राम मंदिर चोरी पर कुछ अंधभक्तो की जबान तालू से चिपक गयी पर दुसरो के घाघरे में तांक झाँक रोज करनी है।
वैसे यह संत क्या बोल रहे हैं, यदि यह सही नहीं है तो एक्शन लें और यदि सही है तो तत्काल ऐसे कुकर्मियों को जेल में डालें, भगवन राम के मंदिर में ऐसे घिनोने नीच सोच वाले व्यक्ति क्या कर रहे हैं।
राम मंदिर के सन्दर्भ में मुख्य कार्यवाही इस प्रकार है:
अयोध्या विवाद में दर्ज हुई सबसे पहली FIR (1858) निहंग सिखों के खिलाफ ही की गई थी। नवंबर 1858 में पंजाब से आए बाबा फकीर सिंह खालसा के नेतृत्व में 25 निहंग सिखों का जत्था बाबरी मस्जिद परिसर में दाखिल हुआ था। उन्होंने वहां 'श्री भगवान' (रामलला) का प्रतीक स्थापित किया, एक चबूतरा बनाया और कोयले से बाबरी मस्जिद की दीवारों पर 'राम-राम' लिख दिया। इसके बाद उन्होंने वहां हवन और पूजा-अर्चना की।
इस घटना के बाद, 30 नवंबर 1858 को बाबरी मस्जिद के अधिकारी सैयद मोहम्मद खतीब की शिकायत पर अवध पुलिस स्टेशन में निहंगों के खिलाफ पहली FIR दर्ज की गई थी। इस ऐतिहासिक घटना का जिक्र भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 2019 के अयोध्या फैसले में भी विस्तार से दर्ज किया गया है।
निर्मोही अखाड़ा ने पूरे परिसर के प्रबंधन और हक का दावा 1959 में किया।
पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह ने अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष को कानूनी सलाह दी थी कि वे मुकदमे में जमीन का मालिकाना हक मांगें। उन्होंने वीएचपी नेता अशोक सिंघल को संदेश भेजा था कि हिंदू पक्ष द्वारा दाखिल मुकदमों में जमीन का मालिकाना हक नहीं मांगा गया है, जिससे वे केस हार सकते हैं।
*बूटा सिंह की सलाह भी राम मंदिर के सन्दर्भ में मील का पत्थर मानी जाती है, बूटा सिंह की सलाह के प्रमुख बिंदु:*
'रामलला' को पक्षकार बनाना*: बूटा सिंह के सुझाव के बाद ही विवादित जमीन पर दावा ठोकने के लिए 'रामलला विराजमान' को इस केस का एक पक्षकार बनाया गया था।
कानूनी अड़चन को दूर करना: मुस्लिम पक्ष का तर्क था कि सदियों से विवादित जमीन पर उनका कब्जा है। बूटा सिंह ने समझाया कि परिसीमन कानून के तहत लंबा समय बीत जाने के कारण हिंदू पक्ष सीधे जमीन पर हक नहीं जता सकता।
अयोध्या राम मंदिर मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक रही थी। उनके कार्यकाल के दौरान इस विवाद से जुड़े दो बड़े घटनाक्रम हुए जिन्होंने इस आंदोलन को एक नया मोड़ दिया:
1. 1986 में विवादित परिसर का ताला खुलवाना
अदालती आदेश और सरकारी सहमति: फैजाबाद जिला अदालत के आदेश के तुरंत बाद 1 फरवरी 1986 को विवादित ढांचे का ताला खोला गया。
पर्दे के पीछे की रणनीति: राजनीतिक विश्लेषकों और ऐतिहासिक दावों के अनुसार, राजीव गांधी सरकार के इशारे पर तत्कालीन यूपी के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की सरकार ने अदालत में ताला खोलने के पक्ष में अपनी सहमति दी थी।
राजनीतिक संतुलन: ऐसा माना जाता है कि शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद हिंदू समुदाय की नाराजगी को दूर करने और संतुलन बनाने के लिए राजीव गांधी सरकार ने यह कदम उठाया था।
2. 1989 में राम मंदिर का शिलान्यासशिलान्यास की अनुमति:
9 नवंबर 1989 को राजीव गांधी सरकार ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) को विवादित स्थल के पास राम मंदिर के शिलान्यास (बुनियाद रखने) की आधिकारिक अनुमति दी थी।
सरकारी भागीदारी: उनके तत्कालीन गृह मंत्री बूटा सिंह ने वीएचपी नेताओं से बातचीत कर शिलान्यास का रास्ता साफ किया था। पहली ईंट एक दलित समुदाय के सदस्य (कामेश्वर चौपाल) द्वारा रखी गई थी।
3. चुनाव प्रचार की शुरुआत और दूरदर्शन पर रामायण
रामराज्य का नारा: 1989 के लोकसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत राजीव गांधी ने अयोध्या के पास (फैजाबाद) से की थी, जहां उन्होंने अपने भाषण में 'रामराज्य' लाने की बात कही थी।
रामायण का प्रसारण: राजीव गांधी के कार्यकाल (1987) में ही दूरदर्शन पर रामानंद सागर के 'रामायण' सीरियल का प्रसारण शुरू हुआ था, जिसने देश भर में सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना को जगाने में अहम भूमिका निभाई।
बाकि अदालत (कोर्ट) द्वारा नियुक्त राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी महंत लदास थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1981 में बाबा लदास को रामलला का मुख्य पुजारी नियुक्त किया था।
वह वीएचपी (VHP) द्वारा मंदिर निर्माण के नाम पर चंदा वसूली और राजनीतिकरण के मुखर विरोधी थे। इसके बाद, 1992 में उन्हें हटा दिया गया और नवंबर 1993 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। कोई भी पकड़ा नहीं गया।
बाकि गोदी मीडिया जो बता रही है, वह तो आपने आका के चरण वंदना में ही व्यस्त है।
आगरा वासियों के लिए खुशखबरी।
आगरा का नाम कही भी नहीं आता था पर अवतारी पुरुष जी की असीम कृपा से और उनके 18 -18 घंटे योगदान से पार्टी ने सबक लेते हुए आगरा नाम मशहूर कर दिया है और आगरा ने पूरे सोशल प्लेटफार्म पर गर्दा उड़ाया हुआ है।
आगरा वासी इसके लिए बहुत कृतज्ञ होंगे और भावभीनी श्रदांजलि अर्पित भी करते रहेंगे कि सफाई का लवलेन भुजयम हो गया। 😂😅😁
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जनता समझ ही नहीं पा रही है।
कभी कहते हैं बीजेपी ने राम मंदिर लूट लिया, अब मथुरा कशी का भी आ रहा है कि वहां भी लूट हुई, पहले केदारनाथ का सोना लूटने की खबर आयी थी फिर महाकाल लूट की, कभी कहते हैं देश को लूट लिया।
अरे मित्रों, यह इसलिए लूटा गया है कि कहीं बाद में मुग़ल आकर लूटकर ना ले जाएँ।
एक तो सबको सेफ किया है उसे ही जनता लूट बता रही है, अब जब बीजेपी सब कुछ लूट लेगी तो बताओ जब मुग़ल आएंगे उन्हें तो कुछ ढूंढने से मिलेगा नहीं।
तो आज से बोलो लूटा नहीं, बस सबको सेफ करा है।
इसे कहते हैं मास्टर स्ट्रोक मित्रों !!😆😅😂
@nextminutenews7 Fake fake fake !!
Everything is fake in India. We are DOOMED !!
The only real issue is political horse-trading.
Just live in fake heaven. No wonder, why everyone is leaving India when they get the chance.