आप राहुल गांधी से नफरत करते हो ना,
आप कांग्रेस से नफरत करते हो ना,
सच सच बताना।
मुझे मा���ूम है आप करते हो।
मैने निजी तौर पर महसूस किया है, मुझे पता है आप राहुल और कांग्रेस से नफरत करते हो क्योंकि मीडिया ने आपका ब्रेनवॉश किया है।
कोई बात नहीं।
सुनो, आप राहुल गांधी को वोट मत देना, उसको सपोर्ट मत करना लेकिन वो आपके बच्चों के भविष्य का सवाल उठाने कोटा आ रहा है क्योंकि वो पागल है, वो आपके बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
उसको वोट नहीं चाहिए, उसको बस भारत का भविष्य उज्ज्वल चाहिए।
वो आयेगा, वो सिर्फ आपके बच्चों के भविष्य की बात करेगा, आपके वोट की नहीं।
वो पागल है, वो भारत की बात करता है वोट की नहीं, इसलिए नफरत के इस दौर में वो आपकी कांग्रेस और राहुल के प्रति नफरत से हार जाता है।
लेकिन अगर आप साथ आए तो वो आपके बच्चों का भविष्य ज��ता जायेगा।
आप अपने बच्चों का सोचो, नेताओं के बच्चों के भविष्य का नहीं।
आपका नाम अश्विनी वैष्णव है।
आप रेल मंत्री हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर “रील मंत्री” के नाम से ज्यादा फेमस हैं।
अब आपने भरोसा दिलाया है कि IRCTC की खराब वेबसाइट 30 दिनों में अपडेट हो जाएगी।
वही IRCTC, जहां टिकट से पहले यात्री CAPTCHA से कुश्ती लड़ता है।
वही IRCTC, जहां तत्काल बुकिंग 10 बजे शुरू होती है और उम्मीद 10:01 पर ��म तोड़ देती है।
वही IRCTC, जहां लॉगिन फेल, OTP लेट, पेमेंट हैंग, पैसा कट और अंत में नतीजा - वेटलिस्ट या रिग्रेट।
पिछले 3,037 दिनों से यात्री वेबसाइट पर बुलेट ट्रेन नहीं मांग रहे।
वे बस इतना चाहते हैं कि टिकट बुक करते समय सिस्टम इंसानों जैसा काम करे , सरकारी दफ्तर जैसा नहीं।
डिजिटल इंडिया में एक ट्रेन टिकट बुक करना अगर UPSC प्रीलिम्स जैसा लगने लगे , तो समस्या यात्री की नहीं , सिस्टम की है।
उस हरामी ने सत्ता में बने रहने के लिए क्या क्या किया👇
उसने चुनावी तंत्र ���ो ऐसे जकड़ लिया कि विपक्ष का कोई मतलब ही नहीं रह गया,
हर जगह, हर चुनाव वही जीतने लगा,
उसके अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा बेलगाम दौड़ने लगा,
उसने विपक्ष को खत्म करने का पूरा प्लान बनाया,
उसने संस्थाओं का बेजा इस्तेमाल करके विपक्षी नेताओं को डरा धमका कर खुद की पार्टी में ही मिला लिया,
विपक्ष की पार्टियां लगभग खत्म होने लगी,
उसने ऐसा नरैटिव बना दिया कि वो नहीं तो कौन,
उसने प्रेस फ्रीडम पर ताले लगा दिए,
उसने अपने व्यापारी मित्रों के जरिए पूरी प्रेस को अपने कब्जे में ले लिया,
उसने पूरी मीडिया में चाटुकार मंडली बिठा दी,
और तो और सोशल मीडिया को भी कब्जे में कर लिया,
उसने कोर्ट में भी अपने लोग बैठा दिए,
कोर्ट के फैसलों से जनता का यकी�� जाने लगा,
उसने संस्थाओं पर अपना नियंत्रण बनाने रखने के लिए बहुत सारे कानून बदल दिए,
उसने मुख्य मुख्य संस्थानों में अपने लोग बैठा दिए,
उसने परिसीमन करके सीटों का ऐसा जाल बनाया कि उसे हराना नामुमकिन हो जाए,
वो बार बार इतिहास की बात करने लगा,
वो खुद के कामों के बारे में कुछ नहीं बोलता,
लेकिन पुरानी सरकारों को वर्तमान हालातों के लिए जिम्मेदार बताने लगा,
उसने खुद के लिए नए महल बनवा लिए और नए ���हल में मीडिया की एंट्री बंद कर ��ी,
वो अपने नए महल में बस फोटोशूट करवाने लगा।
इतना सब करने के बाद भी आखिरकार 16 साल बाद हंगरी का डिक्टेटर विक्टर ऑर्बान हार गया।
कैसी लगी आपको हंगरी की कहानी।
5 करोड़ मुकदमे पें���िंग हैं।
जनता अदालतों के चक्कर काट रही है।
लेकिन चीफ जस्टिस, कानून मंत्री और 150 VIP लोग लंदन में "बैडमिंटन आयोजन" के नाम पर करोड़ों फूंक रहे हैं।
जिस कार्यक्रम का आयोजन भारत में हो सकता था, उसके लिए विदेश दौरे की क्या जरूरत थी?
