Today, PM Modi completes 25 years as the head of a government.
The opposition keeps asking, “What has PM Modi done that he has never faced anti-incumbency?”
They should watch this.
This is what PM Modi has done for the people of India over the last 25 years-
@Baliyan_x अवस्थी जी का करियर ख़त्म हो गया है कोई पूछ नहीं रहा तो कुछ भी लिखे और बोले जा रहे हैं ऐसे लोगों का खेल सब समझते हैं सारी उम्र टीवी की खाई बदले दौर में अब ज्ञान पेल रहे हैं नई दुकान सजाने की फिराक में है होना जाना कुछ है नहीं कूदने दो क्या ही फर्क पड़ेगा
कल को पैदा हुआ @atsshow7 का @TheJournalism_ रामनाथ गोयनका की विरासत को खारिज तो नहीं कर सकता। पर तथ्यों के साथ कुछ जरूरी सवाल उठाए हैं। @IndianExpress को अपनी इस पत्रकारिता पर उत्तर तो देना ही चाहिए।
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ट्रंप को नापसंद सारे नेता (पुतिन-जिनपिंग-ईरान के पेजेश्कियन) आज की डेट में सब भारत में हैं.. और जिनको भी ये लगता है कि BRICS में भारत क्या ही हासिल कर रहा है उन्हें देखना चाहिए कि UPA के समय भारत की क्या हालत हो गई थी कि भारत को BRICS से निकालने तक की चर्चाएं होने लगी थीं..
पुराने कांड याद नहीं रखिएगा तो वर्तमान की उपलब्धियों की कीमत भी समझ नहीं आती कई बार।
सौ बात की एक बात ये कि ख़बरों की भीड़ में जो रेल की लेटेस्ट ख़बर आई है उसपर ध्यान पब्लिक का शायद उतना नहीं जा रहा क्योंकि बात मालगाड़ी की है, लेकिन उसको समझने की ज़रूरत है कि बात सिर्फ़ मालगाड़ी की नहीं है। ये सब के मतलब की ख़बर है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इसके आखिरी तीन हिस्सों का भी उद्घाटन कर दिया गया। डेडिकेटेड मतलब सिर्फ़ फ़्रेट के लिये, माल के लिए। मतलब सिर्फ़ मालगाड़ियों के लिए अलग रेल की पटरी। जिसपर सिर्फ़ मालगाड़ियां चलेंगी। इसके आख़िरी तीन हिस्से यानी कुल 326 km के हिस्से का भी अब उद्घाटन हो गया। यानी पूरा 2,843 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क अब पूरी तरह चालू हो गया है। तो ये सिर्फ़ मालगाड़ियों की बात इसलिए नहीं है क्योंकि इसका फायदा तो सबको मिलेगा। मालगाड़ी के चक्कर में किसकी ट्रेन लेट नहीं हुई जीवन में? ये वाली प्रॉब्लम तो सब झेल चुके हैं। पहले एक ही पटरी पर यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां दोनों चलती थीं। मालगाड़ियां भारी और धीमी होती हैं, इसलिए यात्री ट्रेनों को बार-बार रुकना पड़ता था या लेट होना पड़ता था। पटरियां जैम रहती थीं। अब मालगाड़ियों का बड़ा हिस्सा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चला गया है। पुरानी लाइनों पर जगह खाली हुई है। रेलवे अब उन लाइनों पर ज्यादा यात्री ट्रेनें चला सकता है और वो टाइम पर चलेंगी ये भी उम्मीद बढ़ जाती है। क्योंकि ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनी हुई एकदम अलग रेल लाइन है। इसलिए मालगाड़ियां बिना रुके तेज दौड़ सकती हैं। और ये काम चल रहा था 2005 से। 20 साल पहले से। 2005 में प्लैन बना। 