Dear @NSitharaman,
If share trading is someone’s only source of income and they make ₹8 lakh profit in a year through short term trading:
STCG tax: 20%
₹8,00,000 × 20% = ₹1,60,000
4% cess = ₹6,400
Total tax = ₹1,66,400
This feels unfair for people who depend only on trading.
A salaried person earning ₹12 lakh pay zero income tax, while a trader making just ₹8 lakh profit has to pay ₹1.66 lakh in tax.
WOWOWOW.
6 Rules for Trading
1. Always use a stop loss
2. Pay yourself when money is made available
3. Trade-in high-probability environments
4. Don’t trade against your daily/weekly bias
5. Never revenge trade
6. Don’t trade Monday London session
मुझे लग रहा है मीडिया ने गलत बंदा छेड़ दिया है,
अगर ये लड़ाई थोड़े दिन और चली तो, मीडिया में बहुत जल्द ही बदलाव देखने को मिलेगा।
अब गर्दा उड़ेगा भइया.....
काश! हमारी पिछली रिपोर्ट्स ,जैसे
•FSSAI के खिलाफ,
•MPLADS में भ्रष्टाचार के खिलाफ,
•जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ ,
•फर्जी सर्टिफिकेट से UPSC निकालने वालों के खिलाफ
•कई IAS IPS और IRS को एक्पोज करने वाली रिपोर्ट्स पर
•ये ठीक करके दिखाओ कैंपेन के दौरान
•अस्पतालों पर एक्पोज पर
•शिक्षा व्यवस्था पर एक्पोज पर
•अधिकारियों के भ्रष्टाचार एक्पोज पर
मीडिया ने 20 प्रतिशत भी लिखा होता तो सिस्टम में बहुत बड़ा बदलाव आ जाता , खैर, हम लगे हैं लगे रहेंगे,
आगे और बहुत बड़े खुलासे करने है।
इतने बड़े बड़े साइबर क्राइम हो रहे हैं उत्तर प्रदेश पुलिस उनको हल नहीं कर पा रही ,
लेकिन पुलिस की साइबर क्राइम शाखा अमेठी में बैठे SI अकरम कांग्रेस सांसद के कहने पर नोटिस भेज रहे।
क्या @dgpup ये है फ्री स्पीच ? @myogiadityanath ये है फ्री स्पीच? कृपया अकरम साहब को काम पर लगाइए, वरना हम कुछ नया ढूंढ कर दें?
टीम खुरपेंच वैकेशन से लौट चुकी है ,
और इधर कानूनी जवाब ऐसे तैयार पड़े हैं जैसे कुछ लोग FIR नहीं, खुद अपनी फाइलें खुलवाने की अर्जी दे बैठे हों।
एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हम कानून की पूरी इज़्जत के साथ कोर्ट पहुँचेंगे,
बाकी भरोसा रखिए यदि मामला अगर ठीक से खुला, तो FSSAI पर सिर्फ जवाब नहीं, कई और दरवाज़े भी खुलेंगे।
जिन्होंने सोचा था नोटिस भेजकर आवाज दब जाएगी,
शायद उन्हें अभी अदालत वाला चैप्टर पढ़ना बाकी है.
हेलो @fssaiindia ,
"आपने @khurpenchh पर FIR करवा कर अच्छा नहीं किया है"
~आप लोग हमारी आवाज दबा नहीं पाओगे,
~सड़ी गली बेचने वालों को लाइसेंस आप दो,
और FIR हम पर करवा रहे हो,
~लाइसेंस कैंसिल होने के 1 महीने बाद ही फिर से लाइसेंस दे देते हो, कितना मिलता है?
~ खराब प्रोडक्ट पकड़े जाने पर 1 महीने बाद वही प्रोडक्ट का सैंपल तुम्हारी लैब में पास हो जाता है, कितना मिलता है?
IRCTC से सीधा सवाल — ये झूला क्यों झूल रहा है?
IRCTC, ये साफ-साफ बताइए 👇
पूरा फॉर्म भरने के बाद, आधार Authentication पर क्लिक करते ही
Tatkal टिकट का सिस्टम क्यों झूला झूलने लगता है?
यात्री सब कुछ सही करता है 👇
लॉग-इन टाइम पर
पूरा डिटेल सही भरा
कैप्चा, OTP सब पूरा
पेमेंट के लिए तैयार
फिर भी उसी निर्णायक पल पर 👇
स्क्रीन घूमती रहती है
प्रोसेस आगे नहीं बढ़ता
टिकट किसी और को मिल जाती है
कई बार पैसा कट जाता है, टिकट नहीं बनती
सीधे सवाल 👇
Aadhar Authentication पर ही सिस्टम क्यों फेल होता है?
क्या Tatkal टाइम पर सर्वर लोड संभाल नहीं पाता?
अगर सिस्टम तैयार नहीं है तो Tatkal खोलते ही क्यों हैं?
पैसा कटने पर तुरंत टिकट या तुरंत रिफंड क्यों नहीं?
इस “झूले” को बंद करने जिम्मेदारी किसकी है — सिस्टम , वेंडर या IRCTC?
ये टेक्निकल ग्लिच नहीं,
ये हर दिन हज़ारों यात्रियों का नुकसान है।
यात्रियों को “misinformation” बोलना बंद कीजिए।
पहले ये बताइए — आधार Authentication पर आपका सिस्टम क्यों हार मान लेता है?
दवा के दामों का खेल – आम आदमी के साथ खुला धोखा ??
