@INCIndia आप का आंदोलन कई मामलों में जनता के करीब जा सकता है। आज किसी भी परिवार का सबसे अधिक पैसा बच्चों की पढ़ाई में जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ना होने से लोग प्राइवेट में बच्चों को भेजते हैं और वे बच्चों को अपना कस्टमर समझ कर जितना लुट सकते हैं लूटते हैं।
देर आए पर दुरस्त आए। प्रजातंत्र में कोई एक व्यक्ति तभी तक मान्य है जब तक वो अपने देश की आवाम के प्रति जवाबदेह होता है। उनसे संवाद करता है उनकी मूलभूत सुविधाओं का हनन नहीं होने देता। पर अब पानी सर से ऊपर हो गया । और इतिहास अपने को दोहराता ही है।
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
ये सिर्फ अभी शुरुवात है....
ना ही सरकार सुननी वाली है ना ही विरोध करने वाले।
आने वाले समय में अगर इस भीड़ को सही मायनों में कोई नेतृत्व करने वाला मिल गया तो हवा का रुख बहुत कुछ बहा कर ले जा सकता है।
@CMOfficeUP@dm_ghaziabad@nkgurjar4bjp@nitin_gadkari कल रात ज़रा सी बारिश क्या हुई, लोनी–भोपुरा के निवासियों की सड़कों को लेकर चिंताएँ फिर गहरी हो गईं। गड्ढे और जाम अब मानो इस क्षेत्र की पहचान बन चुके हैं।
उधर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए शायद बरसात का मौसम गर्मागर्म चाय और पकौड़ों का मौसम है, जबकि जनता के हिस्से में कीचड़, गड्ढे, जाम और रोज़ की परेशानी आई है।
लगता है यहाँ सड़कों की मरम्मत का टेंडर बारिश रुकने के बाद नहीं, बल्कि जनता का धैर्य टूटने के बाद ही जारी होता है।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
राम ने रावण को मारा पर क्या सच में रावण मारा गया ,आयना खुद ही बयां कर देगा अगर अपने मन से पूछोगे
राम किसी मंदिर में नहीं होते वो होते हैं हमारे अंदर और दिखाई देते हैं हमारे स्वभाव में, कार्यों में।
जय श्री राम...
"यदि राम केवल नारों में रहेंगे और मर्यादा व्यवहार से गायब रहेगी, तो मंदिरों में ताले बढ़ते चले जाएंगे" 💯🔥💯🔥
राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर शेखर सुमन के ये 3 मिनट एकदम लाजवाब है। 🫡🫡
और अंत में जय श्री राम तो बहुत ही गजब। 🚩💯🔥🔥
ये फूड ब्लॉगर आयुष सपरा हैं जो जंतर-मंतर पर जहां लोग अनशन पर बैठे हैं वहां फूड रिव्यू करने पहुंचे थे...यहां तक भी ठीक था फिर इन्होंने एक घटिया हरकत की और समोसा खाते हुए कहते हैं कि
"मन तो कर रहा है कि सोनम वांगचुक से कहूं सर समोसा चटनी के साथ खाते हुए मजा ही आ गया" और फिर हंसते हैं।
पैसा कमा लेना और एक संवेदनशील और एक बेहतर इंसान होना दोनों बहुत अलग चीज हैं और मैं अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनाने पर जोर दूंगा...जिससे वे कभी किसी के अनशन का ऐसे मजाक ना उड़ाएं।
#JantarMantar
#SonamWangchuk
हर जगह का यही हाल है इसके पीछे की कहानी को समझना होगा.इन बाहरी सड़कों हाईवे पर आम जनता कभी कभार चलती है और उस पर भी टोल इतना देना पड़ता है कि अगली बार आने में कई बार सोचना पड़ता है । इसको बनाया ही गया है सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लिए की उनका सामान आसानी से आ जा सके।
दिल्ली से देहरादून फ़ोरलेन,
पाउंटा साहिब से देहरादून फ़ोरलेन
हरिद्वार से देहरादून फ़ोरलेन
अब जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच फ़ोरलेन के लिए हज़ारों पेड़ काटे जा रहे हैं।
और देहरादून शहर में एक स्मूथ लेन भी नहीं।
आप दिल्ली से देहरादून ISBT ढाई घंटे में आते है लेकिन ISBT से घंटाघर तक न्यूनतम 45 मिनट लगते है। किसी भी साइड में शहर पार करना है तो डेढ़ घंटा लगेगा।
शहर के जाम से निज़ात दिलाने का कोई प्लान नहीं और शहर के चारों तरफ़ से एक्सप्रेस वे की भरमार है, ऐसा क्यों ?
