हर फलसफा,
तक़दीर पर दिखता भारी है
होता नहीं है वो इतना
बस दिखता भारी है
कुदरत की ये,रस्म अदायगी है
इसको,जिसने समझा वो भारी है
पता कर लेना सब मिल कर
हर हुनर,हर इल्म
हर जुल्म पर होता भारी है
डरना नहीं जुल्म से
जुल्म का कोई रास्ता स्थिर नहीं
कब किस दशा में
किस दिशा से निकल भागे
नजाने कितनी बार, समंदर की
गहराईयों को नापने की कोशिश में
दिल_दिमाग को दाव पर लगा बैठे लोग l
बिना तैराक बने , डूब बैठे लोग l
उनकी कशमकश से बाहर निकल
पाना हो समंदर को, तैराक उत्कृष्ट बन l
समंदर भी तुझे दिल दे बैठेगा
तुझे हर रोज किनारे पर ला टैकेगा l
#दिल_की_आरज़ू
वो जो हर शाम_ए_महफ़िल में
तेरे रुकने,मेरे रहने की ख्वाईश थी l
आज भी दिल की अंगड़ाई में
जस की तस ज़वा ही दिखती है l
ख़ामोशी की छुपी दास्तान में
थोड़ी धड़कने, मेरी बढ़ा देती है l
#दिल_की_आरज़ू
दिख रहा नजरों में उसके
जैसे प्रेम हो मुझसे उसको
देख रहा आईने में उसके
मन्द मन्द मुस्कान में डूबे खुद को
जो यथार्थ से जीवंतता रखते है l
वे हर शख्स को प्रेम से,प्रेम में रख
कहते हैं
उन हसरतो से ज्यादा
खुद को संचित करो
जो दिखती भी नहीं और
बिकती भी नहीं
#प्रेम_डोर
#दिल_की_आरज़ू
वो जो लहर
मेरी ओर झाँक रही है l
मुझे रिझाने,
पास बुलाने आ रही है l
शायद वो मुझसे
प्रेम कर बैठी है l
मैं किनारे,
पकड़े सहारे
देखता उसको l
उसकी रहबरी में
सुकून के दो पल
मिलते मुझको l
उसकी सुगंध,
उसकी महक
उसका अपनत्व
घेरता मुझको है l
ठहर कर बात करने के...
#दिल_की_आरज़ू
वो ऊँची ऊँची सीढ़ियों में
चढ़ती हमारी अभिलाषा गुज़रती हर
नफ़रत, हर हरकत, हर दंभ को तोड़ती है
हमें झुका कर हमारी कमर को पूरा निचोड़ती है हमारी सांसे गिनने के लिए हमारे
मस्तिष्क को लालायित करती है
मन में ठान कर शान से चढ़ाई में गुरूर,दंभ,लालसा,नफ़रत से रोज लड़ते है
#दिल_की_आरज़ू
मेरी आरज़ू
चन्द अल्फाज़ है l
कर्म से जो बनी किस्मत
उसमें शान है l
वक्त के पहिये हमें हमारी
मंज़िल पर पहुंचा देते है l
जो मेहनत हमनें कि उस पर
दिलों के एहसास जुड़वा देते है l
खैर दिल में कभी किसी से बैर नहीं
जो मिला मुझे वो मेरा ही यकीन ज़मीं
#दिल_की_आरज़ू
आँखों में एक चित्र उभरा है l
समझ है हमें वो
हमसे गुरूर पाले खड़ा है l
हर बार देखने निकलता हूँ उसको
जाने क्यों छिपने का उसने बहाना ढूँढा है l
वो तन्हा समझ बैठे है हमें
उनको लगता है कि हम बेवजह बैठे है l
उन्हें क्या मालूम हमारी
चलने की रफ्तार कब से चल रही है l
#दिल_की_आरज़ू#प्रकृति_का_संरक्षण
ये दौर वो दौर सब चल रहा है l
दौडता दिखता हम सबको है
वो बस चल रहा है l
कितना भ्रम फैला हुआ है l
जीवन में सबके दौड़ने का
उसको समझ लो तो लगता है
वो बस चल रहा है l
आपाधापी में
अक्षर भटकाता दिखता है
पर वो बस चल रहा है l
जीवन कितना मज़ेदार है
#दिल_की_आरज़ू
नव वर्ष के उपलक्ष्य में
देश के समस्त साथियों को हार्दिक शुभकामनाएं
जीवन की गुणवत्ता केवल उसमें है
जो हर क्षण आत्मीयता रख,
आत्मविश्वास जगाए रहता है
तनिक भी विचलित हुए बिना लोगों को
लौह पुरुष कि भांति जोड़कर चलता रहता है
हर नया दौर दिलवालों का ही होता है
#दिल_की_आरज़ू
इश्क़ में है सात समंदर
बदलते रिस्तों में इश्क़ का होना जरूरी है
उसे पाना और उसे साथ रखना जरूरी है l
आज सब तल्खी से बात करते है
और इश्क़ को पाना जबर्दस्ती समझते है l
समझ लो इश्क़ बस दुलार से मिलेगा l
जिसमें दुलार नहीं
वहाँ इश्क़ का वातावरण नहीं दिखेगा l
#दिल_की_आरज़ू
थामकर अपनी वो आरज़ू
ठहर कुछ देर जरा मेरे पास l
बतियाने के खूब दिन है पड़े
एक दिन बैठ मेरे पास,बन खास l
नज़रों में भरने की तम्मना है मुझे
काम धाम छोडकर आ मेरे पास l
वक्त को घसीटने से अच्छा है
सुलझा अधूरी हसरतें और बता राज l
मिल कर दूर करेंगें
ग़म को खुशी में .....
