अप्रैल में लोकल चुनाव होने थे। उसका अनाउंसमेंट जनवरी-फरवरी में हो जाना चाहिए था। जनवरी-फरवरी में अनाउंसमेंट क्यों नहीं हुआ?
जनवरी में देश UGC को लेकर उबला हुआ था, और हिंदी पट्टी में ख़ास तौर पर। मामला ताज़ा-ताज़ा था। तो इनको लगा कि अभी करना उचित नहीं रहेगा। कुछ दिन में ये चीज़ें दब जाएँगी, दस-बीस दिन, कितने दिन चल लेगा, उसके बाद हम लोग कर लेंगे।
जिस प्रोफ़ेसर पर आरोप है वो तो आपकी हीं बिरादरी का है तो के जातिवादी दरिंदे किसको कह रही हो। हम सवर्णों को इसमें मत खींचो क्यों कि हमारा इसमें कुछ लेना नहीं है।
महोदय .@Bihar_police कृपया संज्ञान लीजिए।
इस व्यक्ति का नाम छोटू अधिरा है और यह संभवत यूपी बिहार बॉर्डर के आस-पास रहता है।
यह व्यक्ति ब्राह्मण समाज पर अभद्र आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। कृपया इस पर जल्द से जल्द कानूनी कार्यवाही करें। अन्यथा समाज इसका खुलकर विरोध करेगा।
तस्वीर में गिरफ्तार व्यक्ति पत्रकार प्रिंस कुमार यादव है।
इनका गुनाह ये है कि इन्होने 200 लोगों को राशन नहीं मिल रहा था उसकी खबर दिखा दी थी।
अब फर्जी SCSTAct के केस में जेल भेज दिया गया है।
अखिलेश , तेजस्वी और मोदी कब इनकी आवाज उठाएंगे ? प्रिंस भी PDA का हिस्सा है। सुनो👇
In Kanpur, Dalit Hindus are being forcefully converted to Islam. Sonu Jatav says a mazar was erected inside his premises. They didn’t even spare his 10 yo daughter
Where is @BhimArmyChief hiding?
Explosive ground report by @Cawnpore_Journo
I didn’t like Dunkirk. Didn’t like Oppenheimer either. Aravind’s advice to a journalist would be to shoot a better movie on IMAX reels.
Aravind ji, I am a journalist. And whatever I write is not only my job as a journalist but also my dharma. You, or your ilk, can keep your cynicism to yourself.
If we don’t matter, don’t bother writing. I gave you answers to your arrogant, blackmailing and begging questions. You can’t defend, so you change the goalpost.
Define journalism and a journalist’s duty. We can talk from there.
कुछ दिन पहले हमें बहुत सारे NEET स्टूडेंट्स ने कहा कि ओडिशा का केस भी देखें, वहाँ मेडिकल में आरक्षण 20% से सीधा 50% बढ़ा दिया गया है! हमको कॉलेज नहीं मिल पा रहे!
अब जब हम केस लड़ने को तैयार हैं, वो भी मुफ्त में, तो कोई petitioner बनने को सामने नहीं आ रहा!
कमाल ये है कि सबको solution चाहिए लेकिन खुद सामने नहीं आना चाहते!
बिना किसी student petitioner के हम करें भी तो क्या??
अब से कुछ दिन पहले हजारों की संख्या में इक्ट्ठा हो कर सवर्ण समाज के लोगों ने जंतर मंतर पर पहुंच कर यूनिवर्सिटी ग्रैंड कमीशन के नए कानूनों का विरोध किया था |
दुनिया जानती है कि इन कानूनों को लेकर सवर्ण समाज मोदी और भाजपा से नाराज था इसके बाद भी मोदी के लिए या मोदी के परिवार के लिए किसी ने एक अपशब्द नहीं कहा |
लेकिन अब कॉकरोचों की भीड़ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने के बाद अब ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने के लिए जंतर मंतर पहुंच कर मोदी के लिए फिर से गालियां देना शुरू कर चुकी है |
और सवर्णों की जिस भीड़ को दिल्ली पुलिस ने लाठियां मार कर खदेड़ दिया था | आज इन कॉकरोचों के सामने दिल्ली पुलिस की लाठियों कमजोर क्यों पड़ रही है समझ में आया नहीं |
खिलाड़ियों को सिखाने वाले कोच तो आरक्षण से ही आते हैं ना??
वैसे चीन, जापान और साउथ कोरिया में खेल के कोच आरक्षण से नहीं आते!
ना ही खेल का 75 गुना बजट SC/ST welfare पर खर्च होता है!
