नेता वो होता है
जो अपने केबिनेट मेंबर्स, पार्टी अध्यक्ष और तमाम दूसरे सहयोगियों को धकिया कर, कैमरे की जद से बाहर फेंकवा देता है। और खुद स्पॉटलाइट मे..
शेर की तरह अकेला चलता है।
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लेकिन जो युवाओं औऱ महिलाओ को आगे कर, उन्हें ताकत देने के लिए, खुद चुपचाप पीछे खड़ा हो जाता है उसे नेता नहीं,
महज, फैसिलिटेटर समझना चाहिए।
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और 21 वीं सदी के हिंदुस्तान को नेता नहीं,
नई पीढ़ी की क्षमताओं को, चुपचाप पीछे रहकर ताकत देने वाला फैसिलिटेटर ही चाहिए।।
वेल्डन राहुल!!
❤️🥰
आज BJP वालों को पसीना आएगा 🔥
7 बजे @ndtv
7:25 बजे @IndiaToday
पवन खेड़ा जी
जब चीनी की मिठास में खटास घोल दी गई हो,
जब E20 के नाम पर आम आदमी की थाली महंगी कर दी गई हो…
तब सवाल भी तेज होने चाहिए।
देखिए। सुनिए। शेयर कीजिए।
@Pawankheraजी
मने, हमारे मोदीजी, गडकरी, हरदीप पुरी, शिवराज चौहान ये सब दिमाग से पैदल हैं क्या?
देश में कितनी गन्ना पैदा होता है, कितना शकर के लिए जरूरी है, और कितना फालतू है जिसका इथेनॉल बनाया जा सकता है, यह बेसिक कैलकुलेशन तो कोई 5वीं क्लास का बच्चा भी कर लेता!
🙄 🤷
मूर्खता से आपदा बुला ली.
@AchryConfucious है मेरा वतन भी अजब ओ गजब.
जहाँ डरकर माफी मांगने वाले वीर हो गए,
सलवार पहनकर भागने वाले अमीर हो गए,
तड़ीपार वजीर हो गये,
और लाखों का सूट पहनने वाले फकीर हो गए.........😂😂
मेरा भारत महान ♥️🙏
अर्ज़ किया है -
खौफ में है सारा गुलशन, बागबां खामोश है,
होने वाला क्या है अंदाजा लगा कर देख लो.
एक दिन तुम ही कहोगे अंधभक्तों देखना,
चल दिया चुपके से वो झोला उठा कर देख लो....
😭🤣🤣🤦
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ सत्याग्रह कर रहे आदिवासी भाई-बहनों की समस्याएं, मांगें, संघर्ष और आपबीती - उनकी जुबानी।
सालों से सिर्फ़ अपने अधिकारों के लिए अन्याय और अत्याचार सह रहे ये बुंदेलखंड निवासी सम्मान और समर्थन के हक़दार हैं।
आदिवासी भाई-बहनों की इस लड़ाई में, मैं और कांग्रेस उनके साथ हैं।
@RebornManish सही बात है अपनी ये पीढ़ी 30 सेकंड की रील को 9वें सेकंड में ही स्क्रॉल कर देती है,
उसपे ये सत्ताधारी नेता/सरकार जदरदस्ती थोप रहे हैं,
वह कई मिनट का लंबा संस्कृत भाषा में गाया गान है,
जबकि उस संस्कृत भाषा को हम आधुनिकता की दौड़ में 99% भुला चुके है और छोड़ भी चुके है.......✍️
सम्हाला है मैने, बहोत अपने दिल को
जुबां पर तेरा फिर भी नाम आ रहा है..
तो ज़नाब, जवानी के दिन थे। औऱ एक सड़ीयल मूवी का शानदार गीत दिल, हमारे दिल मे उतर गया। कारण एक ही था..
या कहें कि थी-
सोनाली बेंद्रे।
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नयनाभिराम सोनाली के सभी शानदार गीत किसी भयंकर चमन किस्म के हीरो के साथ है। वही याद कर लीजिये - ए नाजनी सुनो ना..
काली ड्रेस मे परी जैसी सोनाली जी, मादकता छलका रही हैं। उसके साथ कोई उल्लू किस्म का छोरा भी नाच रहा है।
संभव है यह कथन, मेरे मन मे उस व्यक्ति के प्रति ईर्ष्या से उपजा हो, मगर कसम सोनाली क़ी,
आजीवन मुझे यही लगता रहा कि सोनाली अगर इस चमन बहार से रोमांस कर सकती है, तो हम का ही बुरे हैं??
