7. 5% ग्रोथ की घनघोर प्रशंसा करता हूं। वस्तुतः यह सरकार द्वारा आर्थिक संयम बरतने का एक शानदार उदाहरण है।
वरना तो वो 21% ग्रोथ भी घोषित कर दे, तो आप क्या ही बिगाड़ लोगे ?
•पत्रकार–– आप क्या कहना चाहेंगे?
•व्यक्ति–– आप तो जानते ही हैं कि लोगों के सामने बहुत सारी समस्याएँ हैं।
•पत्रकार–– कैसी समस्याएँ? हमारी GDP अब 7.8% है और हम ‘विकसित भारत’ बन रहे हैं।
•व्यक्ति 🤯–– तो फिर लोगों के चेहरों पर खुशी क्यों नहीं दिखाई देती?
•एक और व्यक्ति ⚡–– क्योंकि कोई खुशी है ही नहीं!
UP में कांग्रेस की तस्वीर बदल रही है!
सुबह 10 बजे दिल्ली कांग्रेस के दफ्तर में बड़ी हलचल रहेगी। पुख्ता सूत्र बता रहे हैं कि AIMIM के चर्चित नेता आसिम वकार कांग्रेस में शामिल होंगे। ज्वाइनिंग के वक्त इमरान प्रतापगढ़ी भी मौजूद रहेंगे। आसिम वकार को पार्टी में लाने के पीछे उनकी अहम भूमिका है। आसिम वकार लखनऊ की एक सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं।
एक दूसरी चर्चा मोहनलालगंज से बीजेपी के पूर्व सांसद कौशल किशोर को लेकर भी है। अगले कुछ दिनों में वो भी बड़ा सरप्राइज दे सकते हैं। कौशल किशोर दलित समाज से आते हैं। उनकी पत्नी अभी BJP विधायक हैं। कौशल किशोर का राजनीतिक कद इस बात से समझा जा सकता है कि वो मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
सूत्र बताते हैं कि ये तो सिर्फ झांकी है। सितंबर से शुरू होने वाला ज्वाइनिंग का ये सिलसिला दिसंबर तक जारी रहेगा। सबसे ज्यादा ज्वाइनिंग मुस्लिम और दलित समाज के नेताओं की होगी। कांग्रेस का पूरा फोकस यूपी के दलित वोटर्स को करीब लाने का है। राहुल गांधी इसी मिशन में जुटे हैं।
पिछले कुछ चुनावों में BSP से छिटका हुआ वोट BJP की तरफ शिफ्ट हुआ है। 2024 के चुनाव में कुछ हद तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस वोट को अपने साथ जोड़ा। टिकट वितरण में दलित चेहरों का खूब ध्यान रखा गया। 2027 में भी ऐसा ही होने की उम्मीद है। अब अगर बचा हुआ दलित वोट भी BJP से हट गया तो 2027 में बदली हुई तस्वीर सामने आ सकती है।
SIR में दिल्ली में 33% और महाराष्ट्र में 21% नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। विशेषकर अल्पसंख्यकों के नाम पर कैंची चली है।
करोड़ों नाम अब धक्के खाते फिरेंगे अपना नाम जुड़वाने के लिए, चुनाव आयोग ने लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है, बंगाल का उदाहरण सबके सामने है।
सुप्रीम कोर्ट भी चुनाव आयोग को नहीं रोक पा रहा है। चुनाव आयोग बेबस लोगों की नागरिकता से खिलवाड़ करने का जरिया बन गया है।
विपक्ष भी सिर्फ़ कोर्ट के भरोसे बैठा है, सिर्फ मीडिया में या संसद में चार डायलॉग बोल देने से काम नहीं चलेगा।
बीजेपी विपक्ष को सत्ता में नहीं आने देगी, जब वोट नहीं होंगी जनता क्या करेगी।
विपक्ष को सड़कों पर आना चाहिए, जरूरत पड़े तो सुप्रीम कोर्ट का घेराव करें।
यह लोकतंत्र को मार देने का षड्यंत्र है, इसका मुकाबला करना ही होगा।
ये तो LDA ने सच ही कहा कि अगर JPNIC भाजपा सरकार चलाएगी तो हज़ारों करोड़ का नुक़सान होगा क्योंकि सारी कमाई ये कमीशनख़ोर भाजपाई और उनके भ्रष्ट अधिकारी खा जाएंगे।
वैसे LDA के इन ज्ञानियों-अधिकारियों से ये पूछा जाए कि क्या कोई व्यापारी घाटे का सौदा करेगा मतलब भाजपा और उनके नालबद्ध अधिकारियों को कमीशन भी खिलाएगा और घाटा भी उठाएगा।
अब तो जनता LDA से पूछ रही है : इस रिपोर्ट को बनाने के लिए आपको कितना परसेंट कमीशन मिला?
LDA अपनी फुल फार्म बदलकर, ये कर ले : Lucknow Destruction Authority
(कोष्ठक में : जनता पूछ रही है कि मुख्यमंत्री जी और उनके सरकारी विभाग-महकमे JPNIC बेचने पर इतनी ज़्यादा सफ़ाई क्यों दे रहे हैं…
जनता को ऐसा क्यों लागा
कुछ तो गड़बड़ है ….
