- एक बुद्धिहीन ने कहा कि हमने चांदी का कौवा बनवा कर दिया था, वह चोरी हो गया है। इसपर मंदिर प्रशासन अपना उत्तर देता इसके पूर्व ही मंदिर द्रोहियों ने सोशल मिडिया पाट दिया कि कागभूसुंडी जी चोरी हो गए।
हालांकि दो दि�� के भीतर मंदिर प्रशासन ने दिखाया, कौवा सही सलामत था।
- कुछ टुच्चों ने हल्ला किया कि हमने चांदी की इंटे दी थी, वह नहीं दिख रही हैं। लोगों ने इसपर भी मंदिर प्रशासन का उत्तर जानना नहीं चाहा, बस हल्ला ��ठ गया कि इंटे चोरी हो गयीं। बाद में मंदिर ने स्पष्ट किया कि इंटे सुरक्षित हैं।
- फिर एक फटीचर ने कहा कि हमने सोने की एक रामचरितमानस दी थी, वह नहीं दिख रही। किसी ने नहीं पूछा कि आपने धातु की मानस क्यों दी थी? वहाँ धातु की पुस्तक कौन पढ़ेगा? बस सभी चिल्लाने लगे कि मानस चोरी हो गया। फिर मंदिर प्रशासन से दिखाया कि पुस्तक सुरक्षित है, मंदिर में ही रखी हुई है।
अब आप एक प्रश्न पर विचार कीजिये।
चांदी क�� कौवा ( मैं चाह कर भी उस आकृति को कागभूसुंडीजी नहीं कह पा रहा) या धातु की पुस्तक क्यों दी गयी थी?
क्या मंदिर प्रशासन ने माँगा था?
वहाँ ऐसी वस्तुओं की क्या उपयोगिता है?
इस प्रश्न का उत्तर अजीब होगा। देने वाले की इच्छा दरअसल यह थी कि यह वस्तुएँ मंदिर के गर्भगृह में रखी जांय। एक बड़े मंदिर में अपनी सांकेतिक उपस्थिति सुनि��्चित कर लेने का मोह ऐसी चीजों का दान करा रहा था।
पर क्या सचमुच ऐसा किया जाना चाहिए था?
आप सोचेंगे तो इसी निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।
मंदिर निर्माण समाज के धन से हुआ है, उसमें अरबपतियों के कुछ करोड़ रूपये लगे हैं तो किसी गरीब रिक्सेवाले का सौ रुपया भी लगा है।
उसमें अनेक ऐसे लोगों का भी धन लगा है जो भीख मांग के जीवन यापन करते हैं। दाताओं का धन कम अधिक हो सकता है, पर श्रद्धा सबकी बराबर है।
फिर कुछ लोगों का चिन्ह ही मंदिर में स्थापित क्यों हो? और कोई अपना नाम स्थापित करना चाह ही क्यों रहा है?
स्वयं को इस लोभ से मुक्त नहीं कर पाए तो दान का क्या ही मोल है?
और हम लोग, जो इस तरह की फर्जी बातों पर हल्ला कर के मंदिर और हिन्दू समाज की प्रतिष्ठा से ��ेल रहे हैं, क्या दोषी नहीं हैं?
क्या कागभूसुंडी जी की चोरी की पोस्ट लिखने वाले किसी भी व्यक्ति ने इस झूठ के खंडन की पोस्ट की?
नहीं। दरअसल उन्हें चोरी का दुख नहीं था, उनका लक्ष्य बस मंदिर की प्रतिष्ठा धूमिल करना था, जो उन्होंने किया।
चढ़ावे का पैसा चोरी करने वाले अधम तो पापी हैं ही, वे लोग भी कम नहीं जिन्होंने झूठ हल्ला मचाया। दुख होता है कि हिन्दुओं में मंदिर की प्रतिष्ठा से जलने वाले लोग भी ���ैं।
Sometimes, change doesn’t arrive with loud protests. It shows up in a single, quiet word.
At a wedding ritual where a baby boy is placed in the bride’s lap, the question is familiar and so is the expected answer.
When asked “whom are you playing with?”, most women are nudged to say “son” — a reflection of generations of conditioning.
But this bride chose differently.
She simply said “kid.”
No confrontation. No disruption. Just a calm shift in the answer that refused to assign preference, and in doing so, gently questioned a belief many don’t even notice.
The video has since gone viral, not for outrage, but for appreciation.
Many are calling it a dignified break from tradition — a reminder that change doesn’t always need to be loud to be powerful.
Credits : kritikabedwal on IG
#EverydayChange #SocialShift #IndianWeddings #breakingpatriarchy
[Gender Norms, Cultural Conditioning, Social Change, India, Breaking Patriarchy]
China 🇨🇳 is Truly 200 years ahead of us ..
Great Nation China 🇨🇳
Perfect example.
95% live in this amazing conditions.
Lower caste Shang living their high life.
Elon Algorithm will not allow this to go viral 💔
Can you share it maximum..
Hail China 🇨🇳
If a similar banner had been put up showing a Muslim mosque under the feet of a Hindu king, they would have created a huge uproar.
On the occasion of the Muslim festival of Muharram, a banner was put up in Pochampalli. Even today, it has reportedly not been removed. The banner is being seen as an act of insulting Hindu religion.
Granting permission for such a banner is highly condemnable and has drawn criticism towards the police authorities.
क्या आप विश्वास करेंगे कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस त्रिपुरा का ऑफिशियल हैंडल राम भक्तों को चुटिया कहा था
आज यही कांग्रेसी कुत्ते असली राम भक्त बन रहे हैं
Anganwadi women's cruelty you can't even imagine,she kicked a helpless little girl in the chest
No action has been taken yet by Panvel police, please repost until it reaches to @CMOMaharashtra 🙏🏻
📍Anganwadi in Nandgaon, Panvel, Raigarh, Maharashtra
Such an act is completely unacceptable and cannot be overlooked. The woman must face the strictest legal consequences for kicking the child.
हिंदुओं को गुरुद्वारा जाने की चुल्ल मची रहती है, इसलिए ये लोग मारते हैं। वीर पुरुष हैं, निहंग हैं, निहत्थों पर व���रता ऐसे ही निकलती है। मज़ार और गुरुद्वारा जाना ही क्यों है? तुम्हारे मंदिर कम हो गए हैं? वो नहीं मानते तुम्हें अपना, तुम क्यों चिपकना चाहते हो? उनका समाज भी कभी इस पर सामूहिक रूप से नहीं बोलता।
उनके लिए तुम बिहारी, भैये और कुत्ते-सूअर जैसे हो। नस्लभेद, घटिया जातिवाद और क्��ेत्रवाद का भौंडा प्रदर्शन हो रहा है।