PTI भर्ती एग्जाम 13 सितंबर को नहीं हो पाएगा।
अर्थना में रूल्स से संबंधित कुछ क्लैरिफिकेशन के बाद ही विज्ञप्ति निकलेगी। इसलिए ये परीक्षा 2026 में आयोजित नहीं होगी।
अब एग्जाम अप्रैल 2027 में प्रयास करेंगे!
फ्रेश फिक्स डेट अर्थना में रूल्स क्लैरिटी आने के बाद।
राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आदरणीय दीपेन्द्र सिंह जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, खुशहाल एवं दीर्घायु जीवन की कामना करता हूँ।
@BalenduSinghINC
राहुल गांधी : धूप, धूल और लोकतंत्र में धीरे-धीरे खुलती हुई एक शख्सियत
आज राहुल गांधी का जन्मदिन है।
भारतीय राजनीति में वे उन दुर्लभ चेहरों में हैं, जिन्हें उनके विरोधियों ने जितना कार्टून बनाया, जीवन ने उन्हें उतना ही धीरे-धीरे एक गंभीर रेखाचित्र में बदल दिया।
वे किसी तैयार सिंहासन के राजकुमार से अधिक उस व्यक्ति की तरह दिखते हैं, जिसे इतिहास ने बहुत जल्दी शोक, सुरक्षा, अकेलेपन और सार्वजनिक अपमान की पाठशाला में बैठा दिया था।
राहुल गांधी के बारे में दस बातें ऐसी हैं, जिन्हें लोग अक्सर नहीं जानते या गंभीरता से नहीं पढ़ते।
पहली, उनकी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबा स्कूल और फिर देहरादून के दून स्कूल में हुई।
दूसरी, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें और प्रियंका गांधी को घर पर पढ़ाया गया।
तीसरी, वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज में भी रहे।
चौथी, वे हार्वर्ड गए, लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा के कारण अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित रोलिंस कॉलेज में शिफ्ट हुए।
पाँचवीं, उन्होंने 1994 में स्नातक की डिग्री ली।
छठी, 1995 में ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज से डेवलपमेंट स्टडीज़ में एमफिल किया।
सातवीं, राजनीति में आने से पहले वे लंदन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मॉनिटर ग्रुप में काम कर चुके हैं।
आठवीं, भारत लौटकर उन्होंने मुंबई में बैकऑप्स सर्विसेज नाम की टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग कंपनी शुरू की।
नौवीं, वे आइकिडो में ब्लैक बेल्ट हैं—यानी उनकी राजनीति में जो संयम दिखता है, उसके पीछे शरीर और मन की एक अनुशासित साधना भी है।
दसवीं, वे स्कूबा और फ्री-डाइविंग के शौकीन हैं; पानी की गहराई में उतरना शायद उन्हें भीड़ के शोर से बाहर अपना मौन देता होगा।
राहुल गांधी की खास बात यह है कि वे अब केवल एक परिवार के उत्तराधिकारी नहीं रह गए। भारत जोड़ो यात्रा के बाद वे उन पैरों वाले नेता बने हैं, जो सड़क की धूल से अपनी भाषा बनाते हैं। कोटा में छात्रों के बीच खड़े होकर जब वे शिक्षा-व्यवस्था की निर्ममता पर बोलते हैं, तो लगता है कि यह आदमी अपनी निजी त्रासदी से आगे बढ़कर अब सार्वजनिक पीड़ा की भाषा सीख चुका है।
उन्हें जन्मदिन की असीम शुभकामनाएँ।
@RahulGandhi
देश के युवाओं व किसानों की आवाज, लोकसभा में नेता विपक्ष, जननायक श्री राहुल गांधी जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
सामाजिक न्याय और समानता के लिए जनसंघर्ष एवं जनसेवा के प्रति आपका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।
#happybirthdayraga@RahulGandhi
पांचना बांध के मुद्दे सभी पक्षों से वार्ता कर समाधान निकाले सरकार, हाईकोर्ट के निर्णय का हो सम्मान: पायलट
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा है कि पांचना बांध विवाद के समाधान के लिए राज्य सरकार को तत्काल पहल करते हुए सभी पक्षों से संवाद स्थापित करना चाहिए तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की पालना सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पानी सभी की आवश्यकता है और किसी भी परिस्थिति में तनाव तथा भाईचारे में खटास की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। पायलट ने कहा कि लंबे समय से पांचना बांध को लेकर आंदोलन चल रहा है और इस विषय से जुड़े विभिन्न पक्षों की अपनी-अपनी चिंताएं और मांगें हैं। नदी किनारे स्थित 360 गांवों के किसानों का भी अपना पक्ष है। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी पक्षों को विश्वास में लेकर बातचीत करे और न्यायपालिका के निर्णयों का सम्मान करते हुए समाधान का रास्ता निकाले।