कल तक जनता को ज्ञान दिया जा रहा था विदेशी मुद्रा बचाओ, पेट्रोल कम खर���दो।
यानि त्याग सिर्फ जनता करे और VIP वर्ग टैक्सपेयर्स के पैसों पर विदेश यात्राएं करे?
फिर उम्मीद की जाती है कि जनता सरकार और न्यायपालिका की नज़दीकियों पर सवाल भी न पूछे।
देश देख रहा है।
देश सवाल पूछ रहा है।
“अंबानी जी ने ट्रंप जूनियर की struggling कंपनी में $100 मिलियन डाल दिए… और जादू हो गया!
टैरिफ का तूफान थम गया, Russian oil का waiver मिल गया, Venezuelan license मिल गया।
‘Crony Capitalism’ का नया मॉडल: पहले threaten करो, फिर deal करो।
Modi ji, ये ‘National Interest’ है या ‘Ambani Interest’?
ठोको ताली 👏😏
मुझे कोविड-19 का दौर अच्छी तरह याद है। अपने-अपने घरों में कैद हम लोग, अपनी और अपनों की जान की ख़ैर मना रहे थे। ‘जान है तो जहान है’ -का अर्थ उस दौर में सारी दुनिया को एक साथ समझ आ गया था।
राजनीति के अतिरिक्त सब कुछ पूरी तरह रुक गया था। सब लोग त्याग, समर्पण, मानवता तथा वैराग्य किस्म की बातें करते थे। रिश्ते, प्रकृति, स्वास्थ्य और मनुष्यता का अर्थ सभी ���ो ठीक-ठीक समझ आ गया था। महावीर का अपरिग्रह कुछ अंशों में सबके भीतर घटित होने लगा था। बिना किसी सरकारी ‘अभियान’ या ‘आदेश’ के भी लोग स्वच्छ रहने लगे थे।
मनुष्य के जीवन में आए इस परिवर्तन पर गिलहरी, चिड़िया, टिटहरी बधाई गाती फिर रही थीं। आसमान ने दिल्ली जैसे शहरों की मांग में तारे जड़ दिए थे। कोविड ने कुछ हद तक मनुष्यता के डीएनए को क्लीन कर दिया था।
‘कुछ हद तक’ इसलिए कि संकट की घड़ी में परस्पर सहयोग कर रहे लोगों का क्रेडिट हड़पनेवाले यशापेक्षी दैत्य उस दौर में भी नहीं सुधरे। सियासत उस समय भी ‘आपदा में अवसर’ तलाशती हुई वोट के गणित में व्यस्त थी। मरीज़ को अस्पताल में इलाज मिले, इससे पहले यह सोचा जाता था कि यदि यह मरीज़ ठीक हो गया तो इसका वोट हमारी पार्टी की ओर कैसे डायवर्ट होगा।
मनुष्य जाति पर इतना संकट था कि मरघट तक ने मानव की मिट���टी को शरण देने से कन्नी काट ली थी। स्थिति इतनी भयावह थी कि फोन की घंटी से दहशत होने लगी थी, कि कहीं कोई और ‘अपना’ तो नहीं चला गया। बेटे, अपने बाप की मिट्टी से ख़ौफ़ खा रहे थे।
भय ने मानव मन को इतना पवित्र कर दिया था कि बरसों-बरस से जिन रिश्तेदारों से बोलचाल बंद थी, उनको भी फोन करके हालचाल पूछने की पहल हो रही थी। सबके मन में क्षमा, ��रुणा, दया, अपनत्व और विरक्ति ने घर कर लिया था।
भय का इतना सकारात्मक परिणाम मैंने पहली बार उसी दौर में अनुभूत किया था। भय मनुष्य को मर्यादित करता है। भय मनुष्य को मनुष्य बनाता है। निर्भय होते ही मनुष्य में दानव जन्म लेने लगता है। निर्भय होते ही मानव मर्यादा लांघने लगता है।
आपको डूबने का भय नहीं रहेगा तो आप किनारे की सीमा लांघकर पानी के सीने पर अतिक्रमण करने लगेंगे। आपको गिरने का भय नहीं रहेग��� तो आप पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने लगेंगे। आपको मरने का भय नहीं रहेगा तो आप मारने में नहीं हिचकिचाएंगे। आपको अस्वस्थ होने का भय नहीं रहेगा तो आप देह के अनुशासन को भंग करेंगे। आपको भूख का भय नहीं रहेगा तो आप अन्न का अपमान करेंगे।
