एक तरफ सत्ता और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के बच्चे Harvard, University of Pennsylvania और Georgetown जैसी दुनिया की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ में पढ़कर सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
दूसरी तरफ भारत के आम और आदिवासी बच्चे आज भी कीचड़, बारिश और बाढ़ के बीच जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
सवाल सिर्फ शिक्षा का नहीं, बराबर अवसर, सुरक्षा और सम्मान का है।
आखिर इस देश में विकास का हक किसके बच्चों के लिए है?
@yadavakhilesh देश प्रदेश में घटित घटनाओं को देखते हुए अब यह लगने लगा है,कि बीजेपी के अन्दर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
परिस्थितियां नेताओं के हाथ से निकलती जा रही है।
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के पास बहुत ही सीमित विकल्प बचा है।
एक बार फिर से देश में इमरजेंसी लगाए जाने की संभावना प्रबल हो गई है।
सूत्रों के हवाले से आई ये ख़बर बेहद स्वागत योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी हार सामने देखकर, ‘पीडीए’ के दबाव-जवाब में अपने सहयोगी दलों को इधर-उधर छटकने से बचाने के लिए, कुछ चुनावी विशेषज्ञों की सलाह पर निम्न विवरण के अनुसार सीटें देने की योजना पर काम कर रही है :
- आरएलडी : 73 सीटें
- सुभासपा : 39 सीटें
- निषाद पार्टी : 31 सीटें
- अपना दल : 19 सीटें
यूं देखे तो ये एक सराहनीय बात है लेकिन पीडीए की जनसंख्या के अनुपात में ये भी आधे से कम ही है, इसीलिए ये योजना बुरी तरह असफल ही होगी। भाजपा का ये बड़ा प्लान इसलिए भी फ़ेल ही होगा क्योंकि :
- धर्म-धन चुराकर रामघात करनेवाले
- दुखी-माता का अपमान करनेवाले,
- बच्चों पर लाठियाँ चलवानेवाले
- भ्रष्टाचार-महंगाई-बेरोज़गारी बेतहाशा बढ़ानेवाले
- शिक्षा-परीक्षा में महा-घपला करनेवाले
- स्वास्थ्य सेवाओं को बीमार करनेवाले
- बिजली के लिए तड़पानेवाले
- सड़कों और अन्य निर्माणों को जानलेवा बनानेवाले
- चारित्रिक पतन के नये कीर्तिमान बनानेवाले
- झूठे मुक़दमों व फ़ेक एनकाउंटर करनेवाले
- लोगों के घरों-दुकानों पर बुलडोज़र चढ़वानेवाले
- लोगों को पुलिस हिरासत में मरवानेवाले
- प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक बंद शिक्षालय बंद करवानेवाले
- टीचरों से चारा इकट्ठा करवानेवाले
- आशा, आंगनबाड़ी, सहायिका और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर करनेवाले
- व्यापारियों-दुकानदारों-कारोबारियों का अधिकतम मुनाफ़ा घूस में खा जानेवाले
- खिलाड़ियों तक से पैसा खानेवाले
- कलाकारों के यश भारती सम्मान और उनको मिलनेवाली सम्मान राशि समाप्त करनेवाले
- किसान, मज़दूर, मेहनतकश और पेशेवरों व अन्य सभी को उनका हक़-अधिकार न देनेवाले
- अल्पकालिक अग्निवीर लाकर सालों से भर्ती के लिए मेहनत करनेवालों का मनोबल तोड़नेवाले
- विज्ञान और वैज्ञानिकों को मान न देनेवाले
- 69000 जैसी अनेक भर्तियों में आरक्षण मारनेवाले
- देश की संपत्ति बेचनेवाले
- संविधान को बदलने की साज़िश करनेवाले ‘भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों’ को अब जनता पूरी तरह नकार चुकी है और सदैव के लिए विदा करने के लिए बेसब्र है।
जन-जन कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
पेलेट गन चली, इसका हवाला रिपोर्ट्स दे रही हैं। पहले जितेन्द्र सिंह ने सदन में डिनाई किया, फिर इस सरकार ने माना चली, और अब ये फिर से डिनायल करेंगे टीवी पर बैठकर और झूठ बोलेंगे। जिसका आँख गया, जिस लड़की का कान गया, जो एक लड़की वेंटिलेटर पे पहुँची, वो किसके चलते पहुँची?
सारा देश आपसे पूछ रहा है और 30 सेकंड में उसका जवाब मिल सकता है।
क्या पेलेट गन आपके आदेश से चली? अगर वो हाँ कहते हैं, तो वो दोषी हैं, उन्होंने बर्बरता की युवाओं के साथ, उनको रिज़ाइन करना चाहिए। अगर वो कहते हैं नहीं, मेरे आदेश से नहीं चली, तो पेलेट गन किसके आदेश से चली? अगर इस देश का गृह मंत्री जानता ही नहीं है, तो वो बिल्कुल विफल है, ही इज़ इनकॉम्पिटेंट टू बी द होम मिनिस्टर (He is incompetent to be the Home Minister)। दोनों सूरतों में वो उस पोजीशन पर बने रहने लायक ही नहीं हैं।
कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता @SupriyaShrinate 🔥
हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट में SC, ST, OBC की भागीदारी क्यों नही?
आज़ादी से अब तक एक जज ही ST क्यों?
ट्रिब्यूनल गठन के लिए तो सरकार कमेटी बना रही है, इसमें SC,ST,OBC का आरक्षण क्यों नही?
पूंजीपतियों का लाखों करोड़ माफ़ करने वाले NCLT के गठन का अधिकार मोदी जी ने अपने पास क्यों रखा?