By profession, I am an engineer in the healthcare sector.
The more I learn and interact with people, the stronger my desire to continue learning grows.
गोदी मीडिया आपको ये ख़बर नहीं दिखाएगा लेकिन ये ख़बर बेहद जरूरी है.
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में बुंदेलखंड के लोग पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूँ नहीं रेंग रही है.
“इंसाफ दो… वरना मौत ही दे दो!”
मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में आदिवासी समाज अपनी ज़मीन, घर, जंगल, संस्कृति और अस्तित्व को बचाने के लिए ‘चिता आंदोलन’ करने को मजबूर है,
पर सरकार सुनने का नाम नहीं ले रही है।
NEET STUDENT FEELS INDEBTED SEEING SONAM FIGHT FOR THEM 🙏
AJIT ANJUM: Why did you come here?
STUDENT 🎯: To support Sonam Wangchuk sir. He is on hunger strike for students, for youth, for India. I do not know how we can ever repay him.
AJIT ANJUM: Did paper leaks affect you too?
STUDENT: Yes. After NEET, the stress was unbearable. You study, but fear keeps haunting you: what if the paper leaks again?
AJIT ANJUM: Will you come on 20 July?
STUDENT 🔥: Yes. We will not stop. This is about accountability.
BJP Leader Rajesh Yadav:
"Who is Sonam Wangchuk,hai kaun ye??
China ka dalal hai ye Sonam,he is a chinese agent,doing anti India activities in Delhi through Chinese Funding
We'll finish them soon under BJP govt, there is no Paper leak issue in India"
Anyone who goes against BJP is either Chinese agent or Soros fundedfor these scum dwellers
वे समझदार लोग थे जो चुप रहे : वीरेन भाटिया
वे समझदार लोग थे
जो चुप रहे
वे
समझदार लोग थे
जो चुप रहे
वे वर्तमान के कुछ बड़े चुप्पों को जानते थे
चुप के उनके गणित को जानते थे
जानते थे उनके हासिल
जो चुप्पियों का इनाम थे
जो चुप रहे
वे समझदार लोग थे
हासिल के जमा-घटा के प्रवीण लोग थे वे
उन्होंने अपने बच्चे देखे
उनके सुख देखे
उनकी तरक्की देखी
उनके लिये सुरक्षित भविष्य चाहा
उन्होंने सुविधा देखी
भौतिक सुखों का पहाड़ खरीदा
उसके ऊपर बैठ खुश होते रहे
उनकी चुप्पी
वर्तमान का गणित थी
और सुरक्षित भविष्य की चाहना थी
भविष्य में उतरते जीवन मे मगर
वे सुखों के पहाड़ के नीचे
दबे पाए गए
उनके बच्चे दुनिया के कायर बच्चे साबित हुए
संवेदनाओं की जब सबसे अधिक जरूरत थी चुप्पों को
तब उनके इर्द गिर्द भीड़ तो थी
संवेदना नही थी
वे भीड़ में घिरे अकेले लोग थे
वे समझदार लोग थे
जो चुप रहे
उन्होंने बोलने वालों को मूर्ख कहा
लड़ने वालों को आतंकी, उपद्रवी,
विद्रोही, देशद्रोही कहा
अंतिम समयों में मगर
वे बोलने वालों को पढ़ रहे थे
लड़ने वालों से सीख रहे थे खड़ा रहना
अपने मायूस दिनों में अकेलेपन में घिरे वे
बोलना चाहते थे
आवाज लेकिन
गले मे दबी रही
और वे
बिना अभिव्यक्त हुए
दुनिया से रुखसत हुए
चुप लोगों का खुद को अभिव्यक्त न कर पाना
उनका सबसे बड़ा दुख था
वे अंतिम समय मे जान पाए
कि जिसे वे समझदारी का गणित कहते थे
दरअसल वह कायरता थी ।
~~वीरेंदर भाटिया
आवाज ~~ राजेन्द्र गुप्ता
#SonamWangchuk ♥️♥️🙏🙏🇮🇳🇮🇳
गंगा नदी को बचाने के लिए एक पर्यावरणविद और IIT प्रोफेसर जी.डी अग्रवाल जी ने 111 दिनों तक आमरण अनशन किया था। वो कहते रह गए कि मुझे मालूम है हम कैसे गंगा को बचा सकते हैं, लेकिन उन्हें सुना ही नहीं गया। 2018 में एम्स ऋषिकेश में उनका निधन हो गया। 17 दिन से एक और व्यक्ति अनशन पर बैठा है, लेकिन किसी को फर्क नहीं पड़ रहा।
भगत सिंह बनेंगे तब भी अनसुने किए जाएँगे, गांधी बनेंगे तब भी। मूक बने रहिए!
🚨 BREAKING : Purav Jha stands with Sonam Wangchuk.
While many big creators chose
silence,
Purav Jha chose courage.
It takes a spine to stand for the truth. 💪🇮🇳
प्रोफेसर जीडी अग्रवाल!
IIT रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पर्यावरण में Ph.D. और आईआईटी कानपुर के HOD रहे!
चाहते तो विदेश में ऐश की जिंदगी जी सकते थे लेकिन उन्होंने इस देश के कृतघ्न लोगों के लिए लड़ना चुना।
न जाने क्यों उनका दिमाग फिरा कि इस देश को बचा लें तो वह गंगा को बचाने के लिए अनशन पर बैठ गए।
लेकिन हमें गंगा थोड़े ही बचानी थी, हमें तो गंगा के नाम पर चल रहे धंधे को बचाना था! नतीजा? 111 दिन के अनशन के बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
इस महान विचारक की शहादत इस देश के दलाल मीडिया, उन्मादी लोगों और खोखले राष्ट्रवाद के शोर में बस एक छोटी सी खबर बनकर दब गई।
मुख्यधारा का मीडिया धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक नूराकुश्ती बेचने में व्यस्त रहा और इस व्यवस्था ने उन्हें चुपचाप निगल लिया।
हम सब मरेंगे क्योंकि हमने कभी सही लोगों को नहीं पहचाना। हम बस दलालों को सिर आंखों पर बिठाते रहे और देश को बचाने निकला एक सच्चा इंसान घुट-घुट कर चला गया।
भाजपा अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके भाजपा शासित राज्यों विशेषकर प. बंगाल में राजनीतिक हिंसा का विषैला वातावरण बना रही है और पुलिस का राजनीतिकरण कर रही है। इस नकारात्मक-प्रहारात्मक व्यवहार से पूरे देश की जनता बेहद नाराज़ और आक्रोशित है। यहाँ तक कि भाजपा के अपने नेता और कार्यकर्ता तक इस तरह के हिंसक हमलों के ख़िलाफ़ हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आज जहाँ उनकी सरकारें नहीं हैं, वहाँ भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के ऊपर अगर ऐसा प्राणघातक हमला होना शुरू हो गया तो क्या होगा या फिर कल को उनकी सरकार जाने के बाद क्या होगा। भाजपा के बड़े नेता तो सुरक्षा घेरे में ख़ुद को बचा लेंगे लेकिन आम कार्यकर्ता को सड़क पर जनाक्रोश का शिकार होने के लिए छोड़ देंगे।
माननीय न्यायालय एवं लोकसभा अध्यक्ष तत्काल संज्ञान लें।
घोर निंदनीय!
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