सभी अभियांत्रिकी साथियों की मंशा अनुरुप UDH में लगभग 750 JEn पदों की file वित्तीय स्वीकृती के लिए माननीय स्वायत्त शासन मंत्री @officialkharra साहब से निवेदन कर वित्त विभाग को कल ही अग्रेषित करवा दी गयी है जिसकी Approval आते ही 650+ Civil JEn पदों की अभ्यर्थना राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को संयुक्त भर्ती के लिए प्रेषित कर दी जायेगी।
Agricultural Marketing Board में रिक्त 41 JEn पदों की वित्तीय स्वीकृती पहले ही प्राप्त हो चुकी है और जिनकी अभ्यर्थना कल बनकर तैयार हो गयी। हमें पूरी उम्मीद है कि आज या कल उक्त 41 पदों की अभ्यर्थना भी बोर्ड प्रेषित कर दी जायेगी।
हमारा बोर्ड चैयरमैन @alokrajRSSB जी निवेदन हैं कि यथासमय इन दोनों विभागों के JEn पदों को पूर्व में जारी कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती - 2026 में जोड़कर संशोधित विज्ञापन जारी करावें। माननीय आलोक राज जी हम आपकी मजबूरी को भी समझते हैं और सम्मान भी करते हैं क्योंकि नौकरी सभी को प्यारी होती है इसलिए हम Engineers के चक्कर में आप पूर्व में JEn Notification रोककर अपना कार्यकाल 3 साल तक सिमित नहीं कर सकते थे। खैर अभी भी आपके पास गाल बजाने का मौका है तो आपका नाम हो जायेगा और हमारा काम हो जायेगा।
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
We have marched to PM Modi’s house to demand answers from him for the brutalities against young students yesterday.
The Government doesn’t want to take any accountability or does it want to have a debate on it in Parliament.
PM and HM must resign for destroying the future of India’s youth.
CBI डायरेक्टर की नियुक्ति प्रोसेस पर नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने असहमति दर्ज की है.
उन्होंने X पर लिखा कि 'CBI डायरेक्टर के सिलेक्शन प्रोसेस से अपनी असहमति दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री को लिखा है. मैं किसी भेदभाव वाली प्रक्रिया में हिस्सा लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता…विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैम्प नहीं है.'
वर्तमान LPG किल्लत में सबसे ज्यादा प्रभावित जयपुर, कोटा , जोधपुर व गंगानगर सहित विभिन्न शहरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा हैं क्योंकि अधिकतर के पास वैध गैस कनेक्शन नहीं है जिससे उन्हें इस मारामारी में काला बाजारी में cylinder मिल नहीं रहे हैं और मिल भी रहे हैं तो एक गैस cylinder के भाव भी आसमान छू रहे हैं जिसे afford करना हर किसी के लिए मुश्किल हो रहा है। इस समय अधिकतर open mess बंद कर दिये गये हैं और PG में भी सिमित तंदूर रोटी व उसका भी डबल चार्ज कर दिया गया है। अभी मार्च से मई - जून तक विभिन्न प्रतियोगी व अकादमिक परीक्षाओं का आयोजन प्रस्तावित है तो युवाओं के पास कोई विकल्प नहीं है।
@BhajanlalBjp@RajGovOfficial@RajCMO@alokrajRSSB@RPSC1
