धर्मेंद्र प्रधान ने आख़िर आज अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है। उनके एक्स अकाउंट पर जारी एक पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि जंतर-मंतर और देश में बनी स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया है। छात्रों के लगातार प्रदर्शन और दबाव के बाद उनके द्वारा यह कदम उठाया गया है।
ये इस्तीफ़ा आंदोलन कर रहे इन छात्रों की बड़ी जीत हैं, ये बताता हैं कि लोकतंत्र में अपने हक़ के लिए आवाज उठानी चाहिए।
पर इस बीच आंदोलन से आई कुछ तस्वीरों ने ये भी बताया हैं कि हक़ के लिए बोलो अपनी बात, ये तुम्हारा हक है मगर देश की रीत, संस्कार और शान मत छोड़ना।
आंदोलन के बहाने
• पोस्टरों पर देश की इज़्ज़त से खेलना
• पीएम को गाली-गलौज करना
• धर्म को ठेस पहुँचाना
• किसी नेता की बहन-बेटियों पर गंदी बातें कहना
ये सब एकदम गलत है।
शांति से प्रदर्शन करना और अपनी मांग रखना हर किसी का अधिकार है।
पेपर लीक हुआ है तो सही से जांच होनी चाहिए।सरकार और नेता इसकी ज़िम्मेदारी भी ले और गुनहगारों को कड़ी सज़ा मिले पर आंदोलन के बहाने निजी हमले और बेहूदा भाषा से सिर्फ़ मुद्दा कमज़ोर पड़ता है।
अब इस जीत के बाद छात्रों शानदार रहो, मजबूत रहो।
सरकारी स्कूलों में पर्ची का खेल, कहां गए 503 करोड़?: राजस्थान में बच्चों की जान खतरे में, मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा
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राजस्थान में सरकारी स्कूलों के मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा: 20 हजार से ज्यादा स्कूलों के मरम्मत के लिए जारी 503 करोड़ के बजट में करोड़ों का खेल, अधिकारियों ने बिना चेक किए, NOC जारी कर दी; भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए जिम्मेदारों की कौनसी लापरवाहियों के चलते ये हुआ...
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*राजस्थान- 503 करोड़ की बंदरबांट,कागज की पर्ची से चला खेल:* जिनका काम पढ़ाई की मॉनिटरिंग, उन्हें स्कूल बिल्डिंग मरम्मत की जिम्मेदारी, पार्ट-2
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भास्कर खुलासे के बाद कांग्रेस आक्रामक, फर्जीवाड़े पर उठाए सवाल: डोटासरा, पायलट, जूली बोले- स्कूल मरम्मत में 503 करोड़ के फर्जीवाड़े की जांच करवाएं सीएम
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बच्चों की 'सुरक्षा पर सफेदी' करने वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए।
एक साल बीतने को है.. लेकिन ये तस्वीर बता रही है कि भाजपा सरकार ने झालावाड़ दुखांतिका से कोई सबक नहीं लिया।
झालावाड़ में जिस स्कूल की छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हुई, उस स्कूल की छत 1 साल बाद भी नहीं बन पाई, निर्माण कार्य आज भी अधूरा है।
अगर सरकार 1 साल में 1 स्कूल नहीं बना पाए, तो अंदाजा लगाइए मरम्मत के नाम पर जारी 503 करोड़ रुपए से बाकी स्कूलों का काम किस स्तर एवं उसकी क्या सच्चाई होगी?
भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा सरकार में 503 करोड़ रुपए से हुए मरम्मत कार्यों का सच बेहद शर्मनाक है। जयपुर, दौसा, नागौर, अजमेर और डीडवाना-कुचामन के स्कूलों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
- यहां की स्कूलों में दरारों पर सिर्फ रंग-रोगन करके लाखों रुपए उठा लिए गए।
- कई जगह न छत बदली, न मरम्मत की, और न ही लेवलिंग की गई।
- वाटर प्रूफ करने और ड्रेनेज व्यवस्था के नाम पर कागजों में काम दिखाकर पैसा उठा लिया गया
- जिन स्कूलों में 2 लाख रुपए तक खर्च होने थे, वहां 40 हजार रुपए का भी काम नहीं हुआ।
ये सिर्फ घोटाला नहीं, मासूम बच्चों की जान से किया गया भाजपाई भ्रष्टाचार और खुला खिलवाड़ है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, बच्चों की सुरक्षा पर भ्रष्टाचार करने वालों को बचाना भी अपराध है।
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प्रत्येक काम में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा ही इस भाजपा सरकार की असली पहचान बन चुका है। झालावाड़ में मासूम बच्चों की मौत जैसी हृदयविदारक घटना के बाद भी इस संवेदनहीन सरकार की आँखें नहीं खुली हैं।
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की मरम्मत के लिए जारी ₹503 करोड़ के बजट में भारी फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। बिना काम किए या आधे-अधूरे काम दिखाकर ही भुगतान (Payment) उठा लिया गया है और हमारे नौनिहालों की जिंदगी को एक बार फिर मौत के साये में, दांव पर लगा दिया गया है।
इस सरकार के राज में भ्रष्टाचारियों को हर आपदा और हर हादसे में अपनी चांदी कूटने का खुला अवसर मिल रहा है। विडंबना देखिए कि इतने गंभीर मामले पर भी शिक्षा मंत्री जी चैन की बांसुरी बजा रहे हैं और पूरा महकमा गहरी नींद में सोया है। क्या सरकार प्रदेश में किसी अगले बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है?