2006 में इसके लिए DFCCIL नाम से अलग कंपनी बनाई गई इसे बनाने और चलाने का काम संभालने के लिए। जापान की मदद से वेस्टर्न कॉरिडोर और विश्व बैंक की मदद से ईस्टर्न कॉरिडोर का काम शुरू हुआ। जमीन लेने में दिक्कतें आईं, ठेके देने में कई अड़चनें आईं, निर्माण में कई बाधाएं आईं। तो काम ज़रूर लंबा खिंचा। ईस्टर्न कॉरिडोर 2023-24 में पूरा हुआ और वेस्टर्न का आखिरी हिस्सा अब जाकर 2026 में पूरा हुआ है। ये कॉरिडोर दो बड़े हिस्सों में बंटा है। एक है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक 1,337 किलोमीटर लंबा है। ये मुख्य रूप से कोयला, स्टील, अनाज जैसे भारी माल के लिए है। दूसरा है वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक 1,506 किलोमीटर लंबा है। ये कंटेनर माल और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के लिए है खासतौर पर। दादरी पर दोनों कॉरिडॉर मिलते हैं और पूरे उत्तर, पश्चिम और पूर्व को जोड़ देते हैं। लेकिन ख़बर में जो ख़ासतौर पर समझने की बात है वो ये कि ये दुनिया में अनोखा है। क्यों? क्या दुनिया में मालगाड़ियां नहीं चलतीं? बिल्कुल चलती हैं। लेकिन इसमें डबल स्टैक मालगाड़ी चल सकती है। डबल स्टैक मतलब एक डिब्बे के ऊपर दूसरा डिब्बा, एक कंटेनर के ऊपर दूसरा कंटेनर। वैसे तो अमेरिका जैसे देशों में डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनें चलती हैं यानी एक डिब्बे पर दो कंटेनर एक के ऊपर एक रखे जाते हैं, लेकिन वहां ऐसी मालगाड़ी चलती है डीज़ल इंजन से। अब आप कहोगे तो ये कौनसा बड़ा फ़र्क हो गया? तो वो समझने वाली बात है कि भारत ने जो बनायी है पटरी उसपर ये इलेक्ट्रिक गाड़ी चलेगी। और इलेट्रिक इंजन की पटरी पर एक के ऊपर एक कंटेनर रख कर चलाओ तो बिजली की तारें भी तो फंस जाएंगी। इसलिए ये भारत में पटरी बनी है वो दुनिया में अनोखी बनाई गई है। इसकी तारें उतनी ऊचीं लगाई गई हैं कि गाड़ी डबल कंटेनर ले कर चल सके। पैसेंजर गाड़ियों वाली पटरी पर डबल कंटेनर लेकर नहीं जा सकते क्योंकि बिजली की तारें आ जती हैं बीच में। भारत ने पूरे कॉरिडोर पर बिजली की तारें ऊंची लगाई हैं, लगभग 7.5 मीटर ऊंची। इससे बिजली के इंजन से डबल स्टैक ट्रेनें चल सकती हैं। ऐसा पूरा फ्रेट कॉरिडोर, ऐसी पूरी रेल लाइन ही ऊंची तारों की हो, ये दुनिया के किसी और देश में नहीं है। और क्योंकि पूरी लाइन है ही मालगाड़ियों के लिए, तो ट्रेन की लंबाई भी डबल रख सकते हैं। लॉन्ग हॉल यानी लंबी दूरी तक माल ढोने के लिए ट्रेन में डिब्बे भी ज़्यादा लगाते हैं। तो डबल लंबाई और डबल ऊंचाई, तो एक ट्रेन अब चार सामान्य ट्रेनों जितना माल ले जा सकती है। स्पीड भी 100 km/h तक हो सकती है क्योंकि पूरी लाइन ही मालगाड़ी की है। पैसेंजर ट्रेनों के लिए रुकना ही नहीं है। पुरानी लाइनों पर मालगाड़ियां औसतन 25 km/h ही चल पाती थीं। ट्रक से जिस माल को पहुंचने में 30 घंटे लगते हैं, वही माल अब इससे 10-12 घंटे में पहुंच जाता है। तो फ़ायदा हर लेवल पर है। आप ये देखो कि पहले लॉजिस्टिक्स यानी माल ढोने का खर्च देश की जीडीपी का लगभग 14% था, जो बाक़ी देशों से बहुत ज्यादा था। यानी हमारे यहां ज़्यादातर सामान की क़ीमत का बड़ा हिस्सा तो उसकी ढुलाई के ख़र्चे का होता था। अब ये घटकर 8-9 % के आसपास आ रहा है। माल सस्ता भी पहुंचता है और जल्दी भी पहुंचता है। किसानों का अनाज हो, फ़ैक्टरियों का माल हो, कच्चा माल हो, तैयार सामान हो, सबमें फ़ायदा है। और लोगों को रेल का सीधा फ़ायदा तो ये कि