यह सामान्य मानवीय स्वभाव है। इसीलिए कहा गया है कि ‘भय बिनु प्रीति न होई’। संबंध भी हम तब तक निबाहते हैं, जब तक उस संबंध को खोने का भय न हो। यहां तक कि किसी क�� साथ मनुष्यता का व्यवहार भी हम तभी तक कर पाते हैं जब तक उस व्यक्ति विशेष से हमें किसी प्रकार की हानि ��ा भय रहता है।
जैसे ही हमें ज्ञात होता है कि अब सामनेवाला हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, तुरंत हम अमानुष हो जाते हैं।
कोविड के समय हमने प्रकृति के महत्व को जाना था। तब यह अहसास हुआ था कि इस दुनिया को संभालने में प्रकृति, मनुष्य से कहीं अधिक सक्षम है। कई दशकों में मनुष्य ने जिस प्रकृति की सूरत बिगाड़कर रख दी थी, मानवीय हस्तक्षेप कम होते ही प्रकृति ने केवल एक ऋतुचक्र में अपनी खोई आभा पुनः जुटा ली।
ल���किन मनुष्य बहुत निमर्म है। जिन लोगों ने मनुष्य बनकर जीने की कसमें खाई थीं, वे ही लोग संकट के बीतते ही दोबारा वीभत्स हो गए। उस संकटकाल में सीखे गए सबक ताक पर रखकर मनुष्य ने फिर उसी आपाधापी में स्वयं को झोंक दिया। नदी की नीली धार से लेकर वृक्षों के हरे जिस्म तक सबको घायल करने का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया। आसमान के चेहरे पर कालिख पोत दी। धरती की देह में सड़ांध बो दी।
सरकारी खजाने ��े बजट से वन लगाने के बजट पास हुए और भ्रष्टाचारी तंत्र वन लगाने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये डकार गया। पृथ्वी बेचारी देखती रह गई। उसका जिस्म नंगा रह गया। अधिकारियों को धरती की बेबसी दिखाई नहीं देती। जब कभी पृथ्वी कराह कर उनके पैर पकड़ती है तो वे समझ ही नहीं पाते कि उनके पांव किसने पकड़े हैं। क्योंकि उनकी दृष्टि और उनके पैरों के बीच में उनका पेट लटका रहता है।
जिन रिश्तों के महत्व को समझते हुए ���मने उस दौर में आंखें नम की थीं, उन्हीं रिश्तों को हम पुनः आंखें दिखाने लगे। जो पैसा उस दौर में ऑक्सीजन का एक सिलेंडर नहीं खरीद पा रहा था, उसी पैसे के लिए भाग-भागकर हम हांफ रहे हैं।
उस समय पैसा पड़ा था और संबंध काम आ रहे थे। आज संबंधों को लतियाकर पैसा कमाया जा रहा है। इन सब परिवर्तनों से समझ आ रहा है कि पर्यावरण केवल धरती का ही नहीं, बल्कि मनुष्य की मानसिकता का भी प्रदूषित है। प्रकृति तो अपने रंग-रूप को कुछ ही दिन में सुधार लेती है लेकिन मनुष्य न क��ी सुधरा है, न कभी सुधरेगा। वह तो संकट के काल में सुधरने का अभिनय मात्र करता है।
✍️ चिराग़ जैन
World Environment Day
CBSE अध्यक्ष - ट्रांसफ़र।
CBSE सचिव - ट्रांसफ़र।
एक-सदस्यीय “जाँच” समिति - गठित।
और असल ज़िम्मेदार, धर्मेंद्र प्रधान - सुरक्षित।
अधिकारियों को हटा दिया। मंत्री को बचा लिया।
यह जवाबदेही नहीं - यह cover-up है।
हमारी माँग आज भी वही है: शिक्षा मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाए और स्वतंत्र न्यायिक जाँच हो - ये मांगें कोई मोदी सरकार की एक महीने पुरानी अंदरूनी फ़ाइल नहीं जो यूं ही भुला दी जाए।
अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख CBSE छात्रों की परवाह हो���ी - धर्मेंद्र प्रधान जी कब के हटाए जा चुके होते।
