प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
बुलेट ट्रेन, 5 ट्रिलियन इकोनॉमी, विश्वगुरु बनने की बाते है, और 1 लाख स्कूलों में बिजली नहीं, वही 98,500 स्कूलों में बेटियों के लिए शौचालय नहीं।
जिस देश के बच्चों को बुनियादी सुविधाएँ न दे पा रहे हो हम तो सच में आत्ममंथन की जरूरत है #education_system
important update : चुनाव जीतना ही बस अब बस देश के विकास है |
Paper लीक - education से exam system तार तार हो रहा - छोटी मोटी बातें है क्या फर्क पड़ता है 22-23 लाख बच्चों का भविष्य से खिलवाड़ होता रहे |
वित्त मंत्री से महंगाई नहीं संभल रही,
गृह मंत्री से मणिपुर नहीं संभल रहा…
शिक्षा मंत्री से पेपर लीक नहीं संभला,
पर्यावरण मंत्री से प्रदूषण नहीं संभला…
रेल मंत्री से रेल हादसे नहीं संभलते,
कृषि मंत्री से किसानों की समस्या नहीं संभलती…
स्वास्थ्य मंत्री से अस्पताल नहीं संभलते,
खाद्य विभाग से मिलावट नहीं संभल रही…
और फिर कहा जाता है
देश सही हाथों में है…
#neet2026