@KraantiKumar बड़े लोगों की गलती कौन देखता हैं? छोटा मोटा निर्देशक ही अश्लीलता का आरोप झेलता है उसकी फ़िल्म पर सैंसर की कैंची चलती है । समर्थ को दोष ना गोसाई
चढ़ावा क्या सिर्फ़ राम मंदिर का ही चोरी हुआ होगा? चोरों की नज़र तो हर मंदिर के ख़ज़ाने पर होगी!
सभी बड़े मंदिरों की जाँच होनी चाहिए ताकि चोरों को सबक़ मिल सके.
क्या पेपर लीक करने वालों को फाँसी दी जाएगी और उनके घर पर बुलडोज़र चलाया जाएगा? यदि सरकार यह घोषणा कर दें तो आधी समस्या तो अपनेआप समाप्त हो जाएगी । टेलिग्राम बेन करना समस्या का समाधान नहीं । जितने पेपर लीक हुए उसकी रिपोर्ट पर काम होना चाहिए । बाकी सरकार चाहे तो पेपर लीक नहीं होगा
@dietmotibagh analyzed the performance of district south on the basis of #PARAKH (NAS) Which covered 77 schools, 2856 students of district south Delhi.
A comprehensive program is being prepared to improve the overall performance of students.
#ABSS2025#5YearsOfNEP2020
नफरती चिंटू तिल का ताड़ बनाकर सच्चे देशभक्त @zoo_bear को परेशान करने में लगें हुए हैँ... लिखिए, रिपोस्ट कीजिये,
पोस्ट कीजिये.. पर साथ जरूर दीजिये.
#IStandWithZubair
@ScienceJourney2 जिनके थोड़े फ़ॉलोवर्स है उनके जाते नही, जिनके ज़्यादा है वो तुम्हारे मंच पर आते नही । जनता को सही डीबेट देखने को मिलती नही । वो अपने मंच में मस्त आप अपने मंच पर ।
जरा सोचे कोई मंदिर में नमाज़ पढ़ सकता है?
मस्जिद में कोई हवन यज्ञ कर सकता है?
चर्च में कोई नमाज़ या यज्ञ हवन कर सकता है?
आपका जवाब होगा नहीं
#BTact1949_Repeal
तो फिर सोचे बुद्ध के सबसे पवित्र स्थान महाबोधि महाविहार में ब्राह्मणों पंडों के कर्मकांड पूजा पद्दति का क्या काम?
सिर्फ भिक्खू लोगो को ही पता है बुद्ध की शिक्षाये क्या है मैडिटेशन कैसे किया जा सकता है क्योकि जिसका जो धर्मस्थल है उसके अनुवायीयों को ही पता है की कैसे उनके आराध्य की उपासना करनी है ।
क्या किसी भी हिंदू मंदिर में भिक्खू को ट्रस्ट मेम्बर बनाया गया है?
अगर नहीं तो बुद्ध के सबसे पवित्र स्थान महाबोधि ट्रस्ट में ग़ैर बुद्धिस्ट यानी ब्राह्मण हिंदू क्यो?
BT act 1949 बनाकर बुद्ध के सबसे पवित्र स्थान महाबोधि ट्रस्ट के 9 ट्रस्ट मेंबर्स में 5 ग़ैर बुद्धिस्ट यानी हिंदू ब्राह्मण की घुसपैठ करायी गई है ।
चुकी भारतीय संविधान 26 Jan 1950 में लागू हुआ इस हिसाब से यह एक्ट निरस्त कर बुद्ध की विरासत बुद्धिज्म को सौप देनी चाहिए थी जो अब तक नहीं हुआ है ।
ऐसे में बिहार सरकार, केंद्र सरकार को चाहिए की BT act 1949 को निरस्त कर बौद्ध लोगो को उनका हक सम्मान वापस करे ।
#BTact1949_Repeal
खिलजी ने नालंदा जलाया ये फेक न्यूज़ आपने जरूर सुनी होगी लेकन क्या ये सुना की खिलजी का वंशज ग्यासुदिन बलवन की चाटुकारिता में ब्राह्मण योगेश्वर ने संस्कृत इंस्क्रिप्शन लिख कर ग्यासुदिन खिलजी की तुलना विष्णु से की।
सोचिए आज मौकापरस्त ब्राह्मण, महाबोधि महाविहार में अवैध घुसपैठ पर वहाँ कर्मकांड कर बुद्ध और बुद्धिज्म का लगातार अपमान कर रहा है। यही नहीं बुद्ध की मूर्तियो को पांडव बता कर सबको गुमराह कर रहा है ।
महाबोधि महाविहार में 9 ट्रस्ट मेंबर्स में 5 मेंबर ग़ैर बुद्धिस्ट यानी ब्राह्मण हिंदू है । अब सोचिए बुद्धिस्ट महाविहार में ग़ैर बुद्धिस्ट का क्या काम ?
