सुधीर चौधरी पर दर्ज एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमें में अविलंब कानून अपना काम करें नहीं तो समाज अपना काम करेगा। सुधीर चौधरी इस बार अपना भ्रम निकाल दें की प्रधानमंत्री मोदी उन्हें कार्यवाही होने से बचा लेंगे क्योंकि इस बार आपका पाला आदिवासी समुदाय से पड़ा है। #ArrestSudhirChaudhary
'देश काग़ज़ पर बना
नक़्शा नहीं होता
कि एक हिस्से के फट जाने पर
बाक़ी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें
और नदियाँ, पर्वत, शहर, गाँव
वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें
अनमने रहें।'
~ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
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{Courtesy : @kavitaaayein}
मुझे यात्रा पसंद हैं,
हर एक यात्रा के बाद घर लौटना पसंद है।
घर लौटकर माँ से पूरे अधिकार से,
जिद करना भी,
की वो मेरे लिए थोड़ा खीर बना दे।
एक माँ ही तो हैं,
जो आज भी मेरे बचपने को झेल लेती हैं,
जमा चौबीस बरस बीते हैं
पर एक माँ ही तो हैं,
जिसके सामने मैं आज भी वोही हूँ,
जो हर बार गिरकर, हर बार चोट खाकर
रोते हुए, माँ के पल्लू से लिपट जाता था।
कल माँ बोली-
तू अब उदास क्यूँ रहता हैं?
इसका कोई जबाब मेरे पास नही था,
इस सवाल को मैने बस एक झूठी मुस्कराहट के साथ टाल दिया।
अब मैं जीवन से
कुछ नहीं मांगता।
केवल उसे कविताएं देता हूँ,
अधूरी कविताएं!
कविताएं! जिन्हें
कभी जीवन के पूरा न होने दिया।
मेरी अधूरी इच्छाओं के बोझ तले,
घुटती अधूरी कविताएं।
मैं अब जीवन को,
दम तोड़ती कविताएं देता हूँ।
-Manish
मैंने कभी तुम्हें नहीं पुकारा
पर हाँ! तुम्हें बिना पुकारे
मैं तुम्हारी ओर दिखता रहा
देर तक
काफी देर तक
सूरज डूब गया दिन ढल गया
मौसम बदल गया
आसमान का रंग भी बदला था शायद
पर पूरा शहर दौड़ता रहा
अपने काम में व्यस्त रहा
वो शहर नही रुका
रुक तो केवल मैं था
वहीं जहाँ अकेला केवल मैं था।
अगर मैं
रोक पाता तो
मैं रोक लेता,
हर उस चीज़ को जाने से।
जिन्हें मैं खुद से दूर नही
होने देना चाहता।
जैसे मैं!
रोक लेता मेरे बचपन को।
उसे रोक मैं फिर
एक बार नासमझ बन जाता।
जैसे मैं!
रोक लेता उन पलो को।
जिसमे मैं कभी सच में
मुस्कुराया था।
-Manish
यक्ष -
परम सुख की अवस्था क्या है ?
युधिष्ठिर -
मूर्खता के साथ प्रचंड आत्मविश्वास का होना |
यक्ष -
और परम दुःख की अवस्था ?
युधिष्ठिर -
ऐसे किसी परम सुखी से पाला पड़ना |
यक्ष - आंय !
ये जानते हुए
की तुम नही लौटोगी कभी।
ये मानते हुए
अब तुम मुझे अपना नही मानोगी कभी।
मेरी दिल फिर
क्यों तुम्हें ढूंढता हैं?
ये न चाहते हुए
हर बार, क्यों तुम्हें चाहता है?
-Manish