14/09/2026 — आज शाम आसमान में जादुई नज़ारा! 🌙✨
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सूरज ढला तो आसमान
किसी फिल्मी सीन जैसा लगने लगा। 🌌
सच में, प्रकृति का अद्भुत जादू! ❤️
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दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही दिल्ली की राजनीति का पारा चढ़ गया है और जनता के मन में बस एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर दिल्ली में चल क्या रहा है और CM साहिबा कर क्या रही हैं? राशन के चावल से लेकर छात्राओं की साइकिल तक, भ्रष्टाचार के एक के बाद एक गंभीर आरोपों ने सरकार की साख और प्रशासनिक दावों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
पहला और सबसे बड़ा सवाल गरीब के राशन की मार को लेकर है। आरोप है कि FCI के गोदामों से मिलने वाला करीब 31,000 मीट्रिक टन रियायती चावल हर हफ्ते गरीबों की थाली तक पहुँचाने के बजाय महंगे दामों पर निजी हाथों में बेचने का खाका तैयार किया गया।
लगभग 22,000 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले का सच क्या है, इस पर सरकार की चुप्पी खलती है। जब सदन के अंदर इस मुद्दे पर जवाब माँगा गया, तो जवाब देने के बजाय विपक्षी विधायकों को मार्शल आउट करा दिया गया, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है।
दूसरा गंभीर मुद्दा 'विद्या वाहिनी' योजना के तहत खरीदी गई साइकिलों के गणित से जुड़ा है। जिस साइकिल की बाजार कीमत महज ₹4,200 है, उसके लिए सरकारी खजाने से ₹6,957 क्यों चुकाए गए? 1.30 लाख साइकिलों की खरीद में जनता के करीब ₹35.84 करोड़ की यह गड़बड़ी किसके खाते में जाएगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। क्या यही पारदर्शिता का वह मॉडल है, जिसकी बातें अक्सर बड़े मंचों से की जाती हैं?
वित्तीय अनियमितताओं के इन दावों से इतर, मुख्यमंत्री कार्यालय की अपनी कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुभव भी कठघरे में है। सार्वजनिक बैठकों में AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) की समीक्षा के समय उसे 'तापमान' बता देने जैसी बुनियादी चूकों ने सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजेंद्र गुप्ता, हर्ष मल्होत्रा और सतीश उपाध्याय जैसे तजुर्बेकार और कद्दावर नेताओं के विकल्प मौजूद होने के बावजूद जब कमान रेखा गुप्ता को सौंपी गई थी, तब मजबूत और कुशल प्रशासन का भरोसा दिया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बार-बार ऐसी लापरवाही सामने आ रही है।
फिलहाल ये सभी मामले आरोपों के दायरे में हैं और किसी जांच एजेंसी का अंतिम ठप्पा लगना बाकी है। लेकिन राजनीति के इस घमासान के बीच जनता के लिए कसौटी बहुत सीधी है—क्या गरीब के हिस्से का चावल उसके घर पहुँचा, और क्या बच्ची की साइकिल उसके स्कूल के गेट तक पहुँची? CM साहिबा को अब बयानों के बजाय इन तीखे सवालों का सीधा जवाब देना होगा।
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