महोदय, आपने इतना लम्बा आलेख लिखने के स्थान पर केवल यह लिखा होता:
It is all Deep State. Ford Foundation, Rothschild, George Soros। ते ब्ला-ब्ला ते ब्ला…
कोई मैटर नहीं करता अरविन्द जी। नए राम आए हैं देश में, आप दीया जलाइए घर के बाहर। ब्लैकमेलिंग बंद कीजिए। आप जो लिख रहे हैं, वह सब यही पार्टी कर रही है। बकलोल व्यक्ति ही इन पर आँख बंद करेगा:
१. ओडीशा में आरक्षण भाजपा ने बढ़ाया
२. ओपन सीट 40% भाजपा ने की
३. मध्यप्रदेश में 73% आरक्षण के लिए भाजपा लड़ रही है
४. समाजवादी रेवड़ियों के चक्कर में हर राज्य की अर्थव्यवस्था की रेड भाजपा ने मारी है
५. समाज में जातिवाद का घटिया बीज भाजपा ही लगातार बो रही है
६. हिन्दुओं के देवी-देवता पर अंबेदकरवादियों के आक्रमण पर भाजपा ही चुप है
७. भाजपा की हर नीति में GC सबसे अंत में है, या नहीं है
आपको ऐसा क्यों लगता है कि फलाँ पार्टी सत्ता में आ गई तो देश को फूँक देगी और हम देखते रहेंगे? हम भी तो उन पार्टियों को फूँक सकते हैं? 30% जनसंख्या तो हमारी भी है। बस लाख आदमी चाहिए, सब कुछ संभव है।
2000 तिलचट्टों के सामने पैंट उतारने वाली पार्टी किसी को भी ब्लैकमेल करने की स्थिति में नहीं है।
आप वही डीप स्टेट बेचिए, उसका पकौड़ा अच्छा बिकता है।
देश के एकमात्र विधायक डॉ रामेश्वर सिंह जी है
जो कि कठुआ जिले से निर्दलीय विधायक है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अकेले खड़े होकर UGC के नए नियमों का विरोध किया है।
क्या कांग्रेस, भाजपा, सपा के बाकी सवर्ण नेता भी इस तरह से UGC का विरोध कर सकते है?
UP- देवरिया में एक युवती गांव जाने के लिए कनैक्टिंग चौराहे तक अपने दोस्त के साथ आयी. दोस्त लौट गया. वाहन का इंतजार करके वक्त उसका परिचित विकास यादव अपने साथियों के साथ कार में दिखा. लड़की को देखकर लिफ्ट दी. लड़की भी परिचय होने के कारण बैठ गयी. थोड़ी देर में कार लड़की के घर के बजाय दूसरे रास्ते पर मुड़ी तो उसने विरोध किया. लड़की को कार में दबोचा गया तो उसने जोर से चीखना शुरू कर दिया. राहगीरों के पीछा करने पर आरोपी लड़की और गाड़ी को छोड़कर भाग गये.
पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है.
There’s an interesting story about what happened after this article was published.
Dhanya and Chitra, both messaged me separately, telling me that their reporter had cancer and the morning they wrote this copy, they had chemo. The reporter wrote the “real name” in the copy. The editor, who was also unwell, changed without “thinking much” since the editor was also unwell.
Both of them asked me, “imagine how she feels now. She has cancer”.
I asked then how cancer had anything to do with giving a Hindu name to a Muslim rapist - no answer. Just attempts to guilt trip.
I told them to get lost, of course.
Please trace this psycho pervert and give him good lesson before he actually assaults a woman @assampolice@GuwahatiPol
Originally posted here by Gungun Dutta: https://t.co/VD2FvVVGyX
"Vishnu Tiwari is not an outlier. He was one of the many.
There was no need of SC/ST act because PCRA was already there.
When data shows max SC/ST act cases are filed on OBC, how can you group OBC with SC-ST?
Social justice is just votebank politics"
On Timenow with @roypranesh
बिहार के जमुई, समस्तीपुर में लड़कियों से छेड़खानी के बाद अब उसी तरह का मामला यूपी के बदायूं से सामने आया है। 17 सितंबर को एक प्रेमी जोड़ा सिद्धबरोलिया मंदिर के पास गया था।
करीब 7-8 लड़के पहुंच गए। घेर लिया। लड़की से छेड़छाड़ की। उल्टा-सीधा बोलते हुए वीडियो बनाया। लड़के से 1500 रुपए छीन लिया। इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
चूंकि ऐसे मामले इस वक्त ज्यादा चल रहे, इसलिए जैसे ही वीडियो आया पुलिस एक्टिव हो गई। एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा, डीआईजी अजय साहनी घटना स्थल पर पहुंच गए। लड़के-लड़की की पहचान करके उनसे तहरीर ली।
वीडियो के आधार पर लोगों को चिन्हिंत किया गया और तीन आरोपी बेचैन जाटव, छोटे जाटव व सुगेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया। इन तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। बाकी की तलाश जारी है।