भीम आर्मी कार्यकर्ता 1:
"वीडियो हमने लगाई, DVD हमने लगाई, तुमने अपने नाम से कैसे FIR कर लिया?"
भीम आर्मी कार्यकर्ता 2:
"अरे भैया, जो तुमको पैसे चाहिये ना, तुम रख लेना"
ऐसे SC/ST एक्ट का उपयोग हो रहा है, लोगों की जेबें भरने के लिए!
साफ है कि मुआवजे के लालच में ही ये लोग केस करते और करवाते हैं! बातचीत से पुलिस की भी मिलीभगत समझ आती है!
इतना खुलेआम इस एक्ट के दुरूपयोग हो रहा है, लेकिन सरकार सो रही है!
क्या UP सरकार ने हाई कोर्ट में अपने ही द्वारा दिये गए Undertaking का उल्लंघन किया है?
UP में 91% आरक्षण का मामला - तथ्य:
1. UP के 4 मेडिकल कॉलेज (अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर) में 91.76% आरक्षण लागू किया गया था।
SC=72.94%
ST=5.88%
OBC=12.95%
UR=8.24%
2. इस आरक्षण व्यवस्था को 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
सरकार ने तर्क दिया कि ये चारों मेडिकल कॉलेज Special Component Plan (SCP) के तहत बनाए गए हैं, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति के लिए विशेष प्रावधान करना था। इसलिए SC के लिए अधिक आरक्षण दिया गया।
3. इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि आरक्षण की सीमा को इस तरह नहीं बढ़ाया जा सकता।
4. इसके बाद UP सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील की। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
डिवीजन बेंच ने उस समय आरक्षण के मूल विवाद पर अंतिम फैसला नहीं दिया। चूंकि 2025–26 में एडमिशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, इसलिए उस साल की पुरानी सीट व्यवस्था को जारी रहने दिया गया।
5. UP सरकार ने हाई कोर्ट में Undertaking दी कि 2026–27 के शैक्षणिक सत्र से सही और कानूनी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी।
लेकिन 2026–27 में सरकार ने फिर वही पुरानी सीट व्यवस्था लागू कर दी है।
अब सवाल ये है कि अगर हाई कोर्ट में उत्तरप्रदेश सरकार ने खुद Undertaking दी थी कि 2026–27 से सही आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी, तो फिर पुरानी 91% आरक्षण व्यवस्था को लागू करना, उस Undertaking का उल्लंघन क्यों न माना जाए?
@myogiadityanath@myogioffice
यह न्यायसंगत नहीं है।
अगर सरकार ने हाई कोर्ट में कोई Undertaking दी है, तो सरकार खुद अपनी ही Undertaking से पीछे कैसे हट सकती है?
मोदी योगी सरकार खुल्लमखुल्ला गुंडागर्दी पर उतर आई हैं
UP के 4 मेडिकल कालेजों में आरक्षण बढ़ाकर 90% कर दिया गया है
इस गुंडागर्दी को देखकर कम से कम उन लोगों की आंखें अब तो खुल जानी चाहिये जो आरक्षण हटाओ के मुद्दे को छोड़कर आरक्षण सुधार के मुद्दे पर आ गए हैं
Reforms संभव नहीं हैं
अब सरकार दलितों के लिए एक्सक्लूसिव कॉलेज खोल रही है, हमारे पैसों से!
उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेज- अम्बेडकर नगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर- में 2026-27 की सीट मैट्रिक्स फिर वही पुरानी व्यवस्था पर जारी हुई है।
प्रत्येक कॉलेज की 85 राज्य कोटा सीटों में: एससी: 62 सीटें (लगभग 73%), एसटी: 5 सीटें (लगभग 6%), ओबीसी: 11 सीटें (लगभग 13%), अनारक्षित/जनरल: सिर्फ 7 सीटें (लगभग 8%) हैं, यानी कुल आरक्षण लगभग 92% हो गया है।
सरकार की धूर्तता देखिए कि इन्होंने ये चार कॉलेज एससी स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के तहत बनवाए थे। यानी अब खुल्लमखुल्ला जाति के आधार पर केवल दलितों के लिए कॉलेज तो बन रहे हैं, पर हर नए कॉलेज में 60% सीटें आरक्षित रहेंगी! @myogiadityanath या @narendramodi जब चार कॉलेज दलितों के लिए बनवाते हैं, तो चार केवल अनारक्षित के लिए बनवा लेते!
