idbidirect@IDFCFIRSTBank Your guys are extremely dumb... close disputes without even reading the content... 2 back to back disputes closed robitically.
Give 5 Cr rupees to the guy who designed your mobile app... and ask him leave the planet asap, no new app he should work on.
मैं कहता हूं अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी भारत की कांग्रेस और वामपंथियों से भी बड़ी दोगली पार्टी है....
इन हरा%$ खोरों की करतूत देखिए कि भारत के तथाकथित किसान नेताओं को चाय की पार्टी पर आमंत्रित किया... ताकि हरियाणा के चुनाव को प्रभावित किया जा सके
भारत सरकार अमेरिकी दूतावास के इस हरकत पर खामोश क्यों है @DrSJaishankar ??
यह उदयपुर का वही हिंदू दलित लड़का देवराज मोची है जिसे जिहादी ने मार डाला था। तुम उसकी आवाज सुनो. उसकी आवाज़ में बहुत जोश था. इतनी कम उम्र में भी ये बच्चा जातियों में बंटे हिंदुओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है. क्या उन्हें राष्ट्रवादी होने के कारण मारा गया?
भारत में लेटरल एंट्री की शुरुआत नेहरू ने किया
जवाहरलाल नेहरू ने अपनी सगी बहन को जो पांचवी पास भी नहीं थी उन्हें न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र संघ में बल्कि अमेरिका का राजदूत मेक्सिको में भारत का राजदूत मास्को में भारत का राजदूत लंदन में भारत का उच्च युक्त डबलिन में भारत का राजदूत जैसे अहम पदों पर नियुक्त कर दिया था
जबकि इन पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय विदेश सेवा जरूरी होता है
और आज यही कांग्रेसी कुत्ते कह रहे हैं की लैटरल एंट्री बड़ी खराब चीज है इसमें आरक्षण नहीं होता