CBSE में पहले छात्रों की आंसर शीट एग्जामिनर के पास जाती थी, जिसमें आंसर शीट चेक होती थी, लेकिन फिर ��े सिस्टम बदल दिया गया।
अब आंसर शीट स्कैन करके पोर्टल पर डाली जाती हैं। इसमें एक सिस्टम बनाया गया और कंपनी हायर कर इस प्रक्रिया को शुरू किया गया।
इस बिडिंग के पहले राउंड में TCS कंपनी आई, जो इंडस्ट्री की लीडर जानी-मानी कंपनी थी। लेकिन सिर्फ एक कंपनी होने के कारण टेंडर नहीं हुआ।
ऐसे में अगस्त 2025 में टेंडर का एक राउंड और हुआ, जिसमें COEMPT कंपनी क्वालीफाई कर सामने आई। मगर COEMPT कंपनी को टेंडर देने के लि�� नियम बदल दिए गए, ताकि व�� ठेका ले सके।
जैसे:
• प्रिंट क्वालिटी की DPI 300 होनी चाहिए थी, लेकिन इसे घटाकर 200 कर दिया गया
• टेंडर के लिए रोबोटिक्स हाई स्पीड स्कैनिंग सिस्टम अनिवार्य था, जिसमें TCS क्वालीफाई कर गई थी, लेकिन इस सिस्टम को हटाकर स्कैनर ले आया गया
• टेंडर के लिए Past performance, financial weakness का क्राइटेरिया हटा दिया गया
• इतना ही नहीं, टेंडर के नियमों से ब्लैकलिस्टिंग के नियम भी हटा दिए गए। अब COEMPT कंपनी रंगे हाथों पकड़ी गई है, ले���िन इसे ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा
• टेंडर में अनुभव का क्राइटेरिया भी हटा दिया गया। साथ ही, नियम यह भी था कि जिस कंपनी को ये ठेका मिलेगा, उसका खुदा का डेटा सेंटर होना चाहिए, लेकिन नियम हटाकर कह दिया गया कि हम थर्ड पार्टी क्लाउड इस्तेमाल करेंगे
इन तमाम नियमों को हटाया गया, जिसके चलते COEMPT कंपनी क्वालीफाई कर गई।
अब बच्चों को रि-इवैल्यूएशन के लिए कुल 2,000 रुपए खर्च करने होंगे। करीब 5 लाख बच्चों ने ���सके लिए अप्लाई किया है, इस तरह ��माई का आंकड़ा 100 करोड़ तक पहुंच गया है।
यानी- गलती कंपनी की, भुगत रहा बच्चा और जेब खाली हो रही माता-पिता की।
मोदी सरकार से रुपया संभल नहीं रहा है. किसी भी वक्त 1 डॉलर = 100 रुपए हो सकता है.
ऐसे में मोदी को अपनी छवि की चिंता सता रही है.
इसलिए RBI से कहकर देश का सोना बिकवा रहे हैं, ताकि रुपया 100 के पार ना चला जाए.
RBI ने करीब 12 बिलियन डॉलर (1.14 लाख करोड़ रुपए) का सोना बेच दिया है, सिर्फ 2 हफ्ते में.
ये सब मोदी की फर्जी छवि को बचाने के लिए किया जा रहा है. हालांकि बहुत देर हो चुकी है और सच सबके सामने है.
मोदी ने भारत की इकॉनोमी को बर्बाद कर दिया है. गिरता रुपया, विदेशी निवेशकों का भारत से बाहर जाना, कंपनियों का बंद होना, रोजगार की मारामारी, ये सब इसके सबूत हैं.. और ये बस शुरुआत है.
मोदी है तो देश बर्बाद है.
इस देश मे कुछ सवाल सिर्फ राहुल गांधी के लिए रिजर्व हैं।
जिनका दायरा, मोहम्मद गोरी लेकर खलजी, बाबर, औरंगजेब, अंग्रेज, नेहरू, इन्दिरा, मनमोहन तक फैला हो सकता है।
●●
राहुल की क्वालिफिकेशन के बारे मे रामचन्द्र गुहा का सवाल, ऐसा ही स्पेशल सवाल है। भारत के 99% नेता, नेता बनने के पहले क्या करते थे, इसकी जानकारी न तो आम लोगो है,
न वे इसकी परवाह करते हैं।
मसलन, बिना कोई अनुभव , बिना कोई चुनाव लड़े, डायरेक्ट शपथ लेकर अनिर्वाचित मुख्यमंत्री बनने के पहले, हमारे प्रधानमंत्री क्या करते थे??
