सोशल मीडिया पर स्वतंत्र भारद्वाज नाम के एक लड़के की वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें वो दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा और प्रधानमंत्री तक को अपना बड़ा भाई बता रहा है. इस वीडियो में जानिए दिल्ली पुलिस ने उसके बारे में क्या कहा है.
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पूरे ब्रज चौरासी कोस में यात्रा को पड़ाव स्थल बनानो को काम आपने कर दियौ है। हम बार-बार मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी का अभिनंदन करें हैं।
-श्रीकांत शर्मा, विधायक (मथुरा)
आकाश आनंद का सबसे विवादित भाषण ये है जिसमें आपा खोते हुए अपशब्द बोल गए थे।
अगले ही सेंटेंस में मैनेज करते हुए कहते हैं किसी का गूदा तो नहीं निकाल सकते हो ये सिर्फ आपका गुस्सा हो सकता है।
अपना गुस्सा आप वोट करके दिखा सकते हो, इन्हें सत्ता से हटाकर दिखा सकते हो। बाबा साहब ने जो अधिकार दिए हैं उसका फायदा उठा सकते हो।
ये शानदार कवर है,
इससे समझ में आता है आकाश आनंद बेहतरीन कम्युनिकेटर हैं। मेच्योर लीडर हैं।
जिस मुद्दे पर 2024 में आकाश आनंद आग बबूला हो गए थे उसी मुद्दे पर 2026 में देशभर का युवा जंतर मंतर पर आ गया सरकार बैकफुट पर चली गई।
सोचो कितना विजनरी स्टैंड रहा होगा।
जिस तेवर के साथ अभी अगस्त 2026 में कैंपेन शुरू किए थे, साल 2 साल में बहुत कुछ बदल सकता था मगर फिर से इमेच्योर बताकर हटा दिए गए हैं।
दरअसल बहनजी की लड़ाई किसी आकाश या किसी व्यक्ति से नहीं है, वाद विवाद संवाद की सहज धारा से है, जो कुछ सरल है उसके खिलाफ है।
कुछ पॉजिटिव अच्छा या सुखद ना हो जाए इस अनुभूति के खिलाफ है।
वैदिक काल में इस्तेमाल हुई संस्कृत की जलेबी अभी कहीं देखने को मिलती है तो बहन जी के सेंटेंस में।
आम लोग नहीं समझते, बहुजन समाज के लोग तो ये संस्कृत पाठ बिल्कुल नहीं समझते।
वो तो उनका लगाव उनका समर्पण है कि सबकुछ पढ़कर समझने की कोशिश करते हैं।
आकाश को एक दो शब्द के ग़लत इस्तेमाल के लिए रोका टोंका जा सकता है मगर संवाद की भाषा स्वाभाविक है, युवाओं की इच्छाओं आकांक्षाओं के अनुरूप है।
इसलिए कहूंगा फिर कभी मौका मिलेगा तो भी यही तेवर रखना @AnandAkash_BSP सही शब्दों के साथ।
सियासी फैसले इमैच्योर हो सकते हैं मगर मिशनरी ज़ुबान नहीं, इस दृढ़ निश्चय के साथ।✊🔥
युवाओं की भाषा यही है, GenZ की भाषा यही है; बॉडी लैंग्वेज बेहतरीन।
सेंटेंस के लास्ट में ली गई चुटकी सुनो-गन्ने का रस😅
रैपिडो ड्राइवर अंकित की भी आवाज उठाकर शानदार काम किया था@AnandAkash_BSP ने।
लाखों अंकितों को उम्मीद जगी थी।
एक आस एक आशा, अपनेपन का रस।
दिल्ली पुलिस की सारी बहादुरी छात्रों और महिला पत्रकारों पर लाठी चलाने के लिए है.
कहाँ हैं मोदीजी? अपने ये कबूलनामा सुना या नहीं? योगीजी! आपने सुना?
@narendramodi@myogiadityanath
BJP सरकार और दिल्ली पुलिस की गुंडई 👇
4PM की पत्रकार शाहीन ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और मारपीट की।
शाहीन का कहना है- जब पुलिसवालों को पता चला कि वो मुसलमान हैं तो उन्हें और बेरहमी से मारा गया। उनके शरीर पर जख्म हैं.. कैमरापर्सन भी बेसुध पड़ी है।
एक पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव कतई सही नहीं है, दोषी पुलिसवालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, इसकी उम्मीद कम है, क्योंकि- BJP सरकार में सवाल पूछना गुनाह हो चला है।
DM पर तो नाजायज़ काम करने पर, हाईकोर्ट के जुर्माने की फटकार पड़ गई लेकिन उनका क्या होगा, जिनके दिशा-निर्देश में ये सब प्रतिशोधात्मक काम हो रहा है?
D से पहले तो C आता है ना?
बाक़ी… जनता समझदार है।
“नीशू के बाप का हम सर फाड़े…आपको पता है इसमें कौन सा धारा लगता है? हाफ मर्डर…307…”
स्वतंत्र भारद्वाज शान से बता रहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया.
कपिल मिश्रा के एक फोन के बाद उसे राहत मिल गई
आगे बताता है कि कपिल मिश्रा, चिराग पासवान ही नहीं मोदी जी भी उसके “बड़े भाई” हैं, सबका समर्थन प्राप्त है.
@narendramodi क्या आप इस दंगाई के बड़े भाई हैं?