वे दिखते नहीं, नजदीक हमें अब
पता नहीं क्यों दूर है उनका मन अब
वे शहर के
शासन की व्यस्तता बनाने में लगे है l
हमें अपनी किताबों में रमा कर
खुद अपनी नौकरी बचाने लगे है l
समय व्यतीत कर लेते है हम
मोल तोल को छोड़
दिल पाकीजा रख और कर लेते है हम l
सर्दी का दिखने लगा है असर
फिर भी देखो कितना मखमली शहर है
मेरे लिबास में उसका कुछ तो है असर
बस ढक लेता हूँ जब दिखता शहर_शहर है l
हर दौर के रहनुमा बहुतेरे है मगर
बस मेरे जैसा कोई असर छोड़ता किधर है l
वक्त वक्त की बात है प्यारे पर
फिर अधूरी रही कहानी को कहता कोई किधर है l
#दिल_से_दिल_तक#दिल_की_आरज़ू
भटकता मुसाफिर हो
या भटकता प्यारा हो
राह में जब हमसे मिले
तो कोई परेशा क्यों हो
खिलखिलाहट के साथ
हमारा उसका साथ हो
उसका हाथ पकड़े हम तो
महसूस पीठ का सहारा हो
मेरे साथ जुड़े हर व्यक्ति में
ज़िन्दगी को पुनः जीने का आभास हो
दिवाली के पावन पर्व की
सभी देश वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं l
रंग बिरंगे दीप सुसज्जित,प्रज्वलित है l
हर भावना को करते समावेशित है l
हर कण की आधारशिला एक है l
हर धर्म जाती पंत सम्प्रदाय बस एक है l
रंग की आधारशिला एसी है l
दिखते रंग बिरंगे है पर लौह का दीपक एक है l
वो जो दिख रही है l
उल्लास से भरपूर है l
मेरे हौसले की रहबरी में
वो क़ायनात में खिल रही है l
बहती हवा के वेग की
छाया उस पर पड़ रही है l
महसूस होते शरीर पर
सिरहन बन उठ रही है l
वैसे उसके उठते पैरों के
निशान बता रहे है l
मेरे तकदीर के बंद दरवाजों को
वो धीरे धीरे खोल रही है l
#जय_हिंद_वन्दे_मातरम#सत्यमेव_जयते
भटकते नौजवान
भटकते है हर शाम
सरकारों ने दिया है
मोबाइल पर बेशुमार उधार,
पी गए सब की ये फ़र्जी शराब
कर गया बेघर मां बाप को
लिख गया है सबको
समझ लो इनको
कर दिया दोनों को भी दान
बेरोज़गारी का आलम है
दंगों में मिलते कुछ पैसे उधार है
वक्त की जरूरत को साध ले
कितनी जद्दोजहद की, कि जिंदगी महफ़ूज़ रहे
उसमें से कुछ ख़ुशी के पल को साथ ले l
इतिहास नई इबारतें लिखने का है l
कल कुछ था या नहीं
आज मिल कर एक मुक़ाम
अपना तैयार करने का है
आओ मिल कर संघर्षों से
ओतप्रोत जिंदगी में कुछ
हँसगुल्ले रसगुल्ले को अपना ले l