मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जनसेवा मित्रों और पेसा मोबलाईजर्स से बड़े-बड़े वादे किए थे। युवाओं को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी सेवाओं को सम्मान मिलेगा और भविष्य सुरक्षित किया जाएगा। लेकिन चुनाव खत्म होते ही हकीकत सामने आ गई।
पहले करीब 9300 जनसेवा मित्रों को सेवामुक्त किया गया और अब पंचायत राज संचालनालय के आदेश से पेसा मोबलाईजर्स को भी तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जिन युवाओं ने गांव-गांव जाकर पंचायत, ग्रामसभा और पेसा कानून को मजबूत करने का काम किया, आज वही युवा बेरोजगारी और असुरक्षा के संकट में धकेल दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युवाओं का उपयोग सिर्फ चुनावी प्रचार और राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था? यदि योजनाएं समाप्त हो रही थीं तो इन युवाओं के पुनर्वास, नियमितीकरण या वैकल्पिक रोजगार की कोई नीति क्यों नहीं बनाई गई?
यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक भागीदारी और युवाओं के भरोसे का भी सवाल है। सरकार को तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए पेसा मोबलाईजर्स और जनसेवा मित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस निर्णय लेना चाहिए।
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@DrMohanYadav51@collectorbalagh मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि योजनाओ को सुचारू रूप से संचालन कर ओ जन सेवा मित्रों को रोजगार देकर बेरोजगार कर दिया गया और कहते हैं कि जन सेवा मित्रों ने घर-घर जाकर फीडबैक तैयार किया और बाद में बाहर कर दिया गया
➡️ नवागत कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सागर जिले में विधिवत पदभार ग्रहण किया। अपने प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व एवं जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के साथ उन्होंने जिले के समग्र विकास, सुशासन एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प लिया।
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