सरकार का तर्क यही है कि चूँकि फंड एससी कल्याण के लिए था, इसलिए यहाँ सामान्य 21%+2%+27% फॉर्मूला लागू नहीं होता। अगस्त 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 2010-2015 के उन शासनादेशों को रद्द कर दिया था जो 50% की सीमा पार करते थे।
कोर्ट ने साफ कहा था कि इंदिरा साहनी फैसले और यूपी आरक्षण अधिनियम 2006 के मुताबिक सामान्य फॉर्मूला लागू हो। सरकार ने विशेष अपील दाखिल की और 2026 की काउंसलिंग में पुरानी 62-5-11-7 व्यवस्था ही जारी रखी। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है।
Urgent appeal and attention to every GC Activist
उत्तर प्रदेश सरकार ने चार सरकारी मेडिकल कॉलेज—अम्बेडकर नगर, जालौन, कन्नौज और सहारनपुर में 90% आरक्षण दे रखा था।
इसके खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा किया गया था, जिसमें जनरल कैंडिडेट की विजय हुई थी और कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था।
खुद उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने कोर्ट में बोला था कि इस बार लागू करने दो, अगली बार यह नहीं लागू करेंगे।
लेकिन @myogiadityanath, @brajeshpathakup और @UPGovt ने अपना वादा तोड़ते हुए आज 2 तारीख को जो काउंसलिंग हो रही है, उसमें सीट मैट्रिक्स निकाला है।
जिसमें कुल 85 राज्य कोटा सीटों का विभाजन इस तरह से किया है:
• SC: 62 सीटें (72.94%)
• ST: 05 सीटें (5.88%)
• OBC: 11 सीटें (12.94%)
• UR (जनरल): मात्र 07 सीटें (8.24%)
यानी एससी/एसटी आरक्षण 78.82% और कुल आरक्षण 91.76% किया है, जो संविधान का खुला उल्लंघन है।
क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी कीमत पर एससी, एसटी और ओबीसी तीनों का कुल आरक्षण मिलकर 50% से ज्यादा न किया जाए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दलील दी है कि क्योंकि यह एससी/एसटी बजट से बनता है इसलिए आरक्षण बढ़ा सकते हैं। लेकिन ध्यान से देखिए, अगर यह एससी/एसटी बजट से बना हुआ है तो इसमें ओबीसी का आरक्षण क्यों घुसेड़ा गया है?
यानी यह सिर्फ राजनीति है।
और सबसे मुख्य बात, जब हम कोर्ट में केस जीत चुके हैं, तो उसके बाद भी यह करने का मतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार सामान्य कैटेगरी को बुरी तरीके से चिढ़ा रही है।
साथ ही माननीय हाई कोर्ट लखनऊ के आदेश की अवहेलना भी कर रही है
और अपने शपथ पत्र से मुकर रही है।
दलित तुष्टिकरण में बीजेपी सरकार हर सीमा क्रॉस कर चुकी है।
एक सवाल है, अगर एससी/एसटी के लिए चार मेडिकल कॉलेज अलग से बनाए गए हैं, तो हम जनरल कैटेगरी के लिए चार मेडिकल कॉलेज क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं?
क्या हम लोग टैक्स नहीं देते हैं? क्या इस मेडिकल कॉलेज के लिए सिर्फ एससी/एसटी से ही टैक्स वसूला जा रहा है?
ये है आदेश सीट मैट्रिक्स जो आज जारी की गई है
लक्षद्वीप में मीट बैन नहीं होना चाहिए क्योंकी वहाँ मुसलमान बहुसंख्य हैं और उनकी भावनाओं को आहत पहुँचेगी!
मथुरा में मीट बैन नहीं होना चाहिए क्योंकि वहाँ मुसलमान अल्पसंख्य हैं और उनकी भावनाओं को आहत पहुँचेगी
#Secularism!
