नीदरलैंड ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने व शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया है।
यह सम्मान, संघ के त्याग, अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति की शताब्दी यात्रा का वैश्विक स्वीकार है।
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हल्दीघाटी की धरती आज भी उस रणभेरी को याद करती है, जब प्रताप सिंह ने मुगलों की ताकत को ललकारा था। वो युद्ध नहीं, स्वाभिमान की लड़ाई थी।
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जिसने जीवनभर जंगलों में रहकर भूखा रहना स्वीकार किया, पर मुगलों की सत्ता स्वीकार नहीं की – वो थे महाराणा प्रताप। ऐसे प्रताप को शत् शत् नमन!
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महाराणा प्रताप — एक ऐसा नाम जो साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। उनकी जयंती के अवसर पर हम उस ऐतिहासिक युद्ध की स्मृति करते हैं, जिसने भारतीय इतिहास में वीरता की नई परिभाषा लिखी — हल्दीघाटी का युद्ध।#HinduwasurajPratap
अकबर ने भारत के राजाओं को अपने अधीन कर मुग़ल साम्राज्य फैलाया। अधिकांश राजपूतों ने संधि की, पर मेवाड़ के महाराणा प्रताप ने आत्मगौरव और स्वराज्य के लिए झुकना स्वीकार नहीं किया।
यही टकराव बना हल्दीघाटी युद्ध की पृष्ठभूमि।
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महाराणा प्रताप का प्रिय अश्व 'चेतक' सिर्फ घोड़ा नहीं, बलिदान और वफादारी की मिसाल था।
युद्ध में घायल चेतक ने महाराणा को पीठ पर बैठाकर दुश्मनों से दूर पहुँचाया।
एक गहरे नाले को पार करते ही चेतक गिर पड़ा — जीवन न्यौछावर कर दिया, लेकिन प्रताप की रक्षा की।
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