स्वायत्त शासन विभाग में सहायक अभियंता के 42 पदों के लिए RPSC द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा में एक 12th Standard का अभ्यर्थी द्वारा इतने tough competition में 7 वीं रैंक के साथ चयनित हो जाना, कोई जादूगरी हो सकती है। हमें ज्ञात रहे EO, RO & AEn तीनों भर्ती एक साथ आयी थी जिसमें से EO & RO भर्ती की गड़बड़ी तो @RPSC1 सचिव राम निवास मेहता जी ने पकड़ ली और समय पर रद्द भी कर दी। यह सीधा सीधा पेपर लीक का मामला है और आरोपियों की संख्या भी 25+ है परन्तु जांच एजेंसी भी कहीं ना कहीं जाकर compromises कर रही है। जिसका ताजा उदाहरण कनिष्ठ अभियंता संयुक्त भर्ती 2020 पुनः परीक्षा है जिसमें दो बड़ी फर्मों के नाम व दो मंत्री महोदय के नजदीकियों की संलिप्तता ने जांच की दिशा ही बदल दी और उपर से मारवाड़ से तथाकथित वर्कर PWD AEn के नेतृत्व वाली गैंग द्वारा दिया गया विटामिन M का बोझ file को दबा गया। अब थोड़े दिन पश्चात DLB AEn 2023 व JEN 2020 दोनों भर्ती पेपर लीक जांच की file एक ही बस्ते में बांधकर रिकॉर्ड रूम का हिस्सा बन जायेगी।
पहले PWD वालों ने राजस्थान में रोड़ गुणवत्ता में रिकॉर्ड कायम कर दिये हैं और विशेषकर थार क्षेत्र में , खैर @SachinPilot का टोंक भी अछूता नहीं रहा। टोंक वाली पेपर लीक लाभार्थी AEn साहिबान की कहानी ही निराली है जो कभी विस्तार से लिखेंगे क्योंकि उनको मंजिल तक ले जाने वाले मेरे सहपाठी तो रोड़ चढ़ ही नहीं पाये और पीछे बांध की पाल पर ही अटक गये और अन्ततः बीसलपुर बांध ही उनकी अंतिम शं्वास का साक्षी बना ( दुनिया को अलविदा कह गये - सादर श्रद्धांजलि भाई ) । अब DLB AEn भर्ती लाभार्थी हमारी शहरी व्यवस्था में चार चांद लगा रहे हैं।
@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@RajCMO@DrKirodilalBJP@ashokgehlot51@SachinPilot@Barmer_Harish@Hemaram_INC@TheTribhuvan@Viveksbarmeri@sharatjpr@vinodmittal9@DainikBhaskar@SachBedhadak@Kunal_Alwar@8PMnoCM
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में पूर्व में स्वीकृत कनिष्ठ तकनीकी सहायक 1050 पदों की संख्या में राज्य बजट 2026-27 के अन्तर्गत वृद्धि करते हुए 3000 कर दिये गये हैं।
हम @RajGovOfficial सरकार के इस नये संविदा वीर बनाने के फैसले का विरोध करते हैं।
@OnlineKanhaiya
राभव लिमिटेड एजेंसी ने 2018 की तीन भर्ती की OMR स्कैनिंग की थी उसी कंपनी ने 6 दिसंबर 2020 को हुई JEn डिप्लोमा और सितंबर 2021 में सिविल डिग्री की OMR स्कैनिंग की थी तो फिर JEnभर्ती के साथ भेदभाव क्यों जब दोनों भर्तियों की स्कैनिंग एक ही कंपनी ने की है OMR भरी होगी @RajCMO
राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित की जाने भर्ती परीक्षाओं में संवैधानिक रूप से तय OBC आरक्षण नियमों के खिलाफ जाते हुए आरक्षण का दायरा लगातार कम किया जाना, इस वर्ग के युवाओं के अधिकारों के साथ बड़ा अन्याय है।
कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा हाल ही में जारी LDC भर्ती परीक्षा विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा कतई न्यायसंगत नहीं है। OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है, जो संवैधानिक नहीं है।
इसी प्रकार चतुर्थ श्रेणी भर्ती, वनपाल भर्ती, द्वितीय श्रेणी भर्ती विज्ञप्ति में भी OBC वर्ग को तय मापदण्डों के अनुसार 21% आरक्षण नहीं दिया गया।
रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के साथ लगातार सुनियोजित तरीके से अन्याय हो रहा है। लाखों युवाओं और उनके परिवार से जुड़ा यह गंभीर मुद्दा है।
प्रदेश भाजपा सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले पर संज्ञान लेकर आरक्षण की विसंगतियों को तत्काल दूर करे।
