ममता बनर्जी आगामी विधानसभा चुनाव में नंदिग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी।
पिछले चुनाव में यें भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से हार गए थी, लग रहा हैं इस बार डर गई हैं।
यही कारण हैं की ये विपक्ष में हैं, और अभी इनकी वापसी होते हुई भी नहीं दिख रही हैं।
जनता भाजपा की सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस की सरकार वापस ना आये, ये सुनिश्चित करने के लिए वोट कर रही हैं।
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देश का विपक्ष मानसिक तौर पे दिवालिया हों चूका हैं।
अगर किसी मुद्दे पे जनता सरकार को घेर रही हैं तो विपक्ष का काम जनता की आवाज़ बन��े का होना चाहिए, लेकिन ये लोग हर मुद्दे को केवल अपने राजनीती फायदे और नुकसान की तराजू पे तौल कर देखते हैं।
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वर्ण व्यवस्था के अनुसार तो एक शूद्र भी ब्राह्मण और एक ब्राह्मण भी शूद्र बन सकता हैं, गुण डिसाइड करता हैं की कौन किस वर्ण से होगा......
यह हिन्दू राष्ट्र हु�� अखंड भारत बस एक सपना हैं जो दिखा कर के बीजेपी वोट ले रही हैं, इनका असली मक़सद सत्ता में बने रहना हैं
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आरक्षण और कुछ नहीं बस राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त में दिया जाने वाला वह मलाई हैं जो deserve नहीं करते, आरक्षण देने का एकमात्र मक़सद वोट ले कर सत्ता में आना हैं।
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यह प्रताड़ित करने वाली कहानी बस एक मिथ्या हैं, लोगों के बिच विवाद होता हैं पर विवाद जाती या वर्ण देख कर नहीं होता।
क्या राजपूत आपस में नहीं लड़ते? क्या ब्राह्मण आपस में नहीं लड़ते?
जिस तरह हमारा आपसी मतभेद होता हैं वैसे हीं कभी कभी दलितों के साथ भी विवाद हों जाता हैं.....
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यह इंसान एक संकराचार्य तो बिल्कुल नहीं हों सकता, हालांकि ��े हैं भी नहीं ( सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के अनुसार )।
संतो के एक भी गुण नहीं हैं इसके अंदर, हमेशा पोलिटिकल बयानबाज़ी करता हैं और हिन्दुओ को बाटने की कोशिश करता रहता हैं।
इस बसंत पंचमी ये संकल्प ले की केवल सरस्वती माता की पूजा नहीं बल्कि जीवन में ज्ञान की प्रसंगिकता को समझेंगे और ज़्यादा से ज़्यादा ज्ञान अर्जित करने की कोशिश करें।
यह पूजा नाच - गाना का केंद्र ना बने, ये हमें सुनिश्चित करना होगा।
जय सरस्वती माता 🙏
@ajeetbharti नेता जी लोग क्या हीं बोलेंगे, मोदी जी के नाम पे जीत रहे हैं.... वही रटा रटाया 2-3 लाइन बोलते रहते हैं।
हॉस्टल के नाम पे पटना में क्या चलता हैं ये किसी से छुपा हुआ नहीं हैं, बस लोग बोलते नहीं हैं क्यों की सब यही सोचते हैं की " वों क्यों कुछ बोले? उन्हें क्या मिलेगा? "
अभी लोगों को अपने अंदर अंदर झाकने की आवसक्यता सबसे ज़्यादा हैं खुद से सवाल पूछिए क्या आप अपने बच्चो को सही ज्ञान दे रहे हैं? ये समाज जा कहा रहा हैं? "चंद ��ैसो के लिए किसी भी काम को normalise" करने वाली मानसिकता कही हमारे पतन का कारण तो नहीं बन रही?
पूछिए अपने आप से और सोचिये
क्यों की प्रशासन पे सवाल उठाना सबसे आसान होता हैं इसीलिए ज़्यादातर लोग वही करते हैं और अभी भी वही कर रहे हैं। सवाल पूछना गलत बात नहीं हैं, पर बिना किसी प्रूफ के conclusion पे पहुंचना सही नहीं हैं। सवाल पूछिए पर प्रशासन ���ो उनका काम भी करने दीजिये.....
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फिर ज़ब कोई बड़ा काण्ड होता हैं तो कुछ दिनों के लिए लोग जागते हैं ( या फिर शयाद जागने का नाटक करते हैं ) फिर अपने - अपने कामों में व्यस्त हों जाते हैं।
अगर कोई दुख झेलता हैं तो वह हैं पीड़ित / पीड़िता के घरवाले, रिस्तेदार....
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फि�� सवाल ये उठता हैं की कोई आवाज़ क्यों नहीं उठाता?
तो बात ये हैं की sêx र���केट के लिए जितना जिम्मेदार कस्टमर हैं उतना हीं सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर भी हैं। लोग ये सोच कर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं की " मुझे क्या? मैं क्यों इन सब चक्करो में पड़ू? "
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पटना गर्ल्स हॉस्टल मामले में जाँच के दौरान जो sêx रैकेट वाली बात सामने आ रही है ये कोई हैरानी वाली बात नहीं हैं।
पटना में या फिर पटना के पास के इलाकों में रहने वाले लोग सब जानते हैं,और ये सिर्फ सिर्फ पटना की बात नहीं हैं लगभग हर छोटे - बड़े शहर का यही हाल हैं....
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देश के सामान्य वर्ग ( General category ) के लोगों हीं सही मायने में अल्पसंख्यक है, लेकिन देश का कोई देता चाहे वों पक्ष हों या विपक्ष चाहे वों सवर्ण जाती से हीं क्यों ना आता हों, कोई भी इनके लिए खड़ा नहीं होता।
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