फुल पॉसिबल्टी है भाई!!
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योग्यता का आत्मभाव औऱ मजबूत हुआ, ज़ब हमने नाराज नाम क़ी मूवी का वह गीत देखा, जिसमे वह अपनी घनेरी फहराती जुल्फों को बिखराये, किसी परम झंडू हीरो को निहार रही है, फुदकती हुई 🥰 फिर रही हैं,
औऱ वह गाता है -
ये जुल्फों के बादल, घनेरे घनेरे
मेरे बाजुओं पर जो तूने बिखेरे
मै समझा क़ी जैसे मेरी धड़कनो को
तेरी धड़कनो का पयाम आ रहा है
कसम सोनाली क़ी, हमें अपने ही कंधे पर वे जुल्फें सरकती महसूस होती। औऱ तब पता ही न चलता की 3 अंतरो औऱ 8+ मिनट का वह अंतहीन गाना कब खत्म हो गया।
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लम्बे गीत सुनने के लिए आपके भीतर, उस गीत से जुड़ा पैशन होना चाहिए। जैसा मेरे हृदय मे सोनाली के प्रति है। लेकिन जहां तक राष्ट्रगीत /राष्ट्रगान का सवाल है..
वह छोटे होने चाहिए।
पचास सेकण्ड से एक मिनट आइडियल है।अमेरिका का नेशनल ऐंथम 1 मिनट 18 सेकंड का है। चीन 44 सेकंड,भारत का जनगण मन - 52 सेकंड, रूस का 1 मिनट 22 सेकंड जापान लगभग 55 सेकंड का है।
इसी तरह जर्मनी 1 मिनट 20 सेकंड ब्रिटेन 1 मिनट 3 सेकंड, फ्रांस 1 मिनट 19 सेकंड, कनाडा 1 मिनट 23 सेकंड बजता है।
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पैशन के मुद्दे पर आप मुझे कम देशभक्त मान लें। लेकिन इसका प्रेक्टिकल परपज भी है।
आपका ऐंथम, इसकी धुन, तमाम सरकारी समारोहो मे बजती है। प्रधानमंत्री या नेताओ के दौरों मे उनके स्वागत मे बजती है। भोज, सम्मान मे मे बजती है।
ओलम्पिक, एशियाड, विश्वकप समारोह मे बजती है। आप गोल्ड जीते तो आपके देश का ऐंथम बजता है। आजकल तो हर सिनेमा घर मे बजता है। अब भले ही आप कोई A सर्टिफिकेट मूवी देखने गए हो।
पहले आप खुद खडे होंगे।
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अब ऐसे मौको पर आप 8-10 मिनट का तक पों पों नहीं बजा सकते। 15-20 मिनट स्कूलों मे असेंबली होती है। पूरा वक़्त उसमे ही नहीं लगा सकते।
हाँ, वैसे आप जबरन लगा भी सकते हैं। आपके पास पॉवर है, बहुमत है,तो जो मर्जी कानून बना सकते हैँ। लेकिन यहीं से आपका इकबाल खत्म होना शुरू हो जाता है।
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सही कानून वह होते हैं जिन्हें इंप्लीमेंट किया जा सके। जो मानव स्वभाव के बहुत प्रतिकूल नहीं जाते हों। और जिसकी मर्यादा को आदमी आसानी से पालन कर सकता है।
जो पीढ़ी 30 सेकंड की रील, 9वें सेकंड में स्क्रॉल कर देती है उससे आप उम्मीद कर रहे हैं कि वह कई मिनट लंबा संस्कृत गान सीखे, गाये।
ना गाने के लिए कितने लोगों को जेल में डालेंगे, या फांसी टांग देंगे?? और यदि कानून इंप्लीमेंटेबल नहीं, तो उसकी अवहेलना शुरू हो जाती है।
तब जिस राजा के कानून की अवहेलना होने लगे, उसका मेयार खुद ही धूल धुसरित होने लगता है।
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लंबे गीत वही अच्छे लगते हैं जिनके साथ प्रेम औऱ खूबसूरती, मधुर संगीत औऱ मन भावन स्मृतियाँ एसोसिएट हो गए हों। यह भाव सिर्फ प्रेम पैदा कर सकता है।
देशभक्ति, ऐंथम, बदला, शक्ति, औऱ प्रचण्ड मस्तकों का झुण्ड नहीं। इस बात से आप प्रकट मे मुझसे असहमति रखें, लेकिन अभी स्वयं प्रयोग करके देखें।
वन्दे मातरम के सभी स्टैंजा, सावधान की मुद्रा मे गाकर देखें। औऱ चैन से बैठकर, कमेंट बॉक्स मे लिंक का चटकारा लगाएं। औऱ उतना ही लम्बा यह गीत साथ साथ गुनगुनायें।
❤️
मित्रों,
सुना है व्हाटसअप यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को जीपीएल फैसिलिटी देकर हकाल दिया गया है?