नीचे दिख रही तस्वीर में ब्रो- कॉफडेक्स दवा है। मेडिकल स्टोर पर ये मुझे ₹90 में मिली, जबकि इसकी MRP ₹127 लिखी है।
कई मेडिकल स्टोर वाले इसको MRP के दाम पर ही देते है 50 पैसे भी कम नहीं करते है।
मतलब साफ है — जो कीमत असल में कम है, उसे जानबूझकर ज्यादा दिखाया जा रहा है ताकि छूट का झांसा दिया जा सके।
अब सीधे सवाल 👇
जब ₹90 में दवा बिक सकती है तो ₹127 क्यों लिखी?
MRP तय कौन करता है? कंपनी या सरकार?
क्या मरीज को बेवकूफ बनाया जा रहा है?
दवाओं के दाम कंट्रोल करने वाला विभाग कहां सो रहा है?
ड्रग डिपार्टमेंट का काम क्या सिर्फ कागजों में जांच दिखाना है?
बीमार इंसान पहले ही परेशान होता है, ऊपर से ये कीमतों का खेल उसकी जेब भी काट रहा है।
दवा जरूरत है, लग्ज़री नहीं। फिर आम आदमी से ही इतना मुनाफा क्यों?
हर जिले में नकली ऑरेंज आइसक्रीम रंग मिलाकर बेची जा रही है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। खुरपेंची सवाल ये है>
स्वास्थ्य मंत्रालय और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट आखिर कर क्या रहे हैं?
AC कमरों में बैठकर रिपोर्टें साइन करेंगे या मैदान में उतरकर जहरीली आइसक्रीम बनाने वालों पर कार्रवाई करेंगे?
Once you master #Stress and shift from #Complexity to #Simplicity,
life 🧬 becomes lighter…
and even your body needs less sleep.
Use that extra time to create #ALPHA in your life,
because everyone gets the same 24 hours.
#DARVAS🥸
इतिहास में पहली बार है |
जो हजारों संत हिंदू राष्ट्र के संकल्प के साथ |
लाखों हिंदुओं की भीड़ को लेकर पद यात्रा कर रहे हैं |
संतों के इस संकल्प को आप करोड़ों हिंदुओं के जोश की आवश्यकता |
हिंदुओं को सो करने के लिए |
अगर बागेश्वर बाबा पैदल।यात्रा कर सकते हैं |
तो क्या हम हिंदू सोशल मीडिया से समर्थन नहीं कर सकते |
हिंदुओं साथ आओ और सोशल मीडिया से ताकत दुनिया को दिखाओ |
पहले UPI ऐप्स कहते थे — फ्री पेमेंट, नो चार्ज !!
लोगों ने भरोसा किया, करोड़ों डाउनलोड हुए।
अब वही ऐप्स जनता की जेब काट रहे हैं👇
💸 PhonePe – ₹1 से ₹10 तक “प्लेटफॉर्म फीस।
💸 Paytm – ₹4 से ₹30 तक बिल अमाउंट पर चार्ज।
💸 Google Pay – कुछ सर्विसेज पर सर्विस फीस शुरू।
गरीब और मिडिल क्लास के लिए ये फ्री सुविधा अब डिजिटल लूट बन गई है।
जो सिस्टम “कैशलेस इंडिया” के नाम पर आया था ,
अब “चार्जफुल इंडिया” बना दिया गया है।
SIM कार्ड कम्पनियां (@reliancejio , @airtelindia ) पहले वादे करते थे कि लाइफटाइम सिम — बस तीन महीने में एक बार ₹10-20 का रिचार्ज कर दो, सिम चलता रहेगा।
अब वही कंपनियाँ हर महीने ₹250-₹350 का “मैंडेटरी रिचार्ज” थोप रही हैं।
डाटा जो कभी ₹250 में 1GB मिलता था, पूरे महीने चलता था। अब 1GB बड़ी मुश्किल से 1 दिन चलता है।
इनकमिंग कॉल पहले फ्री थीं, सिम कार्ड बंद नहीं होते थे लेकिन अब हर चीज़ “कंडीशन अप्लाई” में बदल गई।
TRAI और सरकार चुप हैं , जैसे सब कुछ कॉरपोरेट सुविधा बन गया हो।
कहाँ गए वो डिजिटल इंडिया और सस्ता इंटरनेट के वादे?
जनता से लाइफटाइम सिम का झांसा लेकर अब हर महीने जेब काटी जा रही है।
#Khurpench #TelecomLoot #ConsumerRights
पहले Paytm ने लोगों को फ्री बिल पेमेंट और रिचार्ज का लालच देकर जोड़ा।
लाखों लोगों ने भरोसा करके ऐप इंस्टॉल किया, प्रयोग बढ़ाया, और अब जब सब इस पर निर्भर हो गए तब शुरू हुई असली लूट।
अब हर बिल या रिचार्ज पर “प्लेटफॉर्म फीस” के नाम पर चार्ज लिया जा रहा है —>
₹1,000 तक का बिल : ₹4
₹1,001 से ₹5,000 तक : ₹8
₹5,001 से ₹40,000 तक: ₹20
₹40,000 से ऊपर : ₹30
यानी पहले फ्री की आदत डालो, फिर धीरे-धीरे हर क्लिक पर पैसा वसूलो।
क्रेडिट कार्ड बिल, डेबिट कार्ड पेमेंट पर भी अब चार्ज है — ₹1 से ₹40 तक।
डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर ₹2,000 तक पर 1.6% और ₹2,000 से ऊपर पर 1.1% तक काटा जाता है।
ये वही Paytm है जो कैशलेस इंडिया का नारा लगाकर आया था ,
अब वही जनता से हर ट्रांज़ैक्शन पर कैश निकालने में लगा है।
गरीब और मिडिल क्लास के लिए ये डिजिटल सुविधा नहीं , डिजिटल लूट है।