रत्ना देवनाथ .. वो माँ जिसकी डॉक्टर बेटी का मेडिकल कॉलेज में रेप और मर्डर हुआ. बेटी के इंसाफ़ की लंबी लड़ाई लड़ी. फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ कर आज वे विजयी हुईं
आपके राज्य में 500Rs के टिकट का ब्लैकमेल करके 1500Rs में बेचा जा रहा वह भी वहाँ के पुजारी के हाथों। माता कामख्या के दर्शन के लिए स्पेशल कूपन को सीमित समय और सीमित संख्या का फायदा बाल्कमेल करके लिया जा रहा हैं । कृपया कर ऐसे करने वालो पर नकेल कासना बहुत ज़रूरी है @himantabiswa
"समानता वहीं खत्म हो जाती है जहाँ विशेषाधिकार शुरू होता है"
◆ भारतीय उद्योगपति हर्ष गोयनका ने कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर के फ्री IPL टिकट बयान पर दी तीखी प्रतिक्रिया
◆ यू.टी. खादर ने कहा था कि विधायकों को VIP गैलरी से मैच देखने के लिए खुद और अपने परिवार के लिए चार-चार मुफ्त IPL टिकट मिलने चाहिए
#HarshGoenka | Harsh Goenka | #IPL2026 | IPL 2026 | @hvgoenka
बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इस देश में रेप पीड़िता के साथ भी भेदभाव होता है।
झ���रखंड की बेटी है तो न नेता को कोई मतलब है न ही नेशनल मीडिया चैनल को
यही कोई दिल्ली/मुंबई जैसा बड़ा शहर होता या कई ऐसा राज्य जिससे राजनीतिक फायदा होता तो अबतक पूरे देश में बवाल मच गया होता।
गाजीपुर में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ, बच्ची को ब्लीडिंग हो रही थी,
लेकिन डॉक्टर्स ने पूरे नियम क़ानून को प्राथमिकता दी बगैर मेडिकोलीगल के बिना बच��ची को हाथ तक नहीं लगाया,
हाँ वो अलग बात है कि परिजन ख़ून बहती बेतहाशा बच्ची को रात 2 बजे से 10 बजे तक मेडिकल से लेके ट्रामा तक चक्कर लगाते रहे।
नियम से बढ़कर कुछ नहीं ब्लीडिंग हो चाहे मर जाये!!
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वो बच्ची 30 मिनट तक तड़पती रही थी। 'ठाकुर का कुआँ' कविता पढ़ने वाले नहीं बताएँगे कि उस बेटी को मारकर कुएँ में क्यों फेंका गया।
अब इस घटना को ऐसे पेश किया जाएगा जैसे ये कोई अपवाद हो। नहीं, ये इस नीलराष्ट्र में सामान्य बनाया जा रहा है। उस बच्ची को पहले भी परेशान किया जाता था, पुलिस-प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की होगी तभी तो नौबत यहाँ तक आन पहुँची। है ���? कार्रवाई हुई होती तो आरोपित जेल में होते और ये बच्ची आज जीवित होती। ये युवक गाँव की अन्य लड़कियों से भी छेड़खानी किया करते थे, हिम्मत नहीं हुई पुलिस-प्रशासन की कि इन्हें छुएँ भी। पहले भी धमकी दी थी, लेकिन शिकायत करने पर शायद पीड़ितों पर ही SC-ST एक्ट लग जाता।
"अगर कोई बोला तो घर में घुसकर सबको मार डालेंगे" - हत्यारे ने ये स्टेटस लगाया था WhatsApp पर। कहाँ ��ी पुलिस तब? अब जब मामला सोशल मीडिया में आ गया है तो डैमेज-कंट्रोल की कोशिश की जा रही है लेकिन 3 दिन में न एक नेता न कोई सामाजिक कार्यकर्ता पीड़ित परिवार का दुःख सुनने गया।
ये घटना ये भी बताता है कि शोषित-वंचित का जो रट्टा लगाया जाता है, वो झूठ है। लड़की सवर्ण परिवार की थी, लेकिन जलावन लेने के लिए गई थी क्यों परिवार ग़रीब है। खाना बनाने के लिए गैस भी नहीं है घर में। यानी, सिलिंडर तक ख़रीदने की ताक़त नहीं थी, इतने ग़रीब हैं वो लोग। वैसी लड़की जो घर का अंदर-बाहर के कामकाज भी करती थी पढ़ाई के साथ-साथ, वो बचाने की गुहार लगाती हुई चिल्लाती रही लेकिन किसी को सुनाई नहीं दिया।
जश्न मनाइए कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है, नई सरकार का गठन होने वाला है - 'ठाकुर की बेटी' तो कुएँ में जाती रहेगी।
Leave aside the media, liberals, feminists, blah blah, they have their own agenda. But it’s worth asking: how many general-caste MPs/MLAs have actually visited this poor Rajput family in Saran or spoken about their plight? I guess zero.