जाति प्रमाण पत्र बनवाते हो तहसील से और जातिवाद का आरोप ब्राह्मणों पर
जाति प्रमाण पत्र बंद करो जातिवाद खत्म हो जाएगा- उत्तर प्रदेश मंत्री ओम प्रकाश राज्भर
लाशों को चोदने वाली कौम
कब्र में गली लाशों में भी गांड़ और योनि का छेद तलाशने वाले व्यभिचारी
इनके घर में ब्याहने वाली रांड को क्या पता जौहर की महत्ता और क्षत्राणी शक्ति का।
आँख कान नाक मुंह चूत गुदा हर छेद में पचहत्तर लंड ले चुकी लाइब्रैंडियां तो ज्ञान ना ही दें।
बलातकारी कौम
मनुस्मृति 3.112 में साफ साफ लिखा है कि 👇
गरीब और जरूरतमंद के प्रति दया में वैश्य और शूद्र अतिथि को भी भोजन कराने तथा आनृशंस्य यानी कठोरता न रखने/करुणा दिखाने की बात आती है।
और वही दूसरी तरफ संविधान कहता है कि दलितों को नीच समझो।
इसलिए मनुस्मृति सर्वश्रेष्ठ है।
"जाति खत्म करनी है, तो पहले तहसील से जाति प्रमाण पत्र बनाना बंद करो!" — ओम प्रकाश राजभर 🔥
UP विधानसभा में ओम प्रकाश राजभर ने कहा —सरकारी तंत्र ही कागजों पर ठप्पा मारकर जाति तय करता है।
जब तक तहसीलों से जाति प्रमाण पत्र जारी होते रहेंगे, तब तक समाज से जाति प्रथा खत्म नहीं हो सकती!
स्वरा भास्कर को अब कौन समझाए कि रानी पद्मिनी एक बहादुर और स्वाभिमानी महिला थीं। कोई वामपंथी वेश्या नहीं जो आज भैया बोले ओर कल सैंया बनाकर बिस्तर गरम कर दे।
Jauhar | Swara Bhaskar
मुल्ले शवों के साथ भी रेप करते थे। पाकिस्तान में आज भी वही हो रहा है। इसलिए हिन्दू स्त्रियाँ जौहर करती थीं। किसी दो कौड़ी की मुल्ला प्रेमी, करियर में फुँक चुकी लौंडी के लिए यह समझना कठिन हो सकता है क्योंकि उसके लिए उसकी ‘पुसी फॉर अ रेंट’ ही जीवन का सत्य है।
ऐसी लौंडियाँ सेक्स को स्वतंत्रता मानती हैं, जितनों के साथ सेक्स, उतनी अधिक स्वतंत्र। हर स्त्री ऐसा नहीं मानती। उनके लिए अरब के बाजारों में सेक्स स्लेव बनना उतना अडवेंचरस और फुलफुलिंग नहीं दिखा होगा, जितना आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझती, भैया कह कर सैंया बनाने वाली के लिए दिखता हो।
तुम नंगी हो कर एम्सटर्डम के बाजारों के शीशे में नाचों, तुम्हारी मुटल्ली देह भी किसी को पसंद आ जाएगी। हाँ, किसी योनि-केन्द्रित लौंडिया का नारीवाद यह तय नहीं करेगा कि दूसरी स्त्रियाँ रंडी बन कर ही घूमें क्योंकि तुम्हें रंडीपना बहुत पसंद है।
यह पोस्ट मैंने बहुत माइल्ड लिखा है। हिन्दू नारियों पर ऐसे आक्षेप का उत्तर मैं और भी अच्छी शब्दावली के साथ दे सकता हूँ।
PET के form को भरने का 2-3 दिन से कोशिश कर रहा हूँ मेरा OTR हो गया,लेकिन Log in करने के लिए OTP ही नहीं आ रही mobile और OTR no. से काफी बार कोशिश कर ली है।
@UpssscOfficial1@myogiadityanath
आज last date है, plz repost कर दो शायद सरकार तक बात पहुँच जाए और form की date बढ़ जाए.