a Young Philosopher, Librarian & Preceptor.
Studying Master Of Arts in Philosophy.
MLIS (Library Science),BLIS,B.Ed,B.A
a_Learner_to_find_the_Philosophy_Of_Life
मर्दो के दारु का खर्चा, और मार भी सहना पड़ता है..!
घर के खर्चे के खातिर भी,यह भार भी ढोना पड़ता है..!
नक्कारे मर्दो के ताने , और गाली खाकर करती हूं..!
अपनी मेहनत मजदूरी से , बच्चों का पेट भी भरती हूं...!!
@Indianrailgadi JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
JHAJHA Railway Station
अपने बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन शेयर न करें। ये बात किसी ऐरे-ग़ैरे ने नहीं कही है, ब्रिटेन की 'नेशनल क्राइम एजेंसी' और 'इंटरनेट वॉच फाउंडेशन' ने ये चेतावनी जारी की है।
असल में इन बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल करके बाल यौन शोषण सामग्रियाँ तैयार की जा रही हैं। AI बूम के बाद से ऐसे करतूत धड़ल्ले से अंजाम दिए जा रहे हैं। 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों को उनकी नग्न तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल किया जा रहा है।
लड़कियों की इंस्टाग्राम प्रोफाइल से तस्वीरें लेकर उसे हूबहू ऐसे अश्लील बना दिया जाता है जैसे एकदम असली हों। अभिभावकों व इन बच्चों से कहा गया है कि अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर वो 'क्लोज फ्रेंड्स' का एक सर्कल बनाकर रखें और उससे बाहर तस्वीरें साझा न करें।
वैसे ब्रिटेन वगैरह में ये सुविधा है कि बच्चे 'रिपोर्ट रिमूव' के जरिए अपनी उन तस्वीरों को इंटरनेट से हटा सकते हैं, जिन्हें किसी और ने अपलोड किए हों। हालाँकि, आज की दुनिया में किसी को अपनी तस्वीर अपलोड करने से रोका नहीं जा सकता। इसीलिए, AI मॉडल्स बाल यौन सामग्री तैयार न करें इसकी जाँच की अधिक आवश्यकता है। लेकिन, यहाँ भी समस्या है। अधिकतर AI मॉडल्स 'ओपन सोर्स' हैं और उन्हें डाउनलोड करके बदला जा सकता है। नया उत्पाद बनाया जा सकता है।
वैसे भी AI के दुरूपयोग की घटनाएँ बढ़ रही हैं और आने वाले दिनों में AI इतना शक्तिशाली हो जाएगा कि उसकी खामियों से निपटने के लिए सोचना पड़ेगा।
कोल्ड ड्रिंक या अन्य वस्तुओं पर कूलिंग चार्ज के नाम पर अतिरिक्त शुल्क मांगने पर चुप न रहें। शिकायत हेतु राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या WhatsApp 8800001915 पर संपर्क करें और त्वरित समाधान पाएं।
@ashokchoudhaary@deepakanandias#ConsumerAwareness#ConsumerRights
दिघवारा प्रखंड के सैदपुर झौवा गांव निवासी अंकित कुमार ने 70वीं BPSC परीक्षा में 333वां रैंक हासिल कर DSP पद प्राप्त किया है!
अंकित की सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने वर्ष 2015 से गांव में बच्चों को कोचिंग पढ़ाते हुए अपनी तैयारी जारी रखी. करीब 10 वर्षों के संघर्ष, मेहनत और समर्पण के बाद उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल किया!
अंकित का कहना है कि सफलता के लिए बड़े शहरों की नहीं, बल्कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास की जरूरत होती है. उनकी सफलता आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
@Drx_Nilesh7 अंकित भाई को बहुत बधाई, मुझे आज भी याद है वो दिन जब पहली बार अंकित और विक्की दोनों बिहार पुलिस के फिजिकल देने पटना मेरे रूम पर आए हुए थे, और हम तीनों लोगों का दौड़ पटना के गर्दनीबाग में था, इसे दुर्भाग्य या संयोग जो भी बोलिए हम तीनों लोगों में से किसी का भी दौड़ पास नहीं हो पाया।
एक आदमी ने ₹25 लाख का प्लॉट पसंद कर लिया था?
सेलर बार-बार कह रहा था कि जल्दी एडवांस दे दो, वरना कोई दूसरा खरीद लेगा।
लेकिन तभी उसके एक दोस्त ने कहा कि पैसे देने से पहले कागज जरूर चेक कर लेना।
आदमी बोला कि जमीन तो सामने दिख रही है, फिर कागजों की क्या जरूरत है।
दोस्त हंसकर बोला कि असली जमीन कागजों में होती है, मैदान में नहीं।
सबसे पहले उसने Mother Deed मांगी।
जिससे पता चलता है कि जमीन पहले किसकी थी और मालिकाना हक कैसे बदलता गया।
फिर उसने Sale Deed चेक की।
यही दस्तावेज साबित करता है कि जमीन कानूनी रूप से किसके नाम है।
इसके बाद Encumbrance Certificate निकलवाया।
ताकि पता चल सके कि जमीन पर कोई लोन, केस या कानूनी विवाद तो नहीं है।
फिर Khata Certificate देखा।
क्योंकि भविष्य में मकान बनाने और टैक्स भरने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।
इसके बाद ROR (Record Of Rights) निकलवाया।
जिससे जमीन के रिकॉर्ड और असली मालिक की जानकारी मिल गई।
अब कैलकुलेशन शुरू हुआ।
प्लॉट की कीमत = ₹25,00,000
रजिस्ट्री खर्च लगभग = ₹1,75,000
स्टाम्प ड्यूटी और अन्य शुल्क = ₹50,000
कुल निवेश = ₹27,25,000
दोस्त बोला कि अगर एक जरूरी कागज भी गलत निकला।
तो ₹27 लाख का निवेश फंस सकता है।
फिर एक और बात सामने आई।
जिस आदमी से वह प्लॉट खरीद रहा था, वह असली मालिक नहीं था।
वह मालिक का रिश्तेदार था।
तब दोस्त ने तुरंत Power of Attorney (POA) मांगी।
क्योंकि बिना POA के वह जमीन बेच ही नहीं सकता था।
फिर सर्वे विभाग से Survey Sketch निकलवाया गया।
क्योंकि सेलर 100 गज बता रहा था।
लेकिन रिकॉर्ड में जमीन सिर्फ 92 गज निकली।
यानी 8 गज कम।
अगर उस इलाके में जमीन ₹25,000 प्रति गज थी।
तो नुकसान होता -
8 × ₹25,000 = ₹2,00,000
यानी सिर्फ एक सर्वे ने ₹2 लाख बचा दिए।
तब आदमी को समझ आया कि प्लॉट खरीदते समय सिर्फ लोकेशन और कीमत नहीं देखनी चाहिए।
कागजों की जांच कई बार लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
अगर आपको प्लॉट खरीदना हो तो पहले एडवांस देंगे या पहले सारे दस्तावेज चेक करेंगे?
🚨 EWS और OBC NCL Certificate से संबंधित सूचना
✅ सभी अभ्यर्थी पढ़ ले इसे और save करके रख लें।
📌Join Telegram For More & Quick Information- https://t.co/3zQDAGqXHY
#OBC#EWS#BPSC#BPSSC#BSSC#BTSC