पब्लिक डोमेन में इसकी सूचना शून्य है।
अब भले वे खुद स्वीकार करें, कि वे पढ़े लिख नही पाये, स्टेशन पर चाय बेची, 35 वर्ष भिक्षाटन करते रहे - तो भी इससे किसी को फर्क नही पड़ता।
मगर राहुल के बारे मे जानना है।
गहराई से, और तथ्यपरक जानना है।
और नकारना है।
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दरअसल राहुल से उसकी योग्यता नही पूछी जाती, उन्हें प्रच्छन्न रूप से निर्योग्य घोषित किया जाता है। और निर्योग्यता का एक ही कारण है- गांधी सरनेम के साथ पैदा होना..
और दरअसल यही गुहा जैसो का ऑब्जेक्शन है। वरना तो 5 बार का सांसद, 4 राज्य सरकारो का पॉवर सेंटर, केंद्रीय सरका�� में 10 साल तक निर्णय बदलने की ताकत रखने वाला शख्स.
जिसे विभिन्न संसदीय समितियों में दो दशक का अनुभव हो,
पब्लिक पॉलिसी की पुख्ता समझ हो, कैम्ब्रिज मे पढ़ा हो और और अर्थव्यवस्था की दशा दिशा की बार बार सटीक पूर्वसूचना देता हो, अगर किसी और दल या देश में में 100 सांसद लेकर बैठा होता..
तो उससे यह सवाल करने की हिम्मत किसी मे न होती।
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लेकिन आप राहुल से पूछ सकते है।
क्योकि राहुल से डर नही लगता।
रामचन्द्र गुहा का वह वीडियो हमने देखा है, जिसमे सरकार के विरुद्ध तख्ती लेकर खड़े हो जाने भर से पुलिस उन्हें कुत्तो की तरह घसीटकर ले गई। इसके बाद वे दोबारा सरकार के नाम की तख्ती लेकर चौराहे पर नही गए।
राहुल के नाम की तख्ती सेफ है।
गुहा को पता है।
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और यही "सेफ" फीलिंग राहुल की उपलब्धि है। उसके 20 साल के पोलिटिकल करियर का एसेंस है।
रामचन्द्र गुहा इस देश मे भाजपा/ मोदी की हेजेमनी को राहुल पर थोपते है, तो उनके इतिहासकार होने की समझ पर शक होता है।दरअसल, जो वे स्वीकार करने से बच रहे है, वो यह कि आज देश की राजनीतिक हालात, एक आम चुनावी राजनीति नही, एक कंट्रोल्ड सामाजिक परिवर्तन है।
यह परिवर्तन, मीडिया, ज्युडिशयरी, चुनाव आयोग, ब्यूरोक्रेसी और एजेंसियों के शीर्ष पर कठपुतलियां बिठाकर थोपा गया है। जिसके नीचे जनाक्रोश उबल रहा है।
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इस आक्रोश की प्रतिक्��िया को विस्फोटक, और विध्वंसक होने से बचाने, और गृहयुद्ध समान हालात टालने के लिए किसी भी विपक्ष को बहुत धैर्यवान, सॉफ्ट होने की जरूरत है।
वरना जिस स्ट्रीट फाइट, सँगठनीकरण और आक्रामक राजनीति की अपेक्षा, राम गुहा आज राहुल गांधी से कर रहे है- उसका नतीजा पिछले 1 माह का बंगाल, और 3 साल से मणिपुर देखकर समझ लेना चाहिए।
आप पूरे देश मे ऐसा चाहते हैं???
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गम्भीर इतिहासकार जानता है, कि ऐसी सत्ता अपनी कब्र खुद बड़ी गहरी खोदती है।
मौजूदा दौर उन भावनाओ का एक्सप्रेशन है, जिसे हमारे समाज ने 70 साल तक ऐसे छिपा रखा था रखी थी, जैसे कोई बूढा अपने किशोर उम्र के कुटैव छिपाकर रखता है। बेहयाई को मान्यता मिलते ही वह धारा खुलकर खेल रही है।
लेकिन तमाम धन, ताकत, नंगई और मैनिपुलेशन के बावजूद 37-38% जनसमर्थन उसका पीक था। अब तो आगे सिर्फ ढलान है।
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गुहा हों, या उनकी तरह डेस्परेट दूसरे लोग, जान लें कि हिंदुस्तान की आत्मा इस तरह बहुत देर कुचली नही जा सकती।
इस झँजवात से बाहर निकलने का रास्ता, यह देश जल्द तय करेगा। पर उस उबाल का पथ प्रदर्शक कोई ईमानदार, दूरदर्शी, और नैतिक मूल्यों पर ठहराव रखने वाला ऐसा शख्स होना चाहिए। जो शांति, साहचर्य और मेल मिलाप का चेहरा हो।
इस वक्त, बिलाशक..
