इंदिरा नूई को करारा जवाब देते हुए नरेंद्र मोदी,
इंदिरा नूई समझ ले ये देश मेरेटोक्रेसी से नहीं गधाक्रेसी से चलेगा। मोदी सरकार ने मेडिकल की परीक्षा में भी ओबीसी आरक्षण लागू करने का काम किया है।
@MediaHarshVT@Sanjay_Dixit धर्मेंद्र प्रधान को भूल गए आप? वास्तव में हम सब भटक रहे है। मोदी जी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। उनके स्थान पर योगी जी चाहिए।
“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान ANI हैंडल से डिलीट करा दिया गया है!
किस लॉबी ने डिलीट कराया @nitin_gadkari जी?
(Video posted by @AjitSinghRathi)
जो स्वयं ही चोरी करवा रहा हो...वो क्यों जागेगा। नेपेंद्र मिश्रा ( मोदी जी ने भेजा) उन्हें पूरी दाल ही काली लग रही है क्योंकि उन्होंने काली होने दी। अनिल मिश्रा ( पूर्व प्रांत कार्यवाह) , गोपाल राव ( क्षेत्रीय स्तर के प्रचारक) , चंपत जी को तो आप जानते ही है। इन सब ने योगी जी की लगा दी। मोदी जी के इशारे पर UGC लाकर सवर्णो को भड़काया गया। राम मंदिर में चोरी, प्रारंभ से चल रही थी। उजागर आज करवाया गया। किस लिए?? योगी जी को हराने के लिए।
#mohanbhagwat राम मंदिर चोरी पर कोई भी बीजेपी का नेता सफाई देने टीवी चैनलों पर नहीं आया। जानते हैं क्यों???
बीजेपी ने पहले संघ के अंदर की सुचिता को खत्म किया। एक ऐसी जीवन शैली का दर्शन कराया जिसका संघ(RSS) का कार्यकर्ता आदि नहीं था। फिर सभी संघ के प्रचारक ,कार्यकर्ता, भाजपा के प्रचारक और कार्यकर्ता बन गए। धीरे-धीरे उसी राजनीतिक शैली का अनुसरण करने लगे जो सत्ता प्राप्ति के लिए तो महत्वपूर्ण होता है, पर राष्ट्रीय निर्माण और संगठन के लिए सर्वप्रथा अनुचित ही रहता है।
मैंने बहुत करीब से देखा है जब संघ के अंदर विद्यार्थी परिषद (विद्यार्थी राजनीतिक क्षेत्र के प्रचारक) , सन् २००० के पश्चात आए उन्होंने एक नए जीवन शैली को संघ के प्रचारकों के मध्य इंट्रोड्यूस किया। इन सभी एबीवीपी और अन्य विविध क्षेत्र के प्रचारकों को जाना तो कहीं और था पर किन्हीं कारणों से उन्हें संघ के शाखा क्षेत्र में लाया गया। एबीवीपी के प्रचारकों को जाना भाजपा में था पर वह संघ के विभिन्न आयामों में आए। जिसके कारण से अनैतिकता बड़ी।
राम लाल के घर की डकैती उसी जीवन शैली के कारण हुई जो संघ के प्रचारकों और कार्यकर्ताओं के लिए अनुचित मानी गई है। RSS के प्रचारक और कार्यकर्ताओं के लिए आचरण में सुचिता सबसे महत्वपूर्ण है। मन में एक ऐसी जीवन शैली की कल्पना करना जहां आधिपत्य हो, वैभव होता, हो विलसता हो..... यह मनुष्य को अनुचित मार्ग का अनुसरण करने के लिए मजबूर कर देती है। जो लोग अपना परिवार, जीवन के आकांक्षाओं का त्याग करके प्रचारक बने.....आज उनकी सुचिता पर यह प्रश्न चिन्ह है। हो सकता है वह सीधे इसमें लिप्त ना भी हो, परंतु निश्चित ही उन्होंने अपनी आंखें जरूर बंद कर रखी थी। और उसका कारण एक ही था "लोकेषणा"। लोकेषणा मनुष्य से वह सब करवाती है, जो मनुष्य भूमि, धन और स्त्री की प्राप्ति के लिए नहीं करता।
जो मनुष्य अनाधिकृत रूप से भूमि, धन और स्त्री को पाने के लिए नहीं करता उसे अत्यधिक वो "लोकेषणा" के लिए करता है।
मैं यह तो नहीं जानता की चोरी किसने की, परंतु चोरी हुई,यह सत्य है। पर जिसने राम के घर चोरी की या जो इसका जिम्मेदार है, उस व्यक्ति,संगठन को रामलाल जरूर दंड देंगे।
मुझे दुख इस बात का है कि 100 वर्षों की एक परंपरा प्रचारक पद्धति, संघ का अनुशासन, स्वयंसेवकों का स्वयं का त्याग कर समाज के लिए जीवन जीना, इस के कारण आज जो स्थान ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विश्व में प्राप्त हुआ, उसको कुछ लालची संघ के कार्यकर्ताओ ....चाहे वह किसी भी विविध संगठन के हैं, उन्होंने नष्ट कर दिया।
जीवन में से सुचिता का नष्ट हो जाना, नैतिक पतन का संकेत है। यह संकेत तो 2013 के बाद BJP के सत्ता में आने के बादसे ही दिखने लगा था, परंतु कोई इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं था, क्योंकि वह उनके हित को साध नहीं रहा था। उनको सूट नहीं कर रहा था। इसी कारण जो वास्तव में स्वयंसेवक था, जिसको सत्ता का कोई लालच नहीं था....उसने अपना झोला उठा कर चला जाना ही ठीक समझा। जो लालची थे, अथवा अब कहीं जा ही नहीं सकते थे, जिन्होनें पूरा जीवन (प्रचारक जीवन) को अपना कर, अपना सर्वस्व का त्याग कर दिया था, वह बेचारे वहीं रह गए।
संघ को वापस अगर अपना गौरवशाली इतिहास चाहिए तो सिर्फ "शाखा" तक उसे लौटना ही होगा। वरना ये शुरुआत है। आगे सब नष्ट हो जाएगा।
ये चल क्या रहा है? कोई कफ सिरप कैसे डाल सकता हैं आँख में? आई ड्रॉप की जगह कान या नाक का ड्रॉप डाल दे तो समझ में आता है कि ह्यूमन एरर हो सकता है (जो नहीं होना चाहिए), पर कफ सिरप? इसको तो मृत्युदंड मिलना चाहिए।
@epanchjanya राम मंदिर चोरी पर कोई भी बीजेपी का नेता सफाई देने टीवी चैनलों पर नहीं आया। जानते हैं क्यों???
