बजाय सूर्य देवता को बोलने के की वो अपना ताप काम करें यानी अपनी सेटिंग बदलें हमें धरती पर अपनी यानी इंसानों की सेटिंग बदली करनी होगी, पेड़ लगाने होंगे, तालाबों को बचाना होगा, पत्तों को जलाना बंद करना होगा।
हम कब तक सूखे पत्तों को जलाते रहेंगे? बजाय कचरा साफ करने के, नगर निगम कांट्रेक्टर के आदमी कचरे को जलाना ज्यादा आसान मानते हैं। सूखे पत्ते की अच्छी खाद बन सकती है जलाने पर वोह जहरीली गैस बन कर पॉल्यूशन बढ़ाते हैं साथ ही वातावरण का तापमान भी। जितना हो सके हम इसको रोकें, सबको बताएं।
हम कब तक सूखे पत्तों को जलाते रहेंगे? बजाय कचरा साफ करने के, नगर निगम कांट्रेक्टर के आदमी कचरे को जलाना ज्यादा आसान मानते हैं। सूखे पत्ते की अच्छी खाद बन सकती है जलाने पर वोह जहरीली गैस बन कर पॉल्यूशन बढ़ाते हैं साथ ही वातावरण का तापमान भी। जितना हो सके हम इसको रोकें, सबको बताएं।
हम अक्सर ये बोलकर की मेरे अकेले के एक पेड़ लगाने से या मेरे एक पेपर शीट बचाने से क्या होगा, अपने आप को समझा लेते हैं, कुछ प्रयास नहीं करते। पृथ्वी पर 700 करोड़ की आबादी छोटे छोटे प्रयास से जंगलों को कटने से बचा सकती है। आइए पेपर, पानी और बिजली बचाएं, जीवन में एक पेड़ तो लगाए।
ईश्वर कृपा, बड़ों के आशीर्वाद, सब के स्नेह की बदौलत आज मेरे ट्विटर (x) अकाउंट पर सिर्फ तीन महीनों में ही एक लाख फॉलोअर्स हो गए हैं। A big thank you to all. वैसे मेरा एक्चुअल मकसद युवाओं को मेंटर यानी गाइड करना है, उम्मीद है आगे भी आपका स्नेह और आलोचना मुझे मिलती रहेगी। जय हिन्द।