वह राहुल है।
●●
इस दौर का बुद्ध है।
जिसे महज राजघराने की पैदाइश की वजह से खारिज कर देना, और खास तरह की प्रतिक्रियाओं की आशा रखना, बौद्धिक नही- बायस्ड होने के लक्षण हैं।
जो राम गुहा कई बार प्रदर्शित कर चुके हैं। उनका फैन होने के नाते उन्हें सप्रेम सलाह है कि वे समाज मे अपनी उम्र औऱ अनुभव का आडम्बर बनाये रखें। भ्रम और खीज की शिकार जुबान को विराम दें।
और मौन की शक्ति महसूस करें।
"घाटे के झूठ" का शोर मचाकर "जनता से लूट" को और बढ़ाना ही, "बीजेपी एंड कंपनी" के महंगे⛽तेल का असली खेल है !
⛔ कच्चे तेल की कीमत में 7 हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट, मगर सस्ते क्रूड ऑयल🔻 पर जनता को नहीं जरा भी राहत !
⛔ कच्चे तेल का दाम लगातार गिर रहा है, इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का रेट करीब 11% तक लुढ़क गया है !
⛔ $110 प्रति बैरल वाला क्रूड ऑयल, अब क़रीब $92 प्रति बैरल तक सस्ता हो गया है...
मगर 12 दिनों के भीतर डीजल और पेट्रोल करीब 🔥7.50 रुपए प्रति लीटर और CNG 🔥₹6 प्रति किलो महंगा करने वाली मोदी सरकार, महा महंगाई से जनता को निचोड़ने में मस्त है !
❓तेल कंपनियों के 'एजेंट' बने पेट्रोलियम मंत्री को कंपनियों के "मुनाफ़े की चिंता" तो खूब भाती है, मगर सस्ते क्रूड ऑयल पर कोई क��छ नहीं बोलता !
❓यही बीजेपी एंड कंपनी का "लूट और मुनाफाखोरी का मास्टरस्ट्रोक" है कि सस्ते कच्चे तेल का "सारा मुनाफा अपनी तिजोरी" में और जरा सा भी महंगे कच्चे तेल का "सारा बोझ जनता की जेब" पर?
👉 ऐसे ही लोगों की आंखों में धूल झोंक कर, तीन सरकारी तेल कंपनियों ने साल भर में ही 77,280 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है, जो पिछले साल के मुनाफ़े से भी 130%🔺ज्यादा है !
👉 इतना ही नहीं, 2022-23 से 2025-26 के बी�� 4 साल में इन्हीं 3 सरकारी तेल कंपनियों (IOC-HPCL-BPCL) ने 2,10,861 करोड़ रुपए का मुनाफा बटोरा है !
👉 हर दिन औसतन ₹1000 करोड़ और 12 साल में क़रीब 43 लाख करोड़ रुपए "मुनाफ़े का पहाड़" भी जनता की जेब और रोज़मर्रा की जरूरतों का दम निकालकर ही भाजपा ने खड़ा किया है !
देश की सरकार के नाम पर "लूट की कंपनी" चलाती आ रही भाजपा, आखिर कब "बेतहाशा महंगाई" और "भीषण आर्थिक तंगी" की आग से जनता को झुलसाती रहेगी?
#PetrolDieselPriceHike 🔥
#FuelLoot 🔥 #Inflation 🔥
Exam Warrior बनाने चले थे… “Deep State Agent” और “Pakistani” होने की तोहमत लगा दी।
17 साल के CBSE परीक्षार्थी हों या NEET के अभ्यर्थी, मोदी सरकार ने देश के युवाओं को अपने भ्रष्टाचार के जाल में फँसाकर, इस देश के Education System को ख़त्म करने की साज़िश रची है।
कभी IITs, IIMs, केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय संस्थान देश की प्रतिभा का निर्माण करते थे।अब भाजपा की लूट के चलते हम एक Board Examination भी ठीक से नहीं करवा पा रहे हैं। ये हालत कर दी है।
कोई संस्था उठाकर देख लिजिए…
▪️UGC को तबाह किया
▪️JNU और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बदले की राजनीति की
▪️NCERT की किताबों से इतिहास ग़ायब किया
▪️युनिवर्सिटी में छात्रों की आवाज़ दबाई और आन्दोलनों का दमन
▪️Vice Chancellors की नियुक्ति में वैचारिक क़ब्ज़ा
▪️90,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद करे
▪️शिक्षा बजट साल दर साल घटाया
जब भी युवा सड़क पर आता है,
Gen Z आवाज़ उठाता है…
तो हर बार उसकी आवाज़ दबाई गई,
उसपर लांछन लगाएं गए,
उन्हें सलाख़ों के पीछे धकेला गया!
भाजपा ने नौकरियाँ दीं नहीं,
भर्ती परीक्षाओं से अपनी जेब भरी,
और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया !!