@RajCMO@BhajanlalBjp@RajGovOfficial
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में OBC आरक्षण के साथ हो रहा निरंतर खिलवाड़ बेहद चिंताजनक है।
LDC भर्ती में 21% के बजाय मात्र 15% आरक्षण देना युवाओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। चतुर्थ श्रेणी, वनपाल और द्वितीय श्रेणी भर्तियों में भी इसी तरह नियमों की अनदेखी कर आरक्षित वर्गों के साथ सुनियोजित अन्याय किया गया है।
रोस्टर की आड़ में युवाओं के हक छीनना बंद करे भाजपा सरकार। मुख्यमंत्री जी तत्काल दखल देकर आरक्षण की इन विसंगतियों को दूर करें और युवाओं को न्याय दें।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा जारी लिपिक ग्रेड-|| / कनिष्ठ सहायक संयुक्त सीधी में भर्ती परीक्षा (LDC) की हाल ही जारी विज्ञप्ति में वर्गवार पदों का बँटवारा न्यायसंगत नहीं है।
इस भर्ती परीक्षा में OBC वर्ग को 21% की बजाय मात्र 15% आरक्षण दिया गया है जो संवैधानिक नहीं है, यह बेरोजगार युवाओं के साथ कुठाराघात है।
पूर्व में जारी चतुर्थ श्रेणी भर्ती और वन पाल भर्ती में भी OBC वर्ग को 21% आरक्षण नहीं दिया गया था।
इसी तरह RPSC 2nd ग्रेड शिक्षक भर्ती 2024 की जारी संशोधित विज्ञप्ति में गणित विषय में 538 पदों के बंटवारे में मात्र 9% आरक्षण मिला है।
रोस्टर के नाम पर आरक्षित वर्गों के साथ यह अन्याय कब तक चलेगा? युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक किया जाएगा?
माननीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी से अनुरोध है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित हल निकलवाएँ तथा इस मामले की संपूर्ण जाँच करवाई जाए।
RIICO भर्ती में अचानक #GATE अनिवार्य!
न कोई परंपरा, न कोई पूर्व सूचना…तो फायदा किसे?
क्या राजस्थान के सामान्य इंजीनियर सिर्फ़ दर्शक बनकर रह जाएँ?
मुख्यमंत्री जी हस्तक्षेप करें।
@BhajanlalBjp@RajCMO#RIICORecruitment#RajasthanYouth
"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को सीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
कनिष्ठ अभियंता 2020 पुनः परीक्षा Civil Degree में पेपर पढ़कर PWD में JEn बनने वाले एक आरोपी को SOG ने गिरफ्तार किया है जो वर्तमान में PWD बिलाड़ा, जोधपुर में AEN ( पदोन्नत) के पद पर कार्यरत हैं। इस गिरफ्तारी के बावजूद भी हमें नहीं लगता कि इस भर्ती की जांच होगी क्योंकि आगे भी इस भर्ती की जांच के नाम पर @Sog_Rajasthan मैनेज होती आयी है। उक्त जांच को अन्य भर्ती से जोड़कर जांच को dilute नहीं किया जाता और आगे बढ़ती है तो एक ही जगह व एक ही दलाल से पेपर पढ़ने वाले कुल 11 JEN की गिरफ्तारी होगी जिसमें एक PWD में कार्यरत महिला पेपर लीक लाभार्थी भी शामिल है। इस भर्ती की जिस दिन वास्तविकता सामने आयेगी उस दिन पता लगेगा कि SI भर्ती तो इसके सामने कुछ भी नहीं है।
हम सभी अभियांत्रिकी युवाओं की @RajGovOfficial व @BhajanlalBjp जी से मांग है कि उनके दल व प्रधानमंत्री @narendramodi जी के वादे को याद रखते हुए इस जांच में नैतिक आधार पर सहयोग करना चाहिए।
सभी अभियांत्रिकी युवाओं से आह्वान है कि अपने हक के लिए आवाज बुलंद करें नहीं तो जांच एजेंसियों को मैनेज कर ली जायेगी ।
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