@Anoopnautiyal1
hope so your guest will be a technical person who has knowledge of petrochemicals.
If possible pls ask a few questions
How two different categories fuel work a single burner or nozzle.
When calorific value is different then how can efficiency be maintained।
क्यों : क्या हुआ ? डर गए ?
UPA सरकार के खिलाफ तो बहुत बोलते थे,
58 / रु. लीटर पेट्रोल तो आपको बहुत महंगा लगता था,
अब क्या हुआ ?
जब 60 / रु. का $ था तो देश कि इज़्ज़त गिर रही थीं,
आज एक $ = 95:22 रु. है तो आपको डर लग रहा ?
जवाब ज़रूर दीजियेगा
Mr. #अमिताभ_बच्चन जी
@SrBachchan
दैनिक जनसुनवाई में सुनी गईं नागरिकों की समस्याएँ, त्वरित निस्तारण के दिए गए निर्देश l
गाजियाबाद, दिनांक 04 जुलाई, 2026
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण कार्यालय में आज प्रातः 10:00 बजे से दैनिक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों ने समस्याओं से संबंधित प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए।
जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक शिकायत एवं आवेदन को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए। जिन प्रकरणों का तत्काल समाधान संभव था, उनका मौके पर ही निस्तारण कराया गया तथा शेष मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान एवं पारदर्शी प्रशासन के प्रति प्रतिबद्ध है। जनसुनवाई के माध्यम से आमजन की शिकायतों का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को बेहतर एवं सुगम सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
#GhaziabadDevelopmentAuthority #Ghaziabad #UttarPradesh #Jansunvayi
राम मन्दिर... तब भी
राम .... तब भी
राम..... अब भी
राम
आपके अंदर आपके आचरण व्यवहार में, कार्यों में बोल में आपकी सोच में हैं उनको
इन फर्जी नेताओं बाबाओ के चक्कर में आकर मत भूलिए नहीं तो ये आपको रावण बना देंगे। रावण भी धर्म से नहीं कर्म से रावण बना।
UPSC और इतिहास के छात्रों को खूब मौज आने वाली है. लल्लनटॉप ला रहा है नया शो 'मास्टरजी इन द न्यूजरूम'.
अवध ओझा सर पढ़ाएंगे पूरी मॉडर्न हिस्ट्री. तो नोटबुक निकाल लीजिए.
जल्द ही सिर्फ लल्लनटॉप पर.
Master Ji in the Newsroom | Awadh Ojha
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎
गडकरी इथेनॉल का विरोध करने वालों को लॉबीज़ का हिस्सा बता रहे थे। असलियत तो ये है कि इथेनॉल मिक्सिंग के बचाव में पैसे खर्च कर कैंपेन चलाए जा रहे हैं। और ये कैंपेन गडकरी के निर्देश पर चलाए जा रहे हैं।
अगर आप भारत में उनकी नजर से देखेंगे जो विश्वगुरु के भक्त बने फिर रहे हैं तो फिर सब में एक ही इंजन होता है। पर अगर आप आम जनता आम नागारिक हैं तो फिर सब को पता है कि इंजन अलग होता है।