ग्रेट निको��ार के आंतरिक वनों में रहने वाली शोम्पेन जनजाति भारत की PVTG समुदाय है।
2011 में इनकी आबादी सिर्फ 229 थी।
अर्ध-घुमंतू जीवन, शिकार-संग्रह, मछली पकड़ना और ‘लारोप’ (पां��नस फल) इनका आधार है।
विकास परियोजनाओं से पहले इनके अस्तित्व, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2023 में अनुसूचित जाति (SC) पर अत्याचार के 70,790 और अनुसूचित जनजाति (ST) पर अत्याचार के 58,568 मामले दर्ज हुए। यानी प्��तिदिन औसतन 194 SC और 185 ST समुदाय के लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज हुए।
लेकिन सबसे चिंताजनक सवाल यह है कि इन हजारों मामलों में से एक भी मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (@India_NHRC) ने स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया? क्या दलितों और आदिवासियों पर होने वाले रोज़मर्रा के अत्याचार आयोग की नज़र में आपात मानवाधिकार उल्लंघन नहीं हैं?
वहीं दूसरी ओर, रुचि तिवारी के मामले में आयोग ने तत्काल स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली। तो क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है? क्या मानवाधिकारों की संवेदनशीलता अब जाति देखकर तय होगी?
जब देश में रोज़ सैकड़ों SC/ST नागरिक हिंसा, उत्पीड़न, बलात्कार, सामाजिक बहिष्कार और दमन का सामना कर रहे हैं, तब संस्थाओं की चुप्पी और चयनात्मक सक्रियता लोकतंत्र की आत्मा पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
@rashtrapatibhvn राष्ट्री�� मानवाधिकार आयोग को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाएं।
लखीमपुर खीरी में में 14 वर्षीय दलित बच्ची की संदिग्ध मौत बेहद चिंताजनक है। परिवार का कहना है कि छेड़छाड़ के आरोपी को जमानत मिलने के बाद वह भारी तनाव में थी।
जब आरोपी बाहर और पीड़िता असुरक्ष��त महसूस करे, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
@Uppolice @dgpup
₹80,000 करोड़ की ग्रेट निकोबार परियोजना के नाम पर 9.64 लाख पेड़ों की कटाई, 1,300 हेक्टेयर अछूते वर्षावन का विन��श और शोम्पेन-निकोबारी जैसे विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समुदायों का भविष्य खतरे में डाला जा रहा है।
क्या विकास का अर्थ जैव-विविधता का अंत और मूल निवासियों का विस्थापन है? क्या रणनीति और कॉरपोरेट हित संविधान, पर्यावरण और मानवाधिकारों से ऊपर हैं?
ग्रेट निकोबार सिर्फ एक द्वीप नहीं, यह हमारी संवेदनशीलता, लोकतंत्र और नैतिकता की परीक्षा है।
NHRC जब दिल्ली में एक मामले पर तुरंत suo motu ले सकता है, तो 2023 मणिपुर में आदिवासी महिलाओं की निर्वस्त्र परेड और सामूहिक हिंसा पर वही तत्परता क्यों नहीं दि���ी?
क्या मानवाधिकार आयोग पीड़ित की जाति देखकर जागता है?
यदि संवैधानिक संस्थाएं चयनात्मक न्याय करेंगी, तो विश्वास कैसे बचेगा?
तत्काल NHRC के भंग और पुनर्गठन करने की आवश्यकता है।
@India_NHRC
@rashtrapatibhvn
@PMOIndia
@HMOIndia
मप्र में एक आदिवासी युवक क�� भीड़ ने बेरहमी से पीटा, ट्रक से बाँधकर घसीटा और उसकी मौत हो गई। लेकिन जब दिल्ली विश्वविद्यालय में रुचि तिवारी का मामला सामने आया, तो @India_NHRC ने तुरंत स्वत: संज्ञान लिया। क्या पीड़ित की सामाजिक पहचान न्याय की गति तय करती है
जब आदिवासी युवक पर अमानवीय अत्याचार होता है, जब दलित युवाओं का उत्पीड़न किया जाता है, जब SC/ST/OBC समुदायों पर रोज़ाना सैकड़ों मामले दर्ज होते हैं तब National Human Rights Commission की संवेदनशीलता कहाँ चली जाती है?
लेकिन जैसे ही किसी प्रभावशाली वर्ग से जुड़ा मामला सामने आता है, तुर��त suo motu संज्ञान ले लिया जाता है।
क्या मानवाधिकार अब जाति देखकर तय होंगे?
क्या आदिवासी और दलित इस देश के बराबरी के नागरिक नहीं हैं?
हम मांग करते हैं कि NHRC की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा हो; अन्यथा इसे तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए।
@India_NHRC @rashtrapatibhvn @narendramodi @jualoram @arjunrammeghwal @AmitShah
राजस्थान का कालबेलिया समुदाय जिसकी लोकगायन और नृत्य परंपरा को 2010 में यूनेस्को ने वैश्विक पहचान दी आज अपने बुजुर्गों को गुप्त रूप से दफनाने को मजबूर है ताकि गाँवों में अपमान और उत्पीड़न से बच सकें। 44.1% लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। 1.62 लाख घुमंतू लोग आज भी ज़मीन के ��धिकार और राशन से वंचित हैं।
रुचि तिवारी के लिए जागने वाला @India_NHRC जिंदा हैं?
@YayaN65844@HansrajMeena Koye किसी का नहीं कहता जब तक हम सो रहे होते। Nt DNT ka jaisa tho nahin hai baki tribes ka sab Kuch mila hai bus unke neth na lootey unko tho kafi hai
@LoktantraVoice@HansrajMeena जो बोल रहे हो ना गोंड और अन्य राज परिवार nt DNT ka reservation ka malai kha kar unka virodh kartey hai uska bhi tho hisab hona hai
@AliNoushad7@HansrajMeena Dnt nt ka virodh koun kiya pata gai Baba saheb se lekar sc st samuday ke netha yakin nahi hotha tho ap uske upar thoda रिसर्च kariye pata chal jayega.
@HansrajMeena जब sc st ko attrocity act se protection aur reservation mil saktha tho NT/ dnt ko kyu nahi kyu sare chup hai iske upar kaha gaya samajik nyay
पटना में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे रिटायर्ड चौकीदारों पर पुलिस कार्रवाई शर्मनाक है।
एक तरफ मंचों से “मैं भी चौकीदार हूं” का नारा दिया जाता है, दूसरी तरफ असली चौकीदारों की आवाज़ को लाठी से दबाया जाता है।
मैं फिर कह रहा हूं देश गलत हाथों में है।