मैं फिर दोहरा रहा हूँ —
केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफ़ा लीजिए…मोदी जी, तभी युवाओं को असली न्याय मिले��ा।
माफीवीर के कुनबे वाले हम तुम्हें बताएं असली गद्दारी क्या होती है…🔥
• 2020 से LAC पर चीनी कब्जा, गलवान के शहीद, फिर भी “कोई नहीं घुसा” वाला झूठ
• NEET-NET पेपर लीक, लाखों युवाओं का भविष्य चुराकर “विश्वगुरु” ��नने का ढोंग
• अडानी को जंगल भी सौंप दिए — हसदेव अरंड, धिरौली, सिंगरौली में हजारों हेक्टेयर घने जंगल, लाखों पेड़ काटे जा रहे, आदिवासी-वनवासी बेघर, हाथी-वन्यजीवों का घर तबाह
• Adani को हवाईअड्डे, बंदरगाह, सड़कें-रेलवे + अब जंगल भी, देश की संपत्ति और प्रकृति लुटवाना
• महंगाई, बेरोजगारी, किसान-महिला-युवा पर रोज़ की मार, फिर भी “सबका साथ, सबका विकास” का फर्जी नारा
तुम्हारी “गद्दारी” तो रोज़ की है — सत्त��� बचाने के लिए देश और जंगल दोनों बेचना।
राहुल गांधी कम से कम सवाल पूछते हैं, देश-प्रकृति-जनता की चिंता करते हैं।
तुम लोग तो बस पुरानी फिल्में घिसते हो, नया प्रोपगैंडा बनाते हो।
वीडियो में 1962, भोपाल, विभाजन गढ़ो जितना मन करे…
2026 की हकीकत तो ये है कि असली गद्दार वही है जो सत्ता में बैठकर जंगल-जमीन-देश को अडानी को सौंपता है।
पत्रकार एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवा कर जा रहे युवक से सवाल पूछता है कि पेट्रोल बहुत महंगा हो गया है
इससे आपको बहुत दिक्कत हो रही होगी
युवक तपाक से जवाब देते हुए कहता है कि नहीं कोई दिक्कत नहीं हो रही है
पेट्रोल 500 रूपये लीटर हो जाए 1000 रूपये लीटर भी हो जाए तब भी हमें कोई दिक्कत नहीं है
पत्रकार - युवक का टूटा हुआ हेलमेट देखकर कहता है कि पहले 500 रूपये का हेलमेट खरीद लो
युवक शर्म से सिर झुकाते हुए कहता ह�� कि हां खरीद लेंगे
पत्रकार कहता है कि ये टूटा हुआ हेलमेट पहनकर 500 रुपये का पेट्रोल खरीदने की बात कर रहे हैं। इन्हें अंधभक्त कहें या मानसिक रोगी?
आपका नाम अशोक श्रीवास्तव है।
आप DD News के anchor हैं।
DD News कोई private WhatsApp group नहीं है।
यह public broadcaster है, जनता के पैसे से चलता है।
एक छात्र/छात्रा CBSE revaluation में गलत answer sheet मिलने का दावा करता है।
वह proof लगाकर सवाल पूछता है।
लेकिन सिस्टम से जवाब मांगने की जगह कुछ आप और आपको चाहने वाले उसे Pakistani, देशद्रोही और agenda-driven बताने लगते हैं।
बाद में जब किरकिरी होती है तो माफी मांगकर पल्ला झाड़ लेते है।
सवाल आपसे भी है कि ..
क्या अब CBSE से अपनी copy मांगना देशद्रोह है?
क्या answer sheet पर सवाल पूछना Pakistan का एजेंडा है?
क्या हर छात्र जो सिस्टम की गलती दिखाए, उसे anti-national घोषित कर दिया जाएगा?
Anchor का काम सरकार की नाकामी पर सवाल पूछना होता है,
छात्रों को troll narrative में धकेलना नहीं।
अब CBSE ने अपनी गलती मान ली है और result भी अपडेट कर दिया है।
लेकिन आप बताइए कि आपके मंसूबे क्या थे क्यों बच्चों के भविष्य की समस्या को Pakistan और देशद्रोह के पीछे छिपा रहे थे ?
छात्र copy मांग रहा है।
System जवाब नहीं दे रहा।
और कुछ लोग patriotism का certificate बांट रहे हैं।
यह पत्रकारिता नहीं, सत्ता की PR duty लगती है।
◆ राहुल गांधी के बयान से तूफ़ान आ चुका है..रायबरेली में राहुल गांधी ने बयान दिया है कि
👉 नरेन्दर मोदी, पूर्व तड़ीपार अमित बाबा और आरएसएस ग़द्दार है.."ओवर द बाउंड्री"
◆ राहुल गांधी के इस बयान से इतना "छुई मुई" होने की कोई ज़रूरत नहीं है..क्योंकि भजपैया गैंग ने
~ देश के पहले PM नेहरूजी को ग़द्दार बोला
~ PM इंदिरा गांधी को ग़द्दार बोला
~ PM राजीव गांधी को ग़द्दार बोला
~ PM डॉ मनमोहन सिंह को ग़द्दार बोला
~ गांधी परिवार को ग़द्दार बोला
~ कांग्रेस को ग़द्दार बोला
◆ अगर पंडित नेहरू ग़द्दार हो सकते हैं तो ��ेश के किस नेता की तशरीफ़ पर पैदाइशी वफ़ादार होने का ठप्पा लगा है? तशरीफ़ खोल कर वफ़ादारी का ठप्पा दिखाओ तो मान लेंगे!!
◆ अगर पंडित नेहरू ग़द्दार तो पूरा भारत ग़द्दार!! अगर डॉ मनमोहन सिंह ग़द्दार तो दुनिया में वफ़ादारी ख़त्म!!
◆ अगर इंदिराजी और राजीवजी की क़ुरबनियां ग़द्दारी थी तो देश में किसी ने क़ुरबानी नहीं दी..
◆ अगर कांग्रेस ग़द्दार है तो अटल और आडवानी की तरह जिन्नाह की मज़ार पर चले जाओ औ��� कभी भारत वापस मत लौटना..गेट आउट
~ ग़द्दारी का 'आलम यह है कि रूस से स��्ता कच्चा तेल भारत आया था..
~ इस कच्चे तेल से मुकेश अंबानी ने 50,000 करोड़ कमाए..ये कमाई सरकारी कंपनियों का हक़ थी
~ और मोदी कहता है कि ये मत ख़रीद, वो मत इस्तेमाल कर, वहां घूमने मत जा, वो चीज़ नहीं खाना : यही देशभक्ति है..ये फ्रॉड है!!
◆ मुकेश अंबानी तो 50,000 करोड़ कमाएगा और 140 करोड़ भारतीय भूके रह कर देशभक्ति साबित करेंगे? लानत है ऐसी देशभक्ति पर..
◆ ग़द्दार उद्योगपतियों का गैंग लाखों करोड़ विदेशों में रख��� है..₹ गिरने की वजह से उद्योगपतियों को ज़बरदस्त मुनाफ़ा' हुआ है..मगर हर भारतीय 2014 से ग़रीब होता रहा
◆ राहुल गांधी आंखों में खटकते हैं, उन की बातें कानों को सुकून नहीं देती..क्योंकि राहुल गांधी भारत की तरक़्क़ी पर बोलते हैं..
◆ 2014 के बा'द से 'अवाम को ख़ुद का होश नहीं रहा है..जब तक पाकिस्तान, मुसलमान, चीन पर फ़र्ज़ी ख़बरों का डोज़ नहीं मिले तब तक बेचैनी बरक़रार रहती है
✋ इस बयान ��े बा'द राहुल गांधी पर 50 FIR होगी..मीडिया को नेहरूजी और कांग्रेस को गाली देने का नया प्रॉजेक्ट दिया जाएगा..जनता को नशे का तगड़ा डोज़ मिलेगा
✌️ राहुल गांधी की सियासत एक "नशा मुक्ति केंद्र" जैसी है..'अवाम का नशा टूट कर रहेगा..भारत वापस तरक़्क़ी की राह पर होगा..जय हिंद
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#भारतजोड़ोन्याययात्रा
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NEET पेपर लीक के मामले में हुईं गिरफ्तारी पर आम जनता बोल रही है, पर
आईटी सेल चुप है
मीडिया चुप है
बीजेपी के नेता चुप हैँ.
क्योंकि पकड़ा गया आरोपी दिनेश बिंवाल और उसका भाई मांगीराम बिंवाल बीजेपी से जुड़े हैँ
2017 में ये आरोपी व���ुंधरा राजे से मिला
2019 में ये आरोपी राज्यवर्धन राठौर से मिला
2023 में ये आरोपी किरोड़ीमल जी से मिला
2025 में ये आरोपी शिक्षा मंत्री से मिला
राजस्थान के इस बीजेपी नेता के तार गुरुग्राम के डॉक्टर से मिले हैँ
जहाँ से इसने 30 लाख में पेपर खरीद कर छात्रों और इनके पेरेंट्स को बेचा
मात्र 30 लाख रूपये में 30 लाख बच्चों का भविष्य बेच दिया किसी ने.
य�� बात आपको मीडिया और आईटी सेल नहीं बताएगी