डियर चुनाव आयोग, कहाँ हो? ज़िंदा हो कि नहीं?
दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.56 लाख नाम गायब हैं। कुछ सीटों पर 40% से ज़्यादा वोटर ही गायब!
कोई तो बताए कि आख़िर चल क्या रहा है? चुनाव हो रहा है या मतदाता ही “चुने” जा रहे हैं?
GDP का बेस ईयर 2011-12 से बदल कर 2022-23 करने के बाद GDP ग्रोथ आंकड़ा बढ़ कर ही आता
लेकिन कृषि, मैनुफैक्चरिंग, खनन सब मंदा क्यों है?
चिंता की बात है कि: नौकरी नहीं बन रहीं, निवेश नहीं हो रहा, विदेशी निवेशक मार्केट छोड़ रहे हैं, रुपया गिर रहा है, क़र्ज़ का बोझ निरंतर बढ़ रहा है
ये है भाजपा ‘कालीन’ विकास… सुना तो ये था कि दरारों को कालीनों से ढका जाता है लेकिन यहाँ तो गंगा एक्सप्रेसवे के गड्ढे ढके जा रहे हैं, कुछ दिनों पहले कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पंखे लगे थे। भाजपा एक्सप्रेसवे को अपने भ्रष्टाचार का ड्राइंग रूम बना रही है क्या?
7.8% GDP ग्रोथ का ढोल पीट रहे हैं, लेकिन आम आदमी की जेब में सिर्फ महंगाई और कर्ज है.
बेरोजगारी, घटती बचत और बढ़ती असमानता - यही असली तस्वीर है. आंकड़े चमक रहे हैं, जमीनी हकीकत नहीं.
आप खुद देखिए - पिछले 2 साल में आपके पोर्टफोलियो में कितना रिर्टन आया?
सब ठप पड़ा है
सरकार ने जानबूझकर ऐसा तरीका चुना है ताकि #CasteCensus फेल हो जाए। यह कोई चूक नहीं, बल्कि एक “Designed Failure” है।
सरकार पहले आम सहमति बनाए।
If there is no consensus,
there is no Census !
बोलते रहिए, आवाज़ उठाते रहिए। अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना ही एक रास्ता होता है। 22 हज़ार करोड़ का स्कैम करने वाले सुभाष चंद्रा की लोन माफ़ी पर आज NCLT ने रोक लगा दी। अगर सोशल मीडिया पर इतना आवाज़ नहीं उठता तो आज ये सब नहीं होता। हर डकैत क्रूर लुटेरों के ख़िलाफ़ बोलते रहिए। वो बार बार स्कैम कर रहे तो आप बार बार बोलिए और बार बार विरोध करिए। ग़लत के ख़िलाफ़ चुप मत रहिए। ये बड़ी जीत है हम सबकी। अब जब तक सुभाष चंद्रा पैसे नहीं चुकाता तब तक सवाल पूछते रहेंगे। ये देश हमारा है , लड़ेंगे भी हम। उन लुटेरों का ये देश नहीं है। इसलिए रक्षा करना भी हमारी ज़िम्मेदारी है।
•Godi Media का प्रोपेगेंडा ध्वस्त 🔥
•पत्रकार –– कई जनाधार वाले नेता कांग्रेस छोड़कर चले गए, क्योंकि राहुल गांधी उन्हें समय नहीं देते थे।
•इमरान प्रतापगढ़ी –– अब जाकर उन नेताओं से पूछिए कि उन्हें नरेंद्र मोदी कितना समय देते हैं। 😭
•पत्रकार –– तो क्या हुआ? वे आज भी BJP में हैं।
•प्रतापगढ़ी –– क्योंकि उन्हें CBI और ED के मामलों का डर है। 🔥
•पत्रकार –– तो क्या आपको राहुल गांधी से मिलने का समय मिलता है?
•प्रतापगढ़ी –– हाँ, मैं तीन दिन पहले ही उनके घर जाकर उनसे मिला हूँ। 🗿
पत्रकार के सवालों का ऐसा करारा जवाब कि पूरा नैरेटिव ही पलट गया! 🔥 @ShayarImran
तस्वीर में दिख रही लड़की का नाम Naira हैं, रात के समय उज्जैन के घाट पर बैठी थी ,
तभी एक ढोंगी आया और बगल में बैठ गया उसे लगा कि वो अकेली हैं इसलिए लड़की से कहता हैं कि मेरे Room पर कोई नहीं चलोगी,
लड़की ने पूछा कि मुझे क्यों अपने रूम पर ले जाओगे , तो कहने लगा कि ऐसे ही आपको खाना खिलाऊंगा,
जब लड़की ने बताया कि जो वहां बैठे हैं वो मेरे बाबा हैं तो चुप चाप वहां से खिसकने लगा,
उज्जैन को धार्मिक नगरी के रूप में जाना जाता हैं, महाकाल दर्शन के लिए लाखों लोग आते हैं,
अगर वहां भी महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है तो फिर बाकी जगह क्या हाल होगा?