@hanumanbeniwal 🙏🏻💐🙏🏻
आप हर पीड़ि�� शोषित कि आवाज बुलंद करते हो इसी तरह शिक्षा विभाग और अन्य जगह पिछले 15-20वर्षों से संविदा का दंश झेल रहे संविदा कर्मियों कि आवाज बुलंद करने कि कृपा कर अनुग्रहित करावें
धन्यवाद
तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए कैबिनेट बैठक से नियमितीकरण की मंजूरी देकर विभागों से नियमित पदों का सृजन ग्रेडपे सहित प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी कर दी गयी थी,
परन्तु वर्तमान सरकार ने इन स्वीकृति पर अभी तक अमल नहीं कर पाई!
सरकार से उम्मीद की किरण अब कम है!
राजस्थान सरकार के इशारे पर RPSC द्वारा 2.21 लाख युवाओं के सपनों के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया,RPSC ने कल से होने वाली SI भर्ती को लेकर जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई वो उचित नहीं थी | मेरा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से प्रश्न है कि जब तीसरे चरण में सभी को मौका दिया जा सकता था, तो बिना समाधान के RPSC की आखिरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की क्या मजबूरी थी ? क्या सरकार की नजरों में युवाओं की मेहनत, उनके समय और उनके भविष्य की कोई कीमत नहीं है ? स्वयं मुख्यमंत्री जी को जवाब देना चाहिए कि आखिर लाखों अभ्यर्थियों को इस स्थिति में क्यों धकेला गया ?
@RajCMO
डग विधानसभा विधायक कालूराम वर्मा ने संविदा रूल्स 2022 के तहत चिकित्सा विभाग NHM मे कार्यरत संविदाकर्मियो के नियमितिकरण का मुद्दा उठाया और सरकार से मांग की सीएसआर रूल्स के तहत सर्जित नियमित पदो पर अतिशीघ्र नियुक्ति प्रदान करे @RajCMO@GajendraKhimsar#EducationNagari
@RajCMO@ashokgehlot51@VasundharaBJP@BhajanlalBjp CM साहब संविदा कर्मियों का भला कर दीजिये नियमितीकरण करवा दीजिये, कांग्रेस वालों ने नहीं किया अब बातें कर रहे है, आपसे उम्मीद है आपही नियमित करोगे
1 लाख संविदाकर्मियों को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में :
भैया 1 लाख से अधिक लोग थे संविदाकर्मी, आप बताइए क्या बीत रही होगी ��नके परिवार वालों पर ? 1 लाख से अधिक थे वो संविदाकर्मी उनको हम ने फैसला किया इनको परमानेंट करेंगे, रास्ता निकाल दिया, कैबिनेट में फैसला कर दिया, कोई चर्चा ही नहीं हो रही है उसके ऊपर। ठेकेदारी प्रथा वालों को भी हम चाहते थे वो भी परमानेंट हों कभी न कभी, रास्ता निकाल रहे थे उनके लिए भी, सरकार को चिंता ही नहीं है, क्या करें इस सरकार का ? क्या करें बताओ ?
मीडिया द्वारा कहने कि सरकार और ब्यूरोक्रेसी में क��ीं न कहीं तालमेल नहीं है :
अब ये तो पता नहीं क्या क्या तालमेल है कि नहीं है वो तो वो जाने पर स्थिति अच्छी नहीं है ।
1 लाख संविदाकर्मियों को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में :
भैया 1 लाख से अधिक लोग थे संविदाकर्मी, आप बताइए क्या बीत रही होगी इनके परिवार वालों पर ? 1 लाख से अधिक थे वो संविदाकर्मी उनको हम ने फैसला किया इनको परमानेंट करें��े, रास्ता निकाल दिया, कैबिनेट में फैसला कर दिया, कोई चर्चा ही नहीं हो रही है उसके ऊपर। ठेकेदारी प्रथा वालों को भी हम चाहते थे वो भी परमानेंट हों कभी न कभी, रास्ता निकाल रहे थे उनके लिए भी, सरकार को चिंता ही नहीं है, क्या करें इस सरकार का ? क्या करें बताओ ?
मीडिया द्वारा कहने कि सरकार और ब्यूरोक्रेसी में कहीं न कहीं तालमेल नहीं है :
अब ये तो पता नहीं क्या क्या तालमेल है कि नहीं है वो तो वो जाने पर स्थ���ति अच्छी नहीं है ।
बांसवाड़ा दैनिक भास्कर कि यह खबर सरकारों कि आँख खोलने के लिए पर्याप्त है परन्तु उनकी आँख खुलती ही नहीं एक तरफ जिनका पेट भरा है परमानेंट सरकारी नौकरी वाले सरकारें उनके महंगाई भत्ते बढ़ाती रहती है, सही है सरकारें कोई भी BjP कांग्रेस सिक्के के दो पहलू है @BhajanlalBjp@ashokgehlot51