बीजेपी ने पहले संघ के अंदर की सुचिता को खत्म किया। एक ऐसी जीवन शैली का दर्शन कराया जिसका संघ(RSS) का कार्यकर्ता आदि नहीं था। फिर सभी संघ के प्रचारक ,कार्यकर्ता, भाजपा के प्रचारक और कार्यकर्ता बन गए। धीरे-धीरे उसी राजनीतिक शैली का अनुसरण करने लगे जो सत्ता प्राप्ति के लिए तो महत्वपूर्ण होता है, पर राष्ट्रीय निर्माण और संगठन के लिए सर्वप्रथा अनुचित ही रहता है।
मैंने बहुत करीब से देखा है जब संघ के अंदर विद्यार्थी परिषद (विद्यार्थी राजनीतिक क्षेत्र के प्रचारक) , सन् २००० के पश्चात आए उन्होंने एक नए जीवन शैली को संघ के प्रचारकों के मध्य इंट्रोड्यूस किया। इन सभी एबीवीपी और अन्य विविध क्षेत्र के प्रचारकों को जाना तो कहीं और था पर किन्हीं कारणों से उन्हें संघ के शाखा क्षेत्र में लाया गया। एबीवीपी के प्रचारकों को जाना भाजपा में था पर वह संघ के विभिन्न आयामों में आए। जिसके कारण से अनैतिकता बड़ी।
राम लाल के घर की डकैती उसी जीवन शैली के कारण हुई जो संघ के प्रचारकों और कार्यकर्ताओं के लिए अनुचित मानी गई है। RSS के प्रचारक और कार्यकर्ताओं के लिए आचरण में सुचिता सबसे महत्वपूर्ण है। मन में एक ऐसी जीवन शैली की कल्पना करना जहां आधिपत्य हो, वैभव होता, हो विलसता हो..... यह मनुष्य को अनुचित मार्ग का अनुसरण करने के लिए मजबूर कर देती है। जो लोग अपना परिवार, जीवन के आकांक्षाओं का त्याग करके प्रचारक बने.....आज उनकी सुचिता पर यह प्रश्न चिन्ह है। हो सकता है वह सीधे इसमें लिप्त ना भी हो, परंतु निश्चित ही उन्होंने अपनी आंखें जरूर बंद कर रखी थी। और उसका कारण एक ही था "लोकेषणा"। लोकेषणा मनुष्य से वह सब करवाती है, जो मनुष्य भूमि, धन और स्त्री की प्राप्ति के लिए नहीं करता।
जो मनुष्य अनाधिकृत रूप से भूमि, धन और स्त्री को पाने के लिए नहीं करता उसे अत्यधिक वो "लोकेषणा" के लिए करता है।
मैं यह तो नहीं जानता की चोरी किसने की, परंतु चोरी हुई,यह सत्य है। पर जिसने राम के घर चोरी की या जो इसका जिम्मेदार है, उस व्यक्ति,संगठन को रामलाल जरूर दंड देंगे।
मुझे दुख इस बात का है कि 100 वर्षों की एक परंपरा प्रचारक पद्धति, संघ का अनुशासन, स्वयंसेवकों का स्वयं का त्याग कर समाज के लिए जीवन जीना, इस के कारण आज जो स्थान ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को विश्व में प्राप्त हुआ, उसको कुछ लालची संघ के कार्यकर्ताओ ....चाहे वह किसी भी विविध संगठन के हैं, उन्होंने नष्ट कर दिया।
जीवन में से सुचिता का नष्ट हो जाना, नैतिक पतन का संकेत है। यह संकेत तो 2013 के बाद BJP के सत्ता में आने के बादसे ही दिखने लगा था, परंतु कोई इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं था, क्योंकि वह उनके हित को साध नहीं रहा था। उनको सूट नहीं कर रहा था। इसी कारण जो वास्तव में स्वयंसेवक था, जिसको सत्ता का कोई लालच नहीं था....उसने अपना झोला उठा कर चला जाना ही ठीक समझा। जो लालची थे, अथवा अब कहीं जा ही नहीं सकते थे, जिन्होनें पूरा जीवन (प्रचारक जीवन) को अपना कर, अपना सर्वस्व का त्याग कर दिया था, वह बेचारे वहीं रह गए।
संघ को वापस अगर अपना गौरवशाली इतिहास चाहिए तो सिर्फ "शाखा" तक उसे लौटना ही होगा। वरना ये शुरुआत है। आगे सब नष्ट हो जाएगा।