इस देश का मीडिया भी वही न्यूज कवर करेगा जिसमें जाति और धर्म का बढ़िया एंगल मिलेगा,
क्या देश की मेंस्ट्रीम मीडिया के लिए बिह���र में एक लड़की का पांच लोगों द्वारा रेप करना और मारकर कुएं में डाल देना मुद्दा नहीं है?
इ��ाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों को मेरा प्रणाम! यह आपके भविष्य की लड़ाई है, आपको हर तरह से लड़ना होगा। तंत्र आपके विरोध में है परंतु बिना लड़े घुटने टेकने से अच्छा है कि लड़ते हुए छात्र अधिकारों की बात हो। https://t.co/r4zzYRuBT7
कौन कहता है आसमा�� में सुराख नहीं हॉट? एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों:—-
UGC के नए नियमों को लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने खुलकर बयान दिया है।
अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ जो दशकों से ��ौन थे आपकी एकता ने उन्हें भी बोलने पर मजबूर कर दिया।
ओह! भाजपा लगी हुई है कि संसद सत्र के आरंभ का वीडियो सोशल मीडिया पर चल जाए, पर हो नहीं पा रहा।
जो तुम्हारे लिए निःस्वार्थ भाव से लिखते-बोलते थे, तुमने उसका उपहास किया, ताने कसे, बिका हुआ कहा, कॉन्ग्रेसी और डीप स्टेट एजेंट कहा, तो अब कौन लिखेगा तुम्हारे लिए?
तुम्हारे किस नेता/प्रवक्ता की (अपवादों को छोड़ कर) रत्ती भर की भी ऑर्गेनिक रीच है? जीवन मोदी जी के रीपोस्ट, वीडियो क्लिप्स के पोस्ट, पुष्पगुच्छ के आदान-प्रदान के फोटो लगाने में बीत रहा है, अब तुम्हें भ्रम है कि लोग तुम्हारे साथ हो लें?
‘वंदे मातरम्’ का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है, हम विपक्ष को पेलेंगे, पर आज नहीं। आज हमारे बच्चों क�� भविष्य की लड़ाई है जो तुम पतितों ने हमारे ऊपर लाद दी है। तुम चला लो नैरेटिव टुटपुँजिए औसत बुद्धि आइटी सेल के सहारे।
आजादी के बाद के देश के इतिहास में OBC वर्ग को इतना बड़ा राजनीतिक प्रतिनिधित्व कभी नहीं मिला जितना आज मिला है ---- राष्ट्र के सर्वोच्च पदों से लेकर स्थानीय निकाय और पंचायतों तक --- सत्ता में सबसे बड���ी भागीदारी --- फिर भेदभाव कहाँ ---- असमानता कहाँ ???
1. समिति का चूरन नहीं चाहिए, वापस लो, संशोधित करो
2. स्पष्ट लिखो कि किसी पर भी जातीय टिप्पणी, राजनैतिक नारेबाज़ी, दीवारों पर ग्रै���़िटी पर समान दंड होगा, कोई भी 'विशेष कर' जैसे शब्द नहीं
3. जाँच होने तक सुरक्षा दो, बच्चे निलंबित न किए जाएँ
4. कैंपस में पुलिस नहीं चाहिए, जब तक अपराध जघ���्य/गंभीर ना हो
5. झूठा केस बनाने वाले को कॉलेज से निकाला जाए, आर्थिक दंड और जेल (क्योंकि उद्देश्य भविष्य की हत्या होती है)