#BTact1949_Repeal
सेवा में,
राष्ट्रपति,
राष्ट्रपति भवन, भारत,
नई दिल्ली-110004
विषयः बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद (13, 14, 15, 25, 26, 29, 49 और 51A(f)) का उल्लंघन करने एवं बौद्ध धर्म की विरासत बौद्धों से छीनकर यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्व धरोहर के साथ छेड़छाड़ करने के सम्बन्ध में।
महोदय,
आपको अवगत कराना है कि बोधगया मंदिर अधिनियम-1949, महाबोधि मंदिर के प्रबंधन और नियंत्रण को हिंदू और बौद्ध प्रतिनिधियों के संयुक्त बोर्ड को सौंपता है। इसके तहत 9-सदस्यीय प्रबंधन समिति बनाई गई, जिसमें हिंदू बहुमत (5 हिंदू, 4 बौद्ध) रखा गया। इस समिति के अध्यक्ष हमेशा एक हिंदू ही होते हैं।
महोदय उक्त अधिनियम के कारण हिन्दू बहुल समिति बौद्धों को उनके अधिकारों से वंचित रखती है और यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वधरोहर के साथ छेड़छाड़ कर बौद्ध धर्म के मूल स्वरूप को बदलने का निरन्तर प्रयत्न कर रही है, जिससे बौद्ध धम्म का मूल अस्तित्व खतरे में पड़ता प्रतीत हो रहा है। उक्त अधिनियम संविधान के निम्नलिखत अनुच्छेदों का उलंघन करता हैः-
संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का विश्लेषण:
1- अनुच्छेद 13: मूल अधिकार
अनुच्छेद 13(1) मौलिक अधिकारों के विरुद्ध कोई भी कानून शून्य होगा।
संविधान का अनुच्छेद 13(1) कहता है कि कोई भी कानून जो संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, वह शून्य होगा।
बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 बौद्ध समुदाय के (धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार-अनुच्छेद 25-28) का उल्लंघन करता है क्योंकि यह अधिनियम मंदिर का प्रशासन हिंदू बहुल समिति को देता है, जबकि यह स्थल बौद्ध धर्म का केंद्र है। इस आधार पर यह अधिनियम अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करता है।
2- अनुच्छेद 14: समानता का अधिकार
संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करेगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा।
महाबोधि मंदिर का प्रशासन हिंदू बहुल समिति को देना स्पष्ट भेदभाव है। भारत में किसी भी अन्य धार्मिक स्थल (जैसे हिंदू मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा) का नियंत्रण दूसरे धर्म के हाथों में नहीं है, लेकिन बौद्धों के सबसे पवित्र स्थल को हिंदू बहुल समिति को सौंप दिया गया। यह स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
3- अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध।
अनुच्छेद 15 (1) कहता है कि राज्य धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता। बौद्ध धर्म एक स्वतंत्र धर्म है, लेकिन बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 बौद्धों को उनके ही धार्मिक स्थल से वंचित करता है। अगर अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों का पूरा प्रबंधन उनके समुदाय के पास है तो बौद्धों को यह अधिकार क्यों नहीं? यह अनुच्छेद 15(1) का सीधा उल्लंघन है।
4- अनुच्छेद 25: धर्म की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 25(1) हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। बौद्धों को उनके ही सबसे पवित्र स्थल के प्रबंधन से वंचित करना उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। हिंदू बहुमत वाली समिति मंदिर के संचालन में बौद्ध परंपराओं को सीमित समाप्त कर सकती है। यह अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है।
5- अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 (ख): अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का अधिकार
अनुच्छेद 26 (ख), यह अनुच्छेद सभी धार्मिक समूहों को अपने धार्मिक संस्थानों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने का अधिकार देता है। बौद्ध धर्म एक स्वतंत्र धर्म है, लेकिन बोधगया मंदिर अधिनियम हिंदुओं को महाबोधि मंदिर के प्रबंधन में बहुमत देकर बौद्धों के इस अधिकार का हनन करता है।
अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों (जैसे, हिंदू मंदिर, मस्जिद, चर्च) के प्रशासन पर किसी अन्य धर्म का नियंत्रण नहीं है, फिर महाबोधि मंदिर पर हिंदू बहुमत क्यों? इस आधार पर, यह अधिनियम अनुच्छेद 26 का स्पष्ट उल्लंघन करता है।
6- अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक-वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 29(1): अल्पसंख्यक समुदायों की संस्कृति और धरोहर की रक्षा
अनुच्छेद 29(1) कहता है कि किसी भी समुदाय की संस्कृति, भाषा या धरोहर को संरक्षित किया जाएगा।
महाबोधि मंदिर बौद्ध संस्कृति और धरोहर का सबसे बड़ा प्रतीक है। लेकिन यह मंदिर बौद्धों के नियंत्रण में न देकर उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कमजोर किया जा रहा है। यह अनुच्छेद 29 का उल्लंघन है।
7- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय स्मारकों और धरोहरों की रक्षा
अनुच्छेद 49 कहता है कि सरकार को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की धरोहरों की रक्षा करनी चाहिए। महाबोधि मंदिर एक विश्व धरोहर स्थल (UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त) है, लेकिन इसे बौद्धों से छीनकर हिंदू बहुमत वाली समिति को देना इसके ऐतिहासिक महत्व और बौद्ध पहचान को खतरे में डालता है। इसलिए, यह अधिनियम अनुच्छेद 49 के संरक्षण सिद्धांतों के भी विपरीत है।
8- अनुच्छेद 51A(f): हमारी विरासत को सुरक्षित रखने का मौलिक कर्तव्य
अनुच्छेद 51A(f) कहता है कि हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की समृद्ध विरासत और संस्कृति की रक्षा करे। महाबोधि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि विश्व धरोहर (UNESCO) में शामिल है। इसके प्रशासन में बाहरी हस्तक्षेप इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को खतरे में डालता है।
यह अनुच्छेद 51A(f) के खिलाफ है।
बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949, भारतीय संविधान के कम से कम 8 महत्वपूर्ण अनुच्छेदों (13, 14, 15, 25, 26, 29, 49 और 51A) का उल्लंघन करता है। इन सभी अनुच्छेदों का अध्ययन करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि यह अधिनियम पूरी तरह असंवैधानिक है।
1- यह बौद्धों के धार्मिक अधिकारों का हनन करता है।
2- यह समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
3- यह बौद्ध अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलता है।
4- यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के विरुद्ध जाता है।
5- यह धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थानों के स्वायत्त प्रबंधन को बाधित करता है।
6- यह एक ऐतिहासिक बौद्ध धरोहर को उसकी मूल पहचान से दूर करने की साजिश को बढ़ावा देता है।
अतः महोदय से विनम्र निवेदन है कि विश्व धरोहर बौद्ध विरासत की सुरक्षा के दृष्टिगत प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए इस असंवैधानिक अधिनियम (बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949) को अवैध घोषित कर पूरी तरह निरस्त करते हुए महाबोधि मंदिर का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने के लिए उचित संवैधानिक कार्यवाही करवाते हुए बौद्ध धर्म के अधिकारों को दिलायें और संबन्धित कार्यवाही से अवगत कराने का कष्ट करें।
आपकी महान दया होगी।
भवदीय
(हरीराम राना)
राष्ट्रीय सचिव
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के ब्राह्मण प्रोफेसरों के अद्भुत कारनामें...
पीएचडी की कुल 230 सीटें, जिनमें 122 पर चयन जाति, जनेऊ, जुगाड़, चापलूसी, चाटुकारी, झोलाझापी एवं सिफारिशी प्रक्रिया से युक्त साक्षात्कार के तहत किया गया। इसे विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कुमुद शर्मा जी पारदर्शिता का नाम देती हैं। रिश्ते में वे साहित्य में मानवता की बात करने वाले साहित्यकार अमरकांत की बहू हैं। यह बेहयाई एवं निर्लज्जता वाली पारदर्शिता भारतीय विश्वविद्यालयों के इतिहास में 166 साल पुरानी है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस पारदर्शिता के 100 साल पूरे कर लिए हैं। जब पीएचडी एडमिशन में इतनी जनेऊवादी एवं संघी पारदर्शिता बरती जा रही है तो असिस्टेंट प्रोफेसर के साक्षात्कार में शामिल ब्राह्मण प्रोफेसरों की पारदर्शिता को आप समझ सकते हैं।