@SachinPilot
छात्रों और युवाओं के हक, सम्मान और अधिकार की आवाज़ को बुलंद करने के लिए आज कोटा में नेता प्रतिपक्ष @RahulGandhi जी का स्वागत किया।
आज शाम राहुल जी छात्रों से मुलाकात कर पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर उनसे महत्वपूर्ण चर्चा और संवाद करेंगे।
कोटा से चालू हुआ यह संवाद देशव्यापी है। छात्रों के भविष्य को सुरक्षित और मज़बूत बनाने के उद्देश्य से राहुल जी ने यह महत्वपूर्ण पहल की है।
#ChhatronKiGoonj
@GovindDotasra@TikaRamJullyINC@ashokgehlot51@INCIndia@INCRajasthan
किसान हितों के प्रखर प्रहरी, जनप्रिय नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री Rajesh Pilot जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन। 🙏
ग्रामीण भारत, किसानों और आमजन के उत्थान के लिए उनका समर्पण, संघर्ष और जनसेवा का भाव सदैव स्मरणीय रहेगा।
एक वाक्य से सचिन पायलट ने अपना राजनीतिक कद बड़ा कर लिया
यह कहकर कि “अशोक गहलोत मेरे प्रति अपने बेटे वैभव जैसा स्नेह रखते हैं,” सचिन पायलट ने केवल एक विनम्र उत्तर नहीं दिया; उन्होंने राजस्थान की कटु, थकी हुई और वर्षों से आपसी आक्षेपों में उलझी राजनीति के ऊपर स्वयं को उठा लिया। यह ऐसा उत्तर है, जिसकी आलोचना कोई राजनीतिक शत्रु भी सहजता से नहीं कर सकता। इसमें न पलटवार है, न व्यंग्य, न प्रतिशोध; लेकिन इसका नैतिक प्रभाव किसी तीखे प्रत्युत्तर से कहीं अधिक है।
अशोक गहलोत का राजनीतिक कद कभी इतना ऊँचा था कि राजस्थान की नई पीढ़ी जयनारायण व्यास और मोहनलाल सुखाड़िया जैसे दिग्गजों के बाद उन्हें ही प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा संदर्भ मानने लगी थी। उनकी सादगी, प्रशासनिक चतुराई, सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि और जनसंपर्क ने उन्हें असाधारण प्रतिष्ठा दी। लेकिन जाने वह कौन-सी आंतरिक व्यग्रता थी, जिसके कारण सचिन पायलट को लेकर उनके मुख से समय-समय पर निकले शब्द उनकी अपनी निर्मित छवि के प्रतिकूल जाते रहे। बड़े व्यक्ति के शब्द भी बड़े होने चाहिए; क्योंकि ऊँचाई से गिरा हुआ एक वाक्य नीचे बहुत दूर तक सुनाई देता है।
मुझे सचिन पायलट से इस प्रकार के उत्तर की अपेक्षा नहीं थी। यही लग रहा था कि वे अशोक गहलोत पर बहुत तीखा वार और प्रहार करेंगे; उन्होंने शिकायतों की गठरी खोलने, पुराने अपमान गिनाने या राजनीतिक हिसाब बराबर करने के बजाय रिश्ते की एक ऐसी भाषा चुनी, जिसने उनकी गरिमा को अचानक बहुत विस्तृत कर दिया। उन्होंने प्रतिद्वंद्विता को पुत्रवत स्नेह की व्याख्या में बदल दिया और अपने सामने रखे विष को जैसे शिष्टता से अमृत-पात्र के किनारे रख दिया।
ऐसे क्षण राजनीति में कभी-कभी “नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार” की तरह आते हैं; जब लंबे अँधेरे के बाद किसी के पदचिह्न ही रोशनी का भरोसा बन जाते हैं। पायलट का यह उत्तर भी उसी तरह का एक उजाला है।
राजनीति में बड़ा वही नहीं होता, जिसे बड़ा पद मिले। बड़ा वह होता है, जो अपमान का उत्तर अपमान से न देकर अपने आचरण से विरोधी को भी उसकी पुरानी गरिमा याद दिला दे। इस एक वाक्य से सचिन पायलट ने अशोक गहलोत को छोटा नहीं किया; उन्होंने स्वयं को बड़ा बनाया है।इससे अशोक गहलोत भी बड़े ही होते हैं। मशहूर पाकिस्तानी शायर और महान भाषाविद हनीफ़ फ़ौक़ ने जैसे इन्हीं लम्हों के लिए कहा था:
उदास रातों की तीरगी में न कोई तारा न कोई जुगनू
किसी का नक़्श-ए-क़दम ही चमके तो नूर का ए'तिबार आए
पूर्व केंद्रीय मंत्री, किसान नेता स्व. #RajeshPilot जी की पुण्यतिथि पर दौसा में आयोजित “प्रेरणा दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा” में सम्मिलित होकर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
