Each & every life is important, God has sent it for specific purpose, it is our primary duty to understand them and treat humanely, not destroy carelessly.
सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद आखिर क्यों तोड़ी गई?
शोरगुल और हो-हल्ले से दूर, इस पूरे मामले की कानूनी और असली तस्वीर जाननी है तो सीनियर एडवोकेट जान निसार अहमद और एडवोकेट मुनाजिर हसन को जरूर सुनिए।
हमारी खास बातचीत में उन्होंने उन सवालों के जवाब दिए हैं, जो इस पूरे मामले को समझने के लिए बेहद अहम हैं
🔹 मस्जिद तोड़े जाने की असली वजह क्या है?
🔹 मुसलमान इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं?
🔹 अब मस्जिद को लेकर आगे क्या कानूनी रणनीति होगी?
पूरी बातचीत आज शाम 7 बजे सिर्फ Red Chilli Live के YouTube चैनल पर।
देखिए, सुनिए और अपनी राय जरूर बताइए।
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मस्जिदें गिराकर हिंदुओं का वोट लेने का खेल नहीं चलेगा अब। हर शहर की एक संस्कृति होती है जिसमें मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे सब होते हैं। किसी एक को मिटाना इस संस्कृति पर हमला है।
कोई सामान्य हिन्दू खुश नहीं होगा मस्जिद गिराने से।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले पर बयान देने वाली मुस्लिम पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हुदा जरीवाला को उत्तर प्रदेश पुलिस ने रिहा कर दिया है। जरीवाला को सहारनपुर सर्किट हाउस के बाहर बहस के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन्होंने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के डीएम को लेकर टिप्पणी की थी। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी।
बहादुर और निडर पत्रकार हुदा जरीवाला को बेल मिल गई है। कल उन्हें सहारनपुर में गिरफ्तार कर लिया गया था। सहारनपुर के वकीलों ने उनकी रिहाई के लिए लगातार कोशिश की और आखिरकार उन्हें बेल मिल गई।
उन सभी लोगों का शुक्रिया, जिन्होंने हुदा जरीवाला की रिहाई के लिए मजबूती के साथ आवाज़ उठाई और उनके हक़ में खड़े रहे।
📍 सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर बयान देने वाली BBC की पूर्व रिपोर्टर और यूट्यूबर हुदा जरीवाला को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस का आरोप है कि वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। मामले में शांतिभंग की धाराओं के तहत कार्रवाई हुई।
सहारनपुर मस्जिद मामले में सपा-कांग्रेस पर गंभीर सवाल! | आरिफ सिद्दीक़ी ने खोला बड़ा राज़? | सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाए जाने के मामले में देवबंद के वरिष्ठ समाजसेवी एवं सभासद आरिफ सिद्दीक़ी ने प्रशासन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए |
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दोहरे इंसाफ के पैमाने तबाही का रास्ता खोलते हैं: अरशद मदनी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही और विनाश का रास्ता खोलते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारें डर, ज़ुल्म और भेदभाव से नहीं, बल्कि न्याय, समानता और जनता के विश्वास से चलती और तरक्की करती हैं।
मौलाना मदनी ने सांप्रदायिकता और धर्म के आधार पर नफ़रत को देश के लिए बेहद ख़तरनाक बताते हुए कहा कि इससे सामाजिक ताना-बाना कमज़ोर होता है और अमन, तरक्की तथा राष्ट्रीय एकता को नुक़सान पहुँचता है।
हालांकि उन्होंने लोगों को मौजूदा परिस्थितियों से मायूस न होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर रात के बाद सुबह ज़रूर आती है और वह दिन भी आएगा जब अमन, भाईचारे, प्रेम और न्याय का सूरज उगेगा तथा नफ़रत और भेदभाव का अंधेरा छंट जाएगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि ज़ुल्म और नाइंसाफी कभी स्थायी नहीं रहे। जब ज़ुल्म अपनी इंतिहा को पहुँचता है तो इंसाफ की सुबह क़रीब आ जाती है।
मौलाना मदनी ने कहा कि हम एक ज़िंदा क़ौम हैं और ज़िंदा क़ौमें हालात के रहमो-करम पर नहीं रहतीं, बल्कि अपने चरित्र, हौसले और अमल से हालात का रुख़ बदल देती हैं।
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इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही (विनाश) का रास्ता खोलते हैं। सरकारें डर, ज़ुल्म और भेदभाव से नहीं, बल्कि न्याय और इंसाफ, समानता और जनता के विश्वास से चलती और तरक्की करती हैं।
सांप्रदायिकता और धर्म के आधार पर नफ़रत को बढ़ावा देना किसी भी देश के लिए बेहद ख़तरनाक है। यह न केवल सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर करता है, बल्कि अमन, तरक्की और राष्ट्रीय एकता को भी नुकसान पहुँचाता है। इसके बावजूद मौजूदा हालात से मायूस होने की कोई ज़रूरत नहीं है। आज जो हालात हैं, वे हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे। हर रात के बाद सुबह ज़रूर आती है, और वह दिन भी आएगा जब अमन, भाईचारे, प्रेम और न्याय का सूरज उगेगा और नफ़रत, भेदभाव और सांप्रदायिकता का अंधेरा छंट जाएगा।
इतिहास गवाह है कि ज़ुल्म और नाइंसाफी कभी स्थायी नहीं रहे। जब ज़ुल्म अपनी इंतिहा को पहुँचता है तो इंसाफ की सुबह करीब आ जाती है। एक दिन ज़ुल्म व ज़बरदस्ती का अंत होगा, ज़ालिमों को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा, और हमारा देश एक बार फिर प्रेम, भाईचारे, न्याय, समानता और इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
हम एक जीवित (ज़िंदा) क़ौम हैं, और जीवित क़ौमें हालात के रहमो-करम पर नहीं रहतीं,वे अपने चरित्र, हौसले और अमल से हालात का रुख़ बदल देती हैं।
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कैराना की मुस्लिम सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर कलेक्ट्री मस्जिद गिराये जाने के बाद बड़ा खुलासा करते हुए कहा ,
" जिला कोर्ट के आदेश के बाद 22 दिन का समय था , हम हाईकोर्ट जाने वाले थे लेकिन बिना किसी लिखित आदेश के मस्जिद गिरा दी गयी " ,
सहारनपुर मस्जिद के 1896 के दस्तावेज़ है फिर भी मस्जिद को बुल्डोज़ कर दिया गया, काग़ज़ होते हुए भी मस्जिद को तोड़ दिया! हाईकोर्ट जाने का मौक़ा भी नहीं दिया गया! बोले हमज़ा मसूद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित दशकों पुरानी मस्जिद को जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर ढहा दिया। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पत्रकार पूजा माथुर ने कहा कि मस्जिद की जमीन पर कलेक्ट्रेट बना था, न कि कलेक्ट्रेट की जमीन पर मस्जिद। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के अधिकतर थानों में मंदिर हैं जिन्हें अवैध नहीं माना जाता, लेकिन केवल मस्जिद ही अवैध नजर आती है। बाबरी मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर जो छूट दी गई, आज का घटनाक्रम उसी का नतीजा है।
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सहारनपुर - मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सांसद इमरान मसूद का बयान, जिला प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
आदेश और ध्वस्तीकरण दोनों गैर-संवैधानिक हैं। 2027 के चुनाव को लेकर ध्वस्त की गई मस्जिद,
प्रशासन ने मस्जिद गिराकर गैर-संवैधानिक काम किया, यह मामला देशभर में एक नज़ीर बनेगा।
मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने का किया बड़ा ऐलान।
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "कल पूरी रात हमारे लोग जागते रहे, हम लगातार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास करते रहे। मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया गया है बल्कि वहां संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
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सुबह-सुबह मस्जिद को ढहाना शर्मनाक है। यह इतना बड़ा गुनाह है कि उन्हें इसका अंजाम ज़रूर भुगतना होगा... हम इस मामले को कोर्ट ले जाएंगे: इकरा हसन (सपा सांसद)
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It all started with the Babri Masjid demolition in 1992. It continues to this day. Saharanpur Masjid is the latest casualty. And to think they call medieval rulers barbarian! Today, no rule, no law prevails. Hate reigns.