मुख्यमंत्री जी तुरंत इस पूरे ₹503 करोड़ के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। @RajCMO@BhajanlalBjp
पिपलोदी, झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे में कई मासूम छात्रों की जान चली गई थी। इस दर्दनाक हादसे की पुनरावृत्ति नहीं हो, इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूलों की मरम्मत और जर्जर स्कूल भवनों को सुरक्षित बनाने के लिए पूरे प्रदेश में फंड आवंटित किया था। परंतु, 1 साल बीत जाने के बावजूद भी जर्जर भवनों और स्कूलों के भवनों की मरम्मत और हालत में खासा सुधार नहीं हुआ।
मीडिया द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में यदि यह दावा किया जा रहा है कि कई सरकारी स्कूलों में मरम्मत कार्य पूरे हुए बिना ही भुगतान जारी कर दिया गया, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। यह वित्तीय अनियमितता तक सीमित मामला नहीं रहा, बल्कि हजारों बच्चों, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
स्कूलों का बुनियादी ढांचा ही यदि कमजोर और असुरक्षित होगा, तो स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर अभिभावकों का विश्वास कैसे बढ़ेगा?
बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए इसके लिए ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए। यदि 503 करोड़ रुपये के फंड में कहीं भ्रष्टाचार, लापरवाही या फर्जीवाड़ा हुआ है, तो इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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राजस्थान के 20 स्कूलों की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन: जहां छतें मजबूत होनी थीं, वहां सिर्फ पेंट किया; 503 करोड़ के फंड में फर्जीवाड़ा, छत गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौत के बाद फंड जारी हुई थी
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*राजस्थान-स्कूलों की मरम्मत के 503 करोड़ के फंड में फर्जीवाड़ा:* दरारों में रंग भरा, आधी छत टूटी, ड्रोन से दिखा सच; 5 जिलों की रिपोर्ट, पार्ट-1
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*राजस्थान-स्कूलों की मरम्मत के 503 करोड़ के फंड में फर्जीवाड़ा:* दरारों में रंग भरा, आधी छत टूटी, ड्रोन से दिखा सच; 5 जिलों की रिपोर्ट, पार्ट-1
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आखिर सामने आ ही गया 503 करोड़ रुपये के जर्जर स्कूल मरम्मत घोटाले का सच...!!
आज प्रकाशित दैनिक भास्कर की इस रिपोर्ट ने वही सवाल उठाए हैं, जिन्हें मैं लंबे समय से लगातार उठाता रहा हूं। यह कोई अचानक सामने आई कहानी नहीं है, बल्कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और मरम्मत के नाम पर हुए खेल का परिणाम है।
3 फरवरी को गोगानाडा के सरकारी स्कूल का दौरा कर मैंने स्वयं वीडियो के माध्यम से दिखाया था कि मरम्मत के नाम पर किस तरह खानापूर्ति की गई। छतें जर्जर थीं, काम अधूरा था और गुणवत्ता बेहद खराब थी। उस समय भी स्पष्ट कहा था कि यह सिर्फ पैसों की बर्बादी और भ्रष्टाचार का खेल नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ है।
अधिकारियों को बार-बार आगाह किया, स्कूलों का दौरा किया, जनता के सामने तथ्य रखे और हर मंच पर इस मुद्दे को उठाया। मेरे पास न सरकार की ताकत है, न बड़े संसाधन, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर आवाज़ उठाना अपना कर्तव्य समझा।
सबसे बड़ा सवाल राजस्थान सरकार से है -
जब शिकायतें थीं, वीडियो थे, जमीनी हकीकत सामने थी, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई...?? जिम्मेदार अधिकारियों और दोषी ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई...?? क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही है...??
दुर्भाग्य यह है कि यह सरकार व्यवस्था सुधारने से ज़्यादा घटनाओं के बाद बयान देने में विश्वास करती दिखाई देती है। अगर समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो डर यही है कि पहले हादसा होगा, फिर मुआवज़ा घोषित होगा, फिर करोड़ों का नया मरम्मत बजट आएगा और भ्रष्टाचार का वही चक्र दोबारा शुरू हो जाएगा।
बच्चों की सुरक्षा कोई फाइल नहीं, सरकार की पहली जिम्मेदारी है। अब जवाबदेही तय होनी ही चाहिए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री जी को उन्हें तुरंत बर्खास्त करना चाहिए।
@BhajanlalBjp@RajCMO@RajGovOfficial@INCIndia@INCRajasthan
@RailwaySeva अब इस ट्रेन को एक बार फिर वांगनी रेलवे स्टेशन पर बिना स्टॉपेज ही लंबे समय से खड़ा किया हुआ हैं। क्या कोई समाधान होगा या हमें ऐसे ही परेशान होना होगा।
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw@RailwaySeva
ट्रेन नंबर 06544 (BKN YPR SPL) पिछले 2 घंटे से Kalyan Outer पर बेवजह खड़ी है। Scheduled arrival KYN 06:43 थी, लेकिन अभी तक clearance नहीं मिला हैं।
यात्री थक चुके हैं, गर्मी के चलते सुबह सुबह ही बच्चों-बुजुर्गों को परेशानी हो रही हैं, कइयों की तबियत खराब हो रही हैं। Kalyan-Mumbai route पर बार-बार ऐसी देरी क्यों?
कृपया तुरंत देखें और यात्री सुविधा सुनिश्चित करें।
#IndianRailways #TrainDelay #06544