पुरानी रेल लाइनों से मालगाड़ियां हटने से बाक़ी यात्री ट्रेनें ज्यादा चलाई जा सकती हैं और टाइम पर चल सकती हैं। क्योंकि ये भी प्रॉब्लम खड़ी हो गई थी कि दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूट पर यात्री बढ़े जा रहे हैं और वो वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए पैसा देने को भी तैयार दिख रहे हैं लेकिन पटरियां ही इतनी नहीं थीं कि और ट्रेनें चला सकें। तो पटरियां तो और बिछाने की ज़रूरत थी है। यानी जितनी ट्रेनें चल सकती थीं उससे कहीं ज्यादा ट्रेनें दौड़ रही थीं पहले ही पटरियों पर इन रूट पर। इस वजह से नई यात्री ट्रेनें शुरू करना मुश्किल हो जाता था। जगह ही नहीं बचती थी। मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें एक ही पटरी पर दौड़ने के लिए आपस में लड़ती रहती थीं। यात्री ट्रेनों को निकलने का रास्ता दो तो मालगाड़ियां और धीमी हो जाती थीं, और भीड़ और बढ़ जाती थी। तो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का एक बड़ा मकसद यही था कि मालगाड़ियों का बड़ा हिस्सा इन नई लाइनों पर चला जाए, ताकि पुरानी लाइनों पर जगह खाली हो और नई यात्री ट्रेनें चलाई जा सकें और भीड़ कम की जा सके। अब ये फायदा दिखने लगेगा ये उम्मीद है। और बिजली से चलने वाली ये ट्रेनें प्रदूषण भी कम करती हैं। रोज 440 से ज्यादा मालगाड़ियां अब इन लाइनों पर दौड़ रही हैं। भारत अब रेल से माल ढुलाई में चीन के बाद दुनिया का नंबर दो देश बन गया है। अमेरिका के पास भी बहुत बड़ा रेल नेटवर्क तो है लेकिन वहां ज्यादातर निजी कंपनियां है रेलवे की और वो डीजल इंजन से माल ढोती हैं। चीन के पास और भी लंबी फ्रेट लाइनें ज़रूर हैं लेकिन इस तरह का पूरा बिजली वाला डबल स्टैक वाला कॉरिडोर इतने बड़े पैमाने पर चीन के पास भी नहीं है। भारत ने ये नया ट्रैक बिछाकर, ऊंची तारें लगाकर, और भारी ट्रेनें चलाकर एक नई मिसाल कायम की है। ये दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी योजनाओं को भी ताकत देता है। आगे और कॉरिडोर बनाने की योजना है। यानी ये सिर्फ रेल लाइन नहीं है, ये देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। ये पूरा सायकल है। माल तेज़ पहुंचेगा तो कारख़ाने बढ़ने की उम्मीद है, कारख़ाने बढ़ेंगे तो नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है, निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। मतलब कुल मिलाकर मक़सद ये है कि भारत विश्व व्यापार में और मज़बूत होकर उभरे। क्योंकि सबसे बड़ी लड़ाई तो मैन्युफ़ैक्चरिंग बढ़ाने की है, कारख़ाने बढ़ाने की है। और उसके लिए जो सब कुछ करना है उसमें मालढुलाई एक बहुत अहम हिस्सा है। इसलिए ये नहीं समझना चाहिए कि हमारा इससे क्या लेना-देना ये को उद्योग धंधे वालों की ख़बर है। नहीं, ये सब के मतलब की ख़बर है। गाड़ी सबकी पटरी पर आनी चाहिए। सौ बात की एक बात।
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GDP Numbers: Real Or Fudged?
@szarabi looks at India’s economic journey since the reforms, highlighting how successive governments have followed the same numbers and explaining how GDP is estimated and re-estimated throughout the year.
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