Unbeliebable.
1. This is NOT the Gayatri Mantra. It is Shikshavalli, first chapter of Taittriya Upanishad.
2. The shlok is our civilisational Vedic code which prepares students for learning. This is not some petty religious claim that my God is better than yours.
Ignorance and bigotry in one tweet.
An interesting article by @ShamikaRavi which highlights how women MPs are making our democracy more vibrant and are also focusing on vital sectors like healthcare, education, infrastructure and more. This is a very encouraging trend which also exemplifies how the Nari Shakti Vandan Adhiniyam will further strengthen people’s voice.
https://t.co/PfXY9afyGD
The person on the television screen is Israr Ahmed, a Pakistani Islamic leader.
He spread the idea of Ghazwa-e-Hind to the people of Pakistan, especially youngsters.
He also incited violence against Jews. Infact, Texas Synagogue attacker was inspired by lectures of Israr Ahmed.
The same Supreme Court that threw #NupurSharma publicly to the wolves is now refusing to act against Udhayanidhi Stalin for his hate speech against Hindus! India’s judiciary is #antihindu. RT if you agree! https://t.co/LQgYNB5VbD
ईश्वर को मनोरंजन का पात्र समझ लिया है कुछ लोगो ने...?
उत्तर भारत में गणेश विसर्जन नही करना चाहिए क्योंकि गणेश जी केवल एक सप्ताह के लिए माता गौरा के साथ उत्तर से दक्षिण अपने भाई कार्तिकेय जी से मिलने गए थे,
मान्यता अनुसार दोनो भाई महाराष्ट्र मे मिले थे,
इसीलिए महाराष्ट्र में ये पर्व मनाया जाता है तथा उन्हें फिर अगले साल आने का निमंत्रण दिया जाता है, उत्तर भारत में गणेश जी सदा विराजमान रहते है,
जरा सोचिए,
अगर आप गणेश जी विसर्जित करके कहेंगे की अगले बरस तू जल्दी आ, तो फिर आप दीपावली पर किसका पूजन करेंगे,
कुछ त्योहारों का भौगोलिक महत्व होता है,
भेड़ चाल न अपनाएं
पूजा करिये लेकिन तरीक़े से भेड़चाल से नहीं 🙏🚩
निवेदक: #Rana
चलिए, यह तो स्पष्ट हो गया है कि दानिश अली हरामीपना ही दिखा रहा था जिस पर बिधूड़ी जी को आगे आना पड़ा। उसने पहले PM को, जो कि उसी लोकतंत्र के मंदिर का सर्वोच्च पद है, नीच कहा। जब किसी ने आपत्ति जताई तो कहा कि ‘नीच को नीच नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे’।
इसी पर सम्माननीय बिधूड़ी जी ने उसे उग्रवादी, आतंकवादी, मुल्ला और कटुआ जैसे संबोधनों से पुकारते हुए शांत कराने की चेष्टा की। क्या @narendramodi निचली जाति से आते हैं इसलिए वो इस मुस्लिम के लिए ‘नीच’ हैं?
मैंने तब भी कहा था कि बिना किसी उकसावे के कोई व्यक्ति ऐसा कर ही नहीं सकता। दानिश अली को आजीवन संसद से प्रतिबंधित किया जाए और जातिसूचक टिप्पणी करने के लिए हरिजन एक्ट के तहत दंड मिले।
"जस्टिस जी डी खोसला" वो "जज" थे, जिन्होंने "नाथूराम गोडसे" केस की सुनवाई की थी और नाथूराम गोडसे को फांसी की सजा दी थी l
गोडसे को फांसी पर चढ़ाने के बाद जज साहब, अपनी किताब "द मर्डर ऑफ महात्मा एन्ड अदर केसेज फ्रॉम ए जजेज़ डायरी" में पेज नंबर 305 -06 पर लिखते है कि :-
Army dog Kent laid down her life while shielding its handler during operation in Rajouri, J&K
Kent was leading column of soldiers on the trail of fleeing terrorists. It came down under heavy hostile fire
Till now, 1 terrorist killed
Thank you Kent for serving nation. Om Shanti
Pawan Kalyan in his speech clearly states 👇🏽
We should identify ourselves with name Bharat because it is an original name of our country
India is the name given by foreign rulers ( Britishers)
We need more and more people like him 🔥🔥
#WATCH | Indian Space Research Organisation (ISRO) launches #Chandrayaan-3 Moon mission from Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota.
Chandrayaan-3 is equipped with a lander, a rover and a propulsion module.
चीटी को खाना खिलाने के लाभ.....