राजेश पायलट जी का सम्पूर्ण जीवन किसानों, युवाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ बनकर जनसेवा को समर्पित रहा। उनकी सादगी, निडरता और जनहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उनके आदर्श, विचार और संघर्ष हमें समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा जनसेवा के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहेंगे।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🌹🙏
#RajeshPilot #PrernaDiwas #Dausa #Tribute #राजेश_पायलट_अमर_रहे @SachinPilot
राजेश पायलट: मिट्टी से उठकर राजनीति के आकाश में चमका एक नक्षत्र
राजेश पायलट।
कल्पना कीजिए, सफ़ेद बालों, उसी दृढ़ चेहरे और किसान-जवान के प्रश्नों पर गरजती हुई आवाज़ के साथ वे आज की राजनीति को किस निगाह से देख रहे होते! उस राजनीति को, जिसमें साधनहीन प्रतिभाओं के लिए दरवाज़े संकरे और धन, वंश तथा चाटुकारिता के लिए राजमार्ग चौड़े होते जा रहे हैं।
राजेश पायलट का मूल नाम राजेश्वर प्रसाद था। अत्यंत साधारण और अभावग्रस्त पशुपालक परिवार में पले इस मेधावी युवक ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज तक अपनी राह बनाई। वह कॉलेज, जहाँ से निर्मल वर्मा, सुचेता कृपलानी, गोपालकृष्ण गांधी, राजमोहन गांधी, गोपीचंद नारंग, अमिताव घोष और रामचंद्र गुहा जैसी विलक्षण प्रतिभाएँ निकलीं। राजेश्वर प्रसाद का वहाँ पहुँचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं था; वह उस ग्रामीण भारत की विजय थी, जिसके बच्चों के पाँव में धूल अधिक और अवसर बहुत कम होते हैं।
उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की, लेकिन आकाश में उड़ते हुए भी उनकी दृष्टि नीचे खेतों पर टिकी रही। किसानों की बदहाली ने उनके भीतर यह प्रश्न जगाया कि इस जीवन में ही इन परिस्थितियों को बदलने का रास्ता क्या है। उन्हें उत्तर राजनीति में दिखाई दिया। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक नौकरी छोड़कर उस अनिश्चित संसार में प्रवेश किया, जहाँ प्रतिभा से अधिक खेमे, षड्यंत्र और विरासतें काम करती हैं।
वे बागपत से चौधरी चरणसिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट नहीं मिला। निराशा के उसी क्षण संजय गांधी ने उन्हें भरतपुर से चुनाव लड़ने भेजा। भरतपुर उनके लिए अपरिचित था। जयपुर में प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया; उनके नामांकन में त्रुटियाँ छोड़कर रास्ता रोकने तक के प्रयास हुए। लेकिन आम कार्यकर्ताओं और जनता ने उस अनजान युवक में अपना भविष्य देखा। राजेश्वर प्रसाद, राजेश पायलट बनकर उभरे और राजस्थान की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित हुई।
भरतपुर से शुरू हुई उनकी यात्रा दौसा पहुँची। वे 1991, 1996, 1998 और 1999 में लगातार लोकसभा पहुँचे। तूफ़ानों से लड़ते, गिरते और फिर उठते हुए उन्होंने स्वयं को मिट्टी से सोना निकालने और इस्पात मोड़ने वाली शख़्सियत सिद्ध किया। उनमें किसान की सरलता, सैनिक का अनुशासन और लोकतांत्रिक नेता का साहस था।
राजेश पायलट को किसान और जवान से गहरा प्रेम था। वे उस संस्कृति से निकले थे, जिसमें गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, परिवार की सदस्य होती है; जिसमें गोधूलि कोई काव्यात्मक शब्द नहीं, श्रम, पशुधन और ग्रामीण जीवन की साँस होती है। इसीलिए उनकी राजनीति में खेत की गंध और साधारण मनुष्य की पीड़ा थी।
11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना ने उस यात्रा को अचानक रोक दिया। वे अपनी राजनीति को उसके अंतिम गंतव्य तक पहुँचाने से पहले चले गए। राजस्थान की लोकतांत्रिक राजनीति को मिले श्रेष्ठ नेताओं में राजेश पायलट का स्थान सदैव विशिष्ट रहेगा।
केदारनाथ अग्रवाल की पंक्तियों के साथ उस दमकते नक्षत्र को असीम प्रणाम :
“हम जिएँ न जिएँ दोस्त, तुम जियो
एक नौजवान की तरह,
खेत में झूम रहे धान की तरह,
मौत को मार रहे बाण की तरह।”
#RajeshPilot #SachinPilot
किसान नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री राजेश पायलट जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन।
लोकसेवा के प्रति उनकी निष्ठा और जनसरोकारों के लिए उनका संघर्ष सदैव प्रेरणादायक रहेगा।
- मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू