@RajatSharmaLive Having confidence in your intelligence is good, but considering others foolish raises a question on your own wisdom.
अपनी बुद्धिमत्ता पर विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन यदि आप दूसरों को बेवकूफ समझने लगें, तो यह आपकी बुद्धिमत्ता पर ही प्रश्नचिह्न लगा देता है।
@iamar24x7@AarunKosli पिछले कुछ दिनों से कॉमेडियन्स में होड़ लगी हुई है कि कौन कितना फूहड़ता भरा मजाक कर सकता है और कौन सबसे ज्यादा विवादित हो सकता है ।
ऐसे प्रयास करने वालों को बिना ज़मानत जेल भेजकर सख़्त कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प है ।
@AarunKosli मुझे तो पढ़ने में ही गलती लग गई थी मैं तो गलती से माननीय को मनोरोगी पढ़ गया था 🤣
काफ़ी देर बाद अचानक अहसास हुआ तो सोचा शेयर करूँ और लोगों की राय लूँ कि क्या ऐसी गलती ईश्वर की मर्जी से हुई थी ।
@narendramodi उद्भव स्थिति संहारकारिणी।
क्लेशहारिणी सर्वश्रेयस्करीणी॥
भारतीय संस्कृति में नारी को केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि सृजन, शक्ति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला माना गया है।
#12YearsOfNariShakti
@Sudhasahu12 "दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः"
जो व्यक्ति दुःख में विचलित नहीं होता और सुख में अहंकार या आसक्ति से दूर रहता है, वही जीवन की हर परिस्थिति में स्थिर, सफल और प्रसन्न रहता है।
जय श्री राम जी
@RajatSharmaLive कुटिल सलाह और बुरी संगत का नतीजा सिर्फ़ उस व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और देश को भुगतना पड़ सकता है।
इसलिए, अपनी संगत और सलाहकारों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।
@kokityagi नारी मुस्कुराकर वह सब सह लेती है
जिसे दुनिया असंभव समझती है लेकिन नारी को कभी कमज़ोर या कमतर मत समझिए;
जिसे सृजन की शक्ति मिली हो, उसकी सामर्थ्य का अनुमान लगाना आसान नहीं होता।
@kokityagi नारी मुस्कुराकर वह सब सह लेती है
जिसे दुनिया असंभव समझती है लेकिन नारी को कभी कमज़ोर या कमतर मत समझिए;
जिसे सृजन की शक्ति मिली हो, उसकी सामर्थ्य का अनुमान लगाना आसान नहीं होता।
@RajatSharmaLive कुटिल सलाह और बुरी संगत का नतीजा सिर्फ़ उस व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और देश को भुगतना पड़ सकता है।
इसलिए, अपनी संगत और सलाहकारों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए।
@Sudhasahu12 "दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः"
जो व्यक्ति दुःख में विचलित नहीं होता और सुख में अहंकार या आसक्ति से दूर रहता है, वही जीवन की हर परिस्थिति में स्थिर, सफल और प्रसन्न रहता है।
जय श्री राम जी
एक आदमी ने ₹25 लाख का प्लॉट पसंद कर लिया था?
सेलर बार-बार कह रहा था कि जल्दी एडवांस दे दो, वरना कोई दूसरा खरीद लेगा।
लेकिन तभी उसके एक दोस्त ने कहा कि पैसे देने से पहले कागज जरूर चेक कर लेना।
आदमी बोला कि जमीन तो सामने दिख रही है, फिर कागजों की क्या जरूरत है।
दोस्त हंसकर बोला कि असली जमीन कागजों में होती है, मैदान में नहीं।
सबसे पहले उसने Mother Deed मांगी।
जिससे पता चलता है कि जमीन पहले किसकी थी और मालिकाना हक कैसे बदलता गया।
फिर उसने Sale Deed चेक की।
यही दस्तावेज साबित करता है कि जमीन कानूनी रूप से किसके नाम है।
इसके बाद Encumbrance Certificate निकलवाया।
ताकि पता चल सके कि जमीन पर कोई लोन, केस या कानूनी विवाद तो नहीं है।
फिर Khata Certificate देखा।
क्योंकि भविष्य में मकान बनाने और टैक्स भरने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।
इसके बाद ROR (Record Of Rights) निकलवाया।
जिससे जमीन के रिकॉर्ड और असली मालिक की जानकारी मिल गई।
अब कैलकुलेशन शुरू हुआ।
प्लॉट की कीमत = ₹25,00,000
रजिस्ट्री खर्च लगभग = ₹1,75,000
स्टाम्प ड्यूटी और अन्य शुल्क = ₹50,000
कुल निवेश = ₹27,25,000
दोस्त बोला कि अगर एक जरूरी कागज भी गलत निकला।
तो ₹27 लाख का निवेश फंस सकता है।
फिर एक और बात सामने आई।
जिस आदमी से वह प्लॉट खरीद रहा था, वह असली मालिक नहीं था।
वह मालिक का रिश्तेदार था।
तब दोस्त ने तुरंत Power of Attorney (POA) मांगी।
क्योंकि बिना POA के वह जमीन बेच ही नहीं सकता था।
फिर सर्वे विभाग से Survey Sketch निकलवाया गया।
क्योंकि सेलर 100 गज बता रहा था।
लेकिन रिकॉर्ड में जमीन सिर्फ 92 गज निकली।
यानी 8 गज कम।
अगर उस इलाके में जमीन ₹25,000 प्रति गज थी।
तो नुकसान होता -
8 × ₹25,000 = ₹2,00,000
यानी सिर्फ एक सर्वे ने ₹2 लाख बचा दिए।
तब आदमी को समझ आया कि प्लॉट खरीदते समय सिर्फ लोकेशन और कीमत नहीं देखनी चाहिए।
कागजों की जांच कई बार लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
अगर आपको प्लॉट खरीदना हो तो पहले एडवांस देंगे या पहले सारे दस्तावेज चेक करेंगे?