सनातन संस्कृति में पशु पक्षियों, मछली, कछुओं एवं, सरी सर्प का भी बहुत महत्व है। इस धर्म में हर जानवर को मुख्य माना जाता है.. यह जानवर किसी ना किसी देवी-देवता की सवारी भी होते हैं।
हम चीटियों को हर समय नजरअंदाज करते हैं, उन्हें पैरों तले कुचल देते हैं, चीटी बहुत ही परिश्रमी और एकता से रहने वाली जीव है, सामूहिक प्राणी होने के कारण चीटी सभी काम बांटकर करती है।
चीटियां दो प्रकार की होती है, लाल और काली। इनमें लाल चीटी को अशुभ और काली को शुभ माना जाता है।
चीटियों को भोजन खिलाने का महत्व....
हजारों चींटियों को प्रतिदिन भोजन देने से वे चीटियां आपको पहचानकर आपके लिए अच्छे भाव रखने लगती हैं और दुआ देने लगती हैं।
चीटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है
लाल चींटियों की कतार को मुंह में अंडे दबाए निकलते देखना शुभ है, इससे सारा दिन शुभ और सुखद बना रहता है।
रिण यानि कर्ज से परेशान लोग चीटियों को चीनी और आटा डालें ऐसा करने पर कर्ज उतरता है।
चीटियों को खाना खिलाने के फायदे....
चीटियों को शक्कर /चीनी मिला आटा डालने से इंसान हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है।
हजारों चीटियों को रोजाना भोजन डालने से वे आपके लिए अच्छा भाव रखने लगती है और दुआ देने लगती है।
चीटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है l
कर्ज से परेशान लोगो को चीटियों को चीनी और आटा डालने से उनको राहत मिलती है और उनका कर्जा उतरने में आसानी रहती है।
किस जानवर को क्या खिलाएं...
गाय को शुद्ध आहार, गुड़, सेंधा नमक, शुद्ध रोटी या चारा खिलाने से देवता प्रसन्न होते हैं और पुण्यों का संचय प्रारब्ध में होता है lदेवता ही सुख समृद्धि देते है अतः गौ रक्षा एवं सेवा सुख समृद्धि को आमंत्रित करती है इसमे कोई संशय नहीं है l
कु.त्ते को दूध, भोजन या रोटी खिलाने से आपके दुश्मन दूर रहेंगे।
कौए को दाना रोटी या भोजन डालने से आपके पितृ प्रसन्न रहेंगे।
पक्षियों को दाना डालने से व्यापार-नौकरी में लाभ होगा।
मछली को खिलाने से समृद्धि बढ़ेगी।
भेसा, बकरा, मेढ़ा, ऊंट एवं बिलाव को आहार देने से पाप
कटते है क्योंकि ये तामसिक प्रवृतियों (क्रोध, काम, मद, लोभ मोह) के प्रतिनिधि है l
मछली को आटे की गोलियाँ एवं आहार देने से पाप कटते है और बड़ा पुण्य मिलता है जो सुख समृद्धि देता है क्योंकि ये वो जीवात्माये है जो गंगा माता की साधना करती है l इस सत्य को जानने के लिए गंगा स्तुति पढ़ें l
अधम योनि के प्राणियों की सेवा वैश्वानर यज्ञ अथवा भूत यज्ञ कहा जाता है l
सनातन धर्म में हर एक वस्तु और जानवर को महत्व दिया गया है। यह वस्तु और जानवर किसी ना किसी देवता या आस्था से जुड़े हुए है।
। जय श्री राधे कृष्ण ।
देवताओं का वास...
" गोचर भूमि हङप करने वाला महापापी " नर्कपाले तु चण्डाली काकमान्सं श्वचर्मणा।
चाच्छाद गोचररक्षोणीकृद्दृष्टभीतित ।।
अर्थात गायों के लिए गोचरभूमि छोङना महान् पूण्य और गोचरभूमि को नष्ट करना महापाप है
नमो ब्रह्मण्य देवाय गोब्राह्मण हिताय च ।
जगत् हिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः ॥
परोपकारी बनो एवं प्रभु का सानिध्य प्राप्त करो !
प्रभु हर जीव में चेतना रूप में विद्यमान है अतः प्राणियों से प्रेम करो !
परहित बस जिन्ह के मन माहीं। तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं॥
तनु तिज तात जाहु मम धामा। देउँ काह तुम्ह पूरनकामा॥
भावार्थ:- जिनके मन में दूसरे का हित बसता है (समाया रहता है), उनके लिए जगत् में कुछ भी (कोई भी गति) दुर्लभ नहीं है। हे तात! शरीर छोड़कर आप मेरे परम धाम में जाइए। मैं आपको क्या दूँ? आप तो पूर्णकाम हैं (सब कुछ पा चुके हैं)॥