एक महिला ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से पॉलिसी ली।
किडनी इन्फेक्शन हुआ , तेज बुखार में कंपकंपी छूटने लगी , हालत बिगड़ी तो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
लेकिन जब क्लेम लगाया गया तो जवाब मिला
आप तो दवा से ठीक हो सकती थीं , एडमिट क्यों हुईं?
अब सवाल ये है कि 👇
क्या बीमा कंपनी अब डॉक्टर भी बन गई है?
क्या मरीज की हालत अस्पताल तय करेगा या इंश्योरेंस ऑफिस?
क्या ICU में जाने से पहले कंपनी से अनुमति लेनी होगी कि “सर, क्या मैं सच में बीमार हूं?”
पॉलिसी बेचते समय कहते हैं “कैशलेस, टेंशन फ्री।”
और क्लेम के समय कहते हैं “आपको तो सिर्फ गोली खानी चाहिए थी।”
तो फिर इंश्योरेंस किस बात का है?
बीमारी कवर करने का या क्लेम रिजेक्ट करने का?