मैं हनुमान गढ़ी गया था । मंदिरों में मैं बहुत पैसे बांटता हूं । कोशिश रहती है मेरी कि वहां से जेब खाली करके आऊं । किसी ने कह दिया था कि मंदिर में जो जेब खाली करके आता है फिर खाली जेब नहीं रहता । वही बात मन में बैठ गई ।
पैसे बांटते बांटते खत्म हो गए । और जैसे ही मंदिर से निकलने को हुआ चबूतरे पर एक सौ साल से ऊपर के बाबाजी बड़ी रामचरित मानस पर पंद्रह बीस डिग्री का कोण बना कर झुके पाठ कर रहे थे । बदन पर सिर्फ एक गमछा ।
मुझे लगा अननेससरी हर जगह दे दिया, जिसे देना चाहिए उसके लिए तो पैसे ही नहीं बचे । जेब में टटोला बीस रुपए थे ।
मुझे लगा बड़े संत हैं । क्या पता पैसे देने पर गुस्सा हो जाएं । मैंने सकुचाते हुए कहा - बाबा यदि हम आपको कुछ दें तो लेंगे ? बिना कुछ बोले हाथ बढ़ा दिया । मैंने बीस का नोट दिया तो रख लिया । न कोई लालसा , न इंकार , न कोई धन्यवाद । मिला ठीक , न मिला ठीक । भोजन हुआ तो राम ने करवाया, न हुआ तो राम जी ने नहीं दिया ।
ऐसे संतों से भरी अयोध्या में चंपत राय हो जाना कितने जन्मों के कुसंस्कार होंगे कि राम छू न गया , चांदी छू गया, सोच लीजिए ।
100% true
Used to travel for 2 hours a day earlier. Really impacted the energy levels and quality of life.
Small things in life that have a big impact eventually
जब ताक़तवर आदमी ने कहा
कि उसे और भी ताक़त चाहिए
तो मुझे अपनी दुर्बल भंगुर देह दिखाई दी
जो शाम होते-होते थकान से चूर हो जाती थी और आराम चाहती थी
जब ताक़तवर आदमी ने कहा कि वह ग़रीब माँ का बेटा पैदा हुआ
और यहाँ तक पहुँच गया
तो मुझे याद आई वह मेरी माँ जो अब दुनिया में नहीं है
जिसके योग्य बनने में मेरी पूरी उम्र निकल गई
जब ताक़तवर आदमी ने कहा कि तमाम लोग उससे बेहद ख़ुश हैं
तो मुझे हवा में बहुत से चेहरे तैरते हुए दिखाई दिए
जो लगता था कहीं न कही मुझसे रूठे हुए हैं
और मेरी किसी ग़लती की ओर इशारा कर रहे हैं
जब ताक़तवर आदमी ने लगभग रोते हुए कहा
कि उसने देश के लिए घर त्याग दिया शादी नहीं की
तो मैंने सोचा मैं कितना ख़ुशनसीब था
कि रात को लौटने के लिए मुझे एक जगह नसीब हुई
एक भली-सी पत्नी मिली
जिसने अपने प्रेम के एवज़ में मुझसे कुछ नहीं चाहा
जब ताक़तवर आदमी ने कहा
कि उसे देश के शत्रुओं से घृणा है
और उनमें से बहुत से लोग देश के भीतर ही छिपे हुए है
तो मुझे गहरी चिंता हुई
कि कहीं मनुष्य के प्रति मेरे भीतर प्रेम घटने न लग जाए
जब ताक़तवर आदमी ने परेशान होकर कहा
कि बहुत से लोग मेरी जान के पीछे पड़े हैं
वे मुझे मार देना चाहते हैं
तो मैंने अपने मामूली से अस्तित्व के बारे में सोचा
जिसे सँवारने में कितने ही हाथों ने मदद की
जब ताक़तवर आदमी ने एक रात संदेश प्रसारित किया
कि वह अभी कई साल ताक़तवर बने रहना चाहता है
तो मैंने सुबह उठकर किसी अज्ञात से प्रार्थना की
बस आज के दिन बचा रहे मेरा यह धुँधला-सा जीवन।
मंगलेश डबराल