हर बरस भीषण जलभराव का शिकार होने वाली टिकैत राय सचिवालय कालोनी, लखनऊ में नाला-नाली सफाई दिवास्वप्न है। खमियाजा पब्लिक भुगते, बस समय से सारे टैक्स जमा हो जाने चाहिए। आई बरसात तो बरसात पे रोना आया। @Sushma_Kharkwal@AdminLKO@SureshKKhanna
महाकवि भूषण की जन्मभूमि टिकवांपुर (कानपुर) में भरा भूसा, बंधे रहते मवेशी। महिला अस्पताल एवं प्रसूति केंद्र न होने से हर बरस एक दर्जन से अधिक गर्भवती मर जाती हैं। छत्रपति शिवाजी ने जिन महाकवि को 52 जागीर दीं, आज वह अपने ही घर में बेगाने हैं।
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पुस्तकें किसी भी राष्ट्र की युवा पीढ़ी को एक वैचारिक आधार प्रदान करती हैं । प्रधानमंत्री मोदी घरों में देवालय के साथ पुस्तकालय की बात कर चुके हैं । पुस्तकों की बिक्री के समक्ष अनेक चुनौतियों हैं । दैनिक जागरण का मेरा स्तंभ ।
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हिंदुत्व के सबसे पहले अलम्बदार महाकविभूषण भूषण की जन्मभूमि है टिकवांपुर। यहां समाजसेवी ने अस्पताल के लिए विशाल मकान दान किया, लेकिन खुल गया आंगनबाड़ी केंद्र। समय से इलाज न मिलने पर हरसाल मर जाती है दर्जनभर से महिलाएं। कोई ध्यान देने वाला नहीं।
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