BAMS, BHMS, BUMS या अभ्यासक्रमांच्या विद्यार्थ्यांसाठी केंद्र सरकारकडून National Exit Test (NExT) परीक्षेचे आयोजन केले जाणार आहे. परंतु हा निर्णय घेताना सरकारकडून विद्यार्थ्यांना विश्वासात न घेताच २०२१ च्या बॅचपासून सदर परीक्षा अनिवार्य करण्यात आली आहे. वास्तविक पाहता, MBBSच्या विद्यार्थ्यांसाठी २०२४-२५ पासून ही परीक्षा अनिवार्य करण्यात आली होती. परंतु NMCने सदर परीक्षा पुढे ढकलत MBBS विद्यार्थ्यांना न्याय देण्याची भूमिका घेतली आहे.
परिणामी, MBBSच्या धर्तीवरच BAMS, BHMS, BUMS या आयुष अभ्यासक्रमांच्या विद्यार्थ्यांना देखील सदर National Exit Test (NExT) परीक्षा २०२४-२५ पासून लागू करणे गरजेचे आहे. परिणामी, राज्य सरकारने तात्काळ या प्रकरणात लक्ष घालून केंद्र सरकारकडे आवश्यक तो पाठपुरावा करावा, ही विनंती.
@Dev_Fadnavis
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पूरे देश ने बहुजन समाज की एकता का जो जनसैलाब दिल्ली में देखा उससे एक बार फिर ये साबित हो गया-
"हक-अधिकारों की लड़ाई में निमंत्रण नहीं भेजे जाते, जिनका ज़मीर ज़िंदा हो, वे खुद दौड़े चले आते हैं।"
देश के हुक्मरानों की नाक के नीचे देश की राजधानी में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के साथ लाखों बहुजन योद्धाओं ने बहुजन एकता की इस जंग में सिपाही की तरह अपनी जिम्मेदारी को महसूस करते हुए प्रण लिया कि–
1) जाति जनगणना के साथ ही आर्थिक जनगणना के लिए व्यापक आंदोलन चलाएंगे जिससे पता चल सके देश के संसाधनों पर कौन क���्ज़ा जमाए बैठा है?
2) ओबीसी वर्ग के लिए 27% के अतिरिक्त 15% और शेड्यूल्ड कास्ट (एससी) के लिए 15% से अतिरिक्त 10% आरक्षण बढ़ाने के प्रावधान की मांग के लिए सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष।
3) SC-ST में क्रीमीलेयर ढूंढने के नापाक मंसूबों को तो किसी कीमत पर कामयाब होने ही नहीं देंगे। साथ ही OBC के जबरन क्रीमीलेयर के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।
4)सरकारी नौकरियों में बैकलॉग(जो लाखों की संख्या में है) पूरा कराकर छोड़ेंगे।
5) निजी क्षेत्र में SC/ST व OBC को आरक्षण की पूर्ण व्यवस्था के लिए पुरज़ोर प्रयास करेंगे।
6) सफाईकर्मी की नौकरी में ठेकेदारी समाप्त कर पक्की नौकरी देने और गटर में उतरने की अमानवीय व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कराने किए संघर्ष करेंगे।
7) समान कार्य समान वेतन के लिए प्रतिबद्धता।
8) SC/ST व OBC को प्रमोशन में रिजर्वेशन।
9) 2 अप्रैल 2018 के सभी मुकदमे वापस होने तक संघर्ष।
10) पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
और अंत में, सरकार की तरफ से दलित समाज की एकता को बांटने का जो प्रयास किया गया है उसके खिलाफ हर स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा जिससे की समाज के हर व्यक्ति को सरकार के षड्यंत्र से वाकिफ कराया जा सके।
नमो बुद्धाय, जय भीम, जय मंडल, जय जोहार।
अनुसूचित जाति में सब-कैटेगराइजेशन संभव नहीं है। ये वो जातियां हैं, जिन्हें भारत के संविधान में शेड्यूल किया गया है, और इसका आधार छुआछूत रहा है। आज भी इसके आधार पर भेदभाव होते हैं तो क्रीमीलेयर का प्रावधान कैसे किया जा सकता। आप मुख्य��ंत्री बन गए, आप आईपीएस ऑफिसर बन गए और तब भी आपके साथ भेदभाव होता है, तो क्रीमीलेयर का प्रावधान अनुसूचित जाति में कैसे संभव है : @iChiragPaswan
लोग कितने स्वार्थी हो गए हैं. ट्रेन में बैठते ही इनको वर्ल्ड क्लास सुविधा चाहिए.
इनका बस चले तो नाश्ते में महंगा मशरूम मांगने लगें और दिन में तीन-चार जोड़ी नए कपड़े भी.
लग्जरी लाइफ चाहिए, हजारों करोड़ का प्लेन चाहिए.
देशद्रोही कहीं के
एससी का विभाजन करो, EWS का विभाजन करो, ओबीसी और एसटी का विभाजन करो. जो करना है करो. पर संसद से करो. सरकार करे. गड़बड़ी होगी तो सरकार की गर्दन जनता चुनाव में पकड़ लेगी. नियम कानून बनाना संसद का काम है.
कोर्ट को ये सब करने की जरूरत नहीं है. वह अपना काम करे. सुप्रीम कोर्ट में 80,000 केस पेंडिंग हैं. क्रिसमस की 17 दिन की छुट्टी लेना बंद करे कोर्ट और अपना काम करे. वेतन लेते हैं जज. काम न करें तो वेतन काट लेना चाहिए.
एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के गलत फैसले के कारण इतना बड़ा हंगामा हुआ. पूरा भारत बंद रहा. 12 लोग मारे गए थे. संसद को कानून बनाकर कोर्ट के आदेश को निरस्त करना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट ने बाद में अपना गलत फैसला वापस भी ले लिया.
कोर्ट अब दोबारा आग से खेलने जा रही है. कोर्ट, कोर्ट का काम करे. कानून बनाने के लिए संसद है, सरकार है.
एससी का विभाजन करना है तो सरकार करे. सरकार कोर्ट के चोर दरवाजे से ये काम न करे. सामने आए और जो करना है संसद में पारित करके करे. सरकारी वकील कोर्ट में इस ���ामले पर बकवास न करें.