शहर में सैकड़ों अंधभक्तों और सोसाइटी के अंकिलों ने चूड़ियां और छाती कूट कूट कर रुदाली की है, इसलिए हमें खबर लग गई.
🤣🤣🤣🤷
मित्रों,
इनकम टैक्स का वार्षिक श्राद्ध समारोह संपन्न हुआ। 🤷
मतलब परिवार की पांचों इनकम टैक्स रिटर्न फाइनल हो गईं, सबमिट हो गईं और वेरिफाई हो गईं।
कहीं से तो सुकून मिला। 😇😁
सूत्रों के हवाले से आई ये ख़बर बेहद स्वागत योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी अपनी हार सामने देखकर, ‘पीडीए’ के दबाव-जवाब में अपने सहयोगी दलों को इधर-उधर छटकने से बचाने के लिए, कुछ चुनावी विशेषज्ञों की सलाह पर निम्न विवरण के अनुसार सीटें देने की योजना पर काम कर रही है :
- आरएलडी : 73 सीटें
- सुभासपा : 39 सीटें
- निषाद पार्टी : 31 सीटें
- अपना दल : 19 सीटें
यूं देखे तो ये एक सराहनीय बात है लेकिन पीडीए की जनसंख्या के अनुपात में ये भी आधे से कम ही है, इसीलिए ये योजना बुरी तरह असफल ही होगी। भाजपा का ये बड़ा प्लान इसलिए भी फ़ेल ही होगा क्योंकि :
- धर्म-धन चुराकर रामघात करनेवाले
- दुखी-माता का अपमान करनेवाले,
- बच्चों पर लाठियाँ चलवानेवाले
- भ्रष्टाचार-महंगाई-बेरोज़गारी बेतहाशा बढ़ानेवाले
- शिक्षा-परीक्षा में महा-घपला करनेवाले
- स्वास्थ्य सेवाओं को बीमार करनेवाले
- बिजली के लिए तड़पानेवाले
- सड़कों और अन्य निर्माणों को जानलेवा बनानेवाले
- चारित्रिक पतन के नये कीर्तिमान बनानेवाले
- झूठे मुक़दमों व फ़ेक एनकाउंटर करनेवाले
- लोगों के घरों-दुकानों पर बुलडोज़र चढ़वानेवाले
- लोगों को पुलिस हिरासत में मरवानेवाले
- प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक बंद शिक्षालय बंद करवानेवाले
- टीचरों से चारा इकट्ठा करवानेवाले
- आशा, आंगनबाड़ी, सहायिका और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को आंदोलन करने पर मजबूर करनेवाले
- व्यापारियों-दुकानदारों-कारोबारियों का अधिकतम मुनाफ़ा घूस में खा जानेवाले
- खिलाड़ियों तक से पैसा खानेवाले
- कलाकारों के यश भारती सम्मान और उनको मिलनेवाली सम्मान राशि समाप्त करनेवाले
- किसान, मज़दूर, मेहनतकश और पेशेवरों व अन्य सभी को उनका हक़-अधिकार न देनेवाले
- अल्पकालिक अग्निवीर लाकर सालों से भर्ती के लिए मेहनत करनेवालों का मनोबल तोड़नेवाले
- विज्ञान और वैज्ञानिकों को मान न देनेवाले
- 69000 जैसी अनेक भर्तियों में आरक्षण मारनेवाले
- देश की संपत्ति बेचनेवाले
- संविधान को बदलने की साज़िश करनेवाले ‘भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों’ को अब जनता पूरी तरह नकार चुकी है और सदैव के लिए विदा करने के लिए बेसब्र है।
जन-जन कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!