शेष 88 सीटों पर चयन लिखित परीक्षा + साक्षात्कार (70+30) के तहत होना था। लेकिन हिंदी विभाग के पीएचडी प्रवेश साक्षात्कार समिति के सभी सदस्य प्रोफेसरों ने 70 अंक की लिखित परीक्षा को महत्वहीन कर दिया, क्योंकि इस परीक्षा में अव्वल रहे टॉप-20 अभ्यर्थियों को पीएचडी में प्रवेश नहीं दिया गया। कारण स्पष्ट है कि पढ़ने-लिखने वाले विद्यार्थी प्रोफेसरों की गुलामी, नौकरी, जी-हुजूरी, चापलूसी एवं ख़ुशामद नहीं करते हैं। इसीलिए वे लिखित परीक्षा में टॉप करते हैं लेकिन साक्षात्कार में फेल किये जाते हैं। अर्थात इस प्रक्रिया में भी चयन उपर्युक्त प्रक्रिया के तहत ही मनमानी पूर्वक किया गया। हालाँकि लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक लाना या परीक्षा पास करना जरूरी माना गया। अतः स्पष्ट है कि लिखित परीक्षा की कोई स्पष्ट कट-ऑफ नहीं बनाई गई, जो यह दिखाए कि फला अभ्यर्थी कितना अंक साक्षात्कार में पाएगा तो उसका चयन हो जाएगा।
अब बात करते हैं, उस प्रोफेसर की, जो अपनी कक्षाओं से लेकर सेमिनारों, संगोष्ठियों एवं पब्लिक प्लेस में साहित्यिक मानवता के साथ-साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात बड़ी चुनी हुई चालाकी एवं समझदारी के साथ करते हैं, उनका नाम है 'प्रोफेसर अपूर्वानंद झा'। अपूर्वानंद जी विभागीय शोध समिति के मुख्य खेवनहार पीएचडी की इन 230 सीटों पर रहे, वे बाहर जो बात करते हैं, अपने आलेख में जो लिखते हैं, उसका एक प्रतिशत भी पालन इस परिणाम में नहीं किये हैं। जब हिंदी विभाग में दलित समाज से आने वाले एक मानवतावादी प्रोफेसर Sheoraj Singh Bechain जी विभागाध्यक्ष थे तब प्रोफेसर अपूर्वानंद पीएचडी एडमिशन की पारदर्शिता को लेकर आलेख लिखे थे, उसमें वे चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे, वे अपने उठाये गए सवालों का भी जवाब इस एडमिशन में नहीं दे पाए हैं।
पीएचडी एडमिशन के लिए नेट के साथ-साथ देश के सभी विश्वविद्यालयों को 100 अंक की लिखित परीक्षा और 20 अंक का साक्षात्कार लेना चाहिए। बाक़ायदा दोनों का परिणाम एवं कट-ऑफ जारी करनी चाहिए। हिंदी साहित्य हमें मानवतावादी होना सिखाता है, उसमें यह अकादमिक हरामखोरी, बेईमानी, धूर्तता, मक्कारी, जालसाज़ी एवं काइयाँपन कहाँ से आ गया?
हाय रे जनेऊ वामपंथ,
तेरी इस दुर्गति को लाल सलाम।
ज्ञान प्रकाश यादव 'ज्ञानार्थी'
28/02/2024
पहली महिला शिक्षिका व असली ज्ञान की दैवी के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ । नकली दैवी को हटा कर असली दैवी को प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सबको प्रयास करना है ।आज का दिन महिलाओं का मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए ।
माता सावित्रीबाई फुले जन्मदिन 03 जनवरी ही भारत में #TeachersDay के रूप में मनाया जाना चाहिए ।
क्योकि आधुनिक भारत में पहला महिला स्कूल खोलने तथा देश के आधी आबादी नारी शिक्षा को आगे बढ़ाने का श्रेय उन्हें ही है के ऐसी प्रेरणा स्रोत माता के जन्मदिन पर सत सत नमन।
#राष्ट्रीय_शिक्षिका_दिवस
#SavitriBaiPhuleJayanti
#SavitribaiPhule
यह वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं, बल्कि ओडिशा का है। जहां भाजपा सांसद प्रताप सारंगी के करीबी द्वारा क्रिसमस मना रही आदिवासी महिलाओं पर जूतों से बेरहमी से हमला किया गया और अभद्र व्यवहार किया गया। यह घटना न केवल आदिवासी महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अत्याचार को उजागर करती है, बल्कि इस बात को भी सामने लाती है कि महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग जैसे संस्थान इस घिनौने कृत्य के खिलाफ चुप्पी साधे हुए हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, जो खुद आदिवासी समुदाय से संबंधित हैं, इस मामले पर कोई ठोस कदम उठाने के बजाय मूकदर्शक बनी हुई हैं। यह बताता है कि उनके अंदर का जमीर कब का मर चुका है। @rashtrapatibhvn@narendramodi@jualoram@MohanMOdisha@RahulGandhi@kharge@India_NHRC@NCWIndia@VijayaRahatkar@ncsthq@hrw@PMOIndia #TribalLivesMatter