जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के समर्थकों द्वारा ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत जैसी अनमोल पुस्तकों द्वारा जहाँ सनातन धर्म का प्रचार किया जा रहा है, तो वहीं मानव को पाखण्ड, अंधविश्वास और अन्य सामाजिक बुराइयों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। देखिये पूरी खबर: https://t.co/mxWM77i6k6
अथ अमल अहारी का अंग | Amal Ahaari Ka Ang | Amargranth Sahib by Sant Rampal Ji Maharaj
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कबीर, कलियुग काल पठाइया, भांग तमाखू फीम।
ज्ञान ध्यान की सुध नहीं, बसैं इन्हौं की सीम।।1।।
कबीर, गऊ जो विष्ठा भख है, बिप्र तमाखू भंग।
शस्त्र बाँधैं षटदर्शनी, ये कलियुग के रंग।।2।।
हम मुहम्मद को सतलोक ले गया। इच्छा रूप वहाँ नहीं रहयो।
उल्ट मुहम्मद महल पठाया, गुज बीरज एक कलमा लाया।।
रोजा, बंग, नमाज दई रे। बिसमिल की नहीं बात कही रे।।
#समाज_सुधारक_संत_रामपालजी
संत रामपाल जी महाराज जी अपने सतज्ञान से दहेज, मृत्युभोज, भ्रूण हत्या, जाति-पाति, छुआछूत, नशे, भ्रष्टाचार आदि बुराइयों को छुड़वाकर स्वच्छ समाज का निर्माण कर रहे हैं।
@SaintRampalJiM
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदी छोड कहाय। सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय ।
जो परमात्मा कबीर जी की शरण में आ जाते है, कबीर परमेश्वर जी की कृपा से चौरासी लाख योनियों में जाने वाले बंधन कट जाते है। #KabirIsGod
सुकृत लागै साधु की, बादि विमुख की जाय।
कै तो तल गाड़ी रहै, के कोय औरे खाय ।।
~ जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी
#satlokashrammundka#KabirisGod
#समाज_सुधारक_संत_रामपालजी
संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायियों के द्वारा अपने गुरु जी द्वारा बताए अद्वितीय ज्ञान से प्रेरित होकर संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संगों के माध्यम से कई रक्तदान शिविर आयोजित हुए हैं।
तहाँ वहाँ जरा-मरण नहीं होई। बहु आनन्द करे सब कोई।
पुष्पक विमान सदा उजियारा। अमृत भोजन करत आहारा।
काया सुन्दर ताहि प्रमाना। उदित हुए जनु षोडस भाना।।
इतनौ एक हंस उजियारा। शोभित ऐसे जानु गगन में तारा।
।। अथ अन्नदेव की आरती छोटी।।
आरती अन्न देव तुम्हारी।
जासे काया पलै हमारी।।
रोटी आदि रू रोटी अन्त।
रोटी ही कूँ गावैं संत।।1।।
रोटी मध्य सिद्ध सब साध।
रोटी देवा अगम अगाध।।
रोटी ही के बाजैं तूर।
रोटी अनंत लोक भरपूर।।2।।