#शंकर का संस्कृत में अर्थ है- “शं करोति सः शंकरः”
यानी, जो कल्याण करे, वही शंकर है।
इस बात को आचार्य शंकर ने भी प्रत्यक्ष प्रमाणित कर दिया।आदि शंकराचार्यजी का पूरा जीवन जितना असाधारण था,उतना ही वो जन-साधारण के कल्याण के लिए समर्पित थे
@narendramodi#दिवाली#केदारनाथ_धाम
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री ओमप्रकाश गर्ग जी का आज पटना में निधन हो गया. वे 96 वर्ष के थे. @RSSorg के संयुक्त बिहार प्रांत प्रचारक और बाद में @VHPDigital के उपाध्यक्ष का दायित्व निभाया. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें. 🙏
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अयोध्या में आयोजित अखिल भारतीय शारीरिक वर्ग के दौरान के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 21 अक्टूबर को श्रीराम लला के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और #श्रीराम_जन्मभूमि_मंदिर निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया.
अयोध्या में आयोजित अखिल भारतीय शारीरिक वर्ग के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 21 अक्तूबर को श्रीराम लला के दर्शन कर आशीर्वाद लिया तथा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य का भी अवलोकन किया.
“केवल भूमि के किसी टुकड़े को तो राष्ट्र नहीं कहते।एक विचार,एक आचार,एक सभ्यता,एक परम्परा से जो लोग पुरातन काल से चले आये हैं,उन्हीं लोगों से राष्ट्र बनता है।इस देश क�� हमारे ही कारण हिन्दुस्थान नाम दिया गया है।”– डॉ.हेडगेवार
विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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भगवान का दर्शन, उसकी पूजा करना, जात-पात-पंथ न देखते हुए सभी श्रद्धालु भक्तों के लिये सुलभ हों, ऐसा सभी मन्दिरों में नहीं है, यह होना चाहिये।
@DrMohanBhagwat सरसंघचालक @RSSorg#RSSVijayadashami
तालिबान का चरित्र कैसा है, यह स�� जानते हैं, थोड़ी सा मान भी लें कि उनका हृदय परिवर्तन हो गया है तो उनके संरक्षकों पाकिस्तान और चीन का विचार भी बदल गया है क्या. हमे तालिबान से सावधान रहने की जरूरत है. @DrMohanBhagwat
@RSSorg
#RSSVijayadashami
तालिबान का चरित्र क्या है, यह सब जानते हैं, थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि उनका हृदय परिवर्तन हो गया है तो उनके संरक्षकों पाकिस्तान और चीन का विचार भी बदल गया है क्या. हमे तालिबान से सावधान रहने की जरूरत है. @DrMohanBhagwat#RSSVijayadashami
जिन लोगों ने प्रामाणिकता, निःस्वार्थ बुद्धि से भारत के लिए काम किया है वे जन्मे भले किसी एक प्रान्त में हों, एक भाषा को बोलने वाले रहे हों, लेकिन उनके विचारों के प्रभाव स्थान देश में सर्वत्र पाए जाते हैं. बौद्ध, जैन, सिक्खों के स्थान सर्वत्र